Rupee VS Dollar Today India:भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की नई पहल का असर सोमवार को मुद्रा बाजार में साफ दिखाई दिया, जब भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले करीब 1.3 प्रतिशत मजबूत होकर 93.59 के स्तर पर खुला. यह मजबूती ऐसे समय में आई है, जब पिछले कुछ हफ्तों से रुपया लगातार दबाव में था और विदेशी मुद्रा बाजार में अस्थिरता बढ़ रही थी. आरबीआई ने बाजार में बढ़ती सट्टेबाजी पर लगाम लगाने के लिए बैंकों को सख्त निर्देश जारी किए हैं, जिससे रुपये को तत्काल राहत मिलती दिख रही है.
बैंकों की ओपन पोजिशन पर सख्ती, सट्टेबाजी पर लगाम
केंद्रीय बैंक ने अधिकृत डीलर बैंकों को निर्देश दिया है कि वे रुपए में अपनी ओपन पोजिशन को 100 मिलियन डॉलर तक सीमित रखें. इसके तहत बैंकों को दिन के अंत तक अपनी ऑनशोर पोजिशन इसी सीमा के भीतर रखनी होगी. इसके साथ ही सभी कमर्शियल बैंकों को 10 अप्रैल तक इस नियम को लागू करने के निर्देश दिए गए हैं. आरबीआई ने यह भी संकेत दिया है कि बाजार की स्थिति के अनुसार आगे चलकर अलग-अलग सीमाएं तय की जा सकती हैं.
अनुमान के मुताबिक, विदेशी मुद्रा बाजार में इस तरह की ओपन पोजिशन का कुल आकार 25 अरब डॉलर से लेकर 50 अरब डॉलर से अधिक तक हो सकता है, जिससे यह कदम काफी प्रभावी माना जा रहा है.
मार्च में रुपये पर दबाव, 94.84 तक पहुंचा था स्तर
मार्च महीने में वैश्विक तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के चलते रुपये में 4 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई थी. पिछले शुक्रवार को रुपया करीब 1 प्रतिशत गिरकर 94.8125 तक पहुंच गया था और 94.84 का स्तर भी छू लिया था. यह गिरावट दर्शाती है कि वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां और भू-राजनीतिक तनाव भारतीय मुद्रा पर लगातार दबाव बनाए हुए हैं.
तेल की कीमतों में उछाल बना बड़ा कारण
विश्लेषकों के अनुसार, कच्चे तेल की लगातार ऊंची कीमतें रुपये और पूरी भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सबसे बड़ा जोखिम बनी हुई हैं. पश्चिम एशिया में जारी तनाव अब पांचवें हफ्ते में पहुंच चुका है और इसके और बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं. संघर्ष के बढ़ने, हूती विद्रोहियों के शामिल होने और अमेरिका द्वारा अतिरिक्त सैनिक तैनात करने के कारण ब्रेंट क्रूड की कीमत बढ़कर करीब 116 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है.
ताजा आंकड़ों के अनुसार, ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 3.66 प्रतिशत बढ़कर 116.70 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया, जबकि अमेरिकी डब्ल्यूटीआई क्रूड 3.75 प्रतिशत बढ़कर 103.38 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखा.
भारतीय अर्थव्यवस्था पर बढ़ सकता है दबाव
विशेषज्ञों का मानना है कि पहले भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत स्थिति में थी, जहां तेज विकास दर, कम महंगाई और संतुलित घाटा था. लेकिन मौजूदा वैश्विक हालात के चलते अब जोखिम बढ़ गया है. आने वाले समय में जीडीपी ग्रोथ में कमी, महंगाई में बढ़ोतरी और राजकोषीय व चालू खाता घाटा बढ़ने की आशंका जताई जा रही है. खासकर तेल की कीमतों में तेजी से आयात बिल बढ़ सकता है, जिससे आर्थिक संतुलन पर असर पड़ेगा.
शेयर बाजार ने जोखिम को पहले ही शामिल किया
हालांकि, बाजार ने इन जोखिमों को काफी हद तक पहले ही ध्यान में रख लिया है. निफ्टी का पी/ई रेशियो करीब 19.9 गुना पर आ गया है, जो फिलहाल संतुलित स्तर माना जा रहा है, लेकिन इसे अभी सस्ता नहीं कहा जा सकता. यह संकेत देता है कि निवेशक पहले से ही सतर्क हैं और आने वाले जोखिमों को लेकर बाजार में सावधानी बनी हुई है.
आगे क्या? रुपये पर अभी भी बना रहेगा दबाव
विश्लेषकों के अनुसार, आरबीआई का यह कदम अल्पकाल में रुपये को सहारा दे सकता है, क्योंकि डॉलर की बड़ी पोजिशन कम होने से मुद्रा पर दबाव घटेगा. हालांकि, जब तक कच्चे तेल की कीमतों में ठोस गिरावट नहीं आती और वैश्विक तनाव कम नहीं होता, तब तक रुपये पर दबाव पूरी तरह खत्म होना मुश्किल है. फिलहाल डॉलर की मांग और आयात से जुड़ी लागतें रुपये की दिशा तय करती रहेंगी.