क्विक कॉमर्स का दबदबा: ग्राहक अब कीमत नहीं, सुविधा और स्पीड को दे रहे अहमियत

Shivam
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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भारत में खरीदारी का पैटर्न तेजी से बदल रहा है और अब उपभोक्ता कीमत से ज्यादा सुविधा और तेज डिलीवरी को महत्व देने लगे हैं. मंगलवार को जारी Grant Thornton Bharat LLP की रिपोर्ट के अनुसार, 70 प्रतिशत से अधिक उपभोक्ताओं ने कहा कि अगर छूट कम भी हो जाए, तब भी वे क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल जारी रखेंगे. यह साफ संकेत है कि ग्राहकों के लिए अब “सस्ती कीमत” से ज्यादा “तेजी और सुविधा” अहम हो गई है.

किराना दुकानों की पकड़ अभी भी मजबूत

रिपोर्ट में बताया गया है कि रोजमर्रा की किराना खरीदारी के लिए मोहल्ले की दुकानें अभी भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं और भरोसे पर आधारित लेन-देन के कारण लोगों की पहली पसंद बनी हुई हैं. हालांकि, पिछले एक साल में 51 प्रतिशत उपभोक्ताओं ने माना कि उनकी किराना दुकानों पर निर्भरता कम हुई है, जो इस सेक्टर के सामने बढ़ती प्रतिस्पर्धा को दर्शाता है.

कैसे बदल रही है खरीदारी की आदत

क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म का उपयोग अलग-अलग जरूरतों के लिए किया जा रहा है. करीब 45 प्रतिशत लोग इसका इस्तेमाल आखिरी समय या जरूरी सामान खरीदने के लिए करते हैं. वहीं 24% लोग दूध, ब्रेड जैसे रोजमर्रा के सामान के लिए इन प्लेटफॉर्म्स का सहारा लेते हैं, जबकि 19% लोग स्नैक्स और पेय पदार्थ जैसी अचानक खरीदारी के लिए इसका उपयोग करते हैं. इसके उलट, 13% लोगों ने कहा कि वे अब पहले से ज्यादा किराना दुकानों पर निर्भर हैं, जबकि 27 प्रतिशत उपभोक्ताओं की खरीदारी की आदतों में कोई खास बदलाव नहीं आया है.

किराना दुकानदारों के सामने नई चुनौतियां

रिपोर्ट के मुताबिक, किराना दुकानदारों को कम मुनाफा, छोटी क्रेडिट अवधि और ग्राहकों की बढ़ती अपेक्षाओं जैसी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है. खासकर प्रोडक्ट की उपलब्धता और विविधता को लेकर ग्राहकों की उम्मीदें बढ़ गई हैं, जिससे छोटे दुकानदारों पर दबाव बढ़ा है.

डिजिटल साझेदारी की ओर बढ़ते कदम

हालांकि, बदलते समय के साथ कई किराना दुकानदार अब डिजिटल प्लेटफॉर्म के साथ जुड़ने के लिए तैयार हो रहे हैं. रिपोर्ट के अनुसार, करीब 40 प्रतिशत दुकानदारों ने क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म के साथ साझेदारी में रुचि दिखाई है. वहीं 32% दुकानदार इसमें दिलचस्पी तो रखते हैं, लेकिन उन्हें इसकी प्रक्रिया की पूरी जानकारी नहीं है. इसके अलावा, 20% दुकानदारों ने कहा कि अगर उन्हें तकनीकी और संचालन से जुड़ी मदद मिले, तो वे इस मॉडल में शामिल होने के लिए तैयार हैं. इससे साफ है कि भविष्य में किराना दुकानों का डिजिटल नेटवर्क से जुड़ना तेजी से बढ़ सकता है.

डिजिटल पेमेंट बना आम, लेकिन एडवांस टेक अभी सीमित

रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि अब ज्यादातर किराना दुकानों पर डिजिटल पेमेंट आम हो चुका है और UPI व QR कोड के जरिए भुगतान व्यापक रूप से स्वीकार किया जा रहा है. हालांकि, POS सिस्टम, इन्वेंट्री मैनेजमेंट और डिजिटल ऑर्डरिंग जैसे एडवांस टूल्स का इस्तेमाल अभी सीमित है. इसकी मुख्य वजह इनकी लागत, ट्रेनिंग की जरूरत और संचालन की जटिलता बताई गई है.

बड़े सर्वे पर आधारित रिपोर्ट

यह रिपोर्ट देशभर में 1,600 से अधिक उपभोक्ताओं और 1,000 से ज्यादा किराना दुकानदारों के सर्वे पर आधारित है, जिससे यह साफ होता है कि यह ट्रेंड केवल कुछ शहरों तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे देश में तेजी से फैल रहा है.

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