Rupee Strong: भारतीय मुद्रा में लगातार मजबूती देखने को मिल रही है. बुधवार को रुपया लगातार चौथे कारोबारी सत्र में मजबूत हुआ और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 40 पैसे की बढ़त दर्ज की. इस बढ़त के साथ रुपया 0.4 प्रतिशत मजबूत होकर 92.61 प्रति डॉलर पर पहुंच गया, जो पिछले कारोबारी सत्र के 93 प्रति डॉलर के स्तर से बेहतर है. रुपये में आई यह मजबूती केवल घरेलू कारणों से नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर बने सकारात्मक माहौल का भी नतीजा है.
अमेरिका-ईरान सीजफायर से बाजार में आई राहत
रुपये में तेजी का सबसे बड़ा कारण अमेरिका और ईरान के बीच घोषित दो सप्ताह का अस्थायी युद्धविराम रहा. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस सीजफायर का ऐलान किया, जिसके बाद वैश्विक बाजारों में राहत का माहौल देखने को मिला. इस प्रस्ताव में दो सप्ताह तक संघर्ष रोकने और रणनीतिक रूप से अहम होर्मुज जलडमरूमध्य को तुरंत खोलने की बात कही गई है. यह वही समुद्री मार्ग है, जिससे दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल आपूर्ति पर निर्भर करता है. ट्रं
प ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर पोस्ट कर इसकी पुष्टि की और बताया कि उन्होंने अमेरिकी सेना को पीछे हटने के निर्देश दिए हैं.
कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट
सीजफायर के ऐलान के बाद कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त गिरावट देखने को मिली. ब्रेंट क्रूड करीब 16 प्रतिशत यानी 17.39 डॉलर गिरकर 91.88 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया, जबकि अमेरिकी WTI क्रूड लगभग 20 प्रतिशत यानी 21.90 डॉलर टूटकर 91.05 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया.
तेल की कीमतों में यह गिरावट भारत जैसे आयातक देश के लिए राहत भरी खबर मानी जा रही है, क्योंकि इससे आयात बिल कम होने और महंगाई पर दबाव घटने की उम्मीद बढ़ जाती है.
RBI की स्थिर नीति भी बनी सहारा
इस बीच भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर यथावत रखा है. केंद्रीय बैंक के इस संतुलित रुख ने भी बाजार को स्थिरता देने में अहम भूमिका निभाई है. RBI का यह फैसला संकेत देता है कि फिलहाल महंगाई और विकास के बीच संतुलन बनाए रखने की कोशिश की जा रही है.
निवेशकों का भरोसा लौटा
सीजफायर की घोषणा ने कई हफ्तों से चल रही वैश्विक अनिश्चितता के बीच निवेशकों के भरोसे को कुछ हद तक वापस लौटाया है. हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि यह राहत कितने समय तक टिकेगी, यह पूरी तरह इस बात पर निर्भर करेगा कि सीजफायर कितनी मजबूती से लागू होता है और होर्मुज जलडमरूमध्य से ऊर्जा आपूर्ति सामान्य रहती है या नहीं.
जोखिम अभी भी खत्म नहीं हुए
विश्लेषकों के अनुसार, ईरान ने इस सीजफायर को अस्थायी रूप से स्वीकार किया है, लेकिन इसके उल्लंघन की आशंका बनी हुई है. इजरायल के हमले जारी रहने की खबरों के बीच जवाबी कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता. यानी फिलहाल राहत जरूर है, लेकिन खतरा पूरी तरह टला नहीं है.
रुपया आयातकों के लिए फायदेमंद, निवेशकों में सतर्कता
विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा स्तर पर मजबूत रुपया आयातकों के लिए अनुकूल स्थिति पैदा करता है. हालांकि विदेशी निवेशक अभी भी भारतीय शेयर बाजार में बिकवाली कर रहे हैं, जिससे बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है.
सोना-चांदी में जबरदस्त उछाल
इसी बीच मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर सोने और चांदी की कीमतों में भी जोरदार तेजी देखने को मिली. सोने का वायदा भाव (5 जून) 3,688 रुपए यानी 2.7% उछलकर 1,54,934 रुपए प्रति 10 ग्राम के इंट्राडे हाई तक पहुंच गया. वहीं चांदी का वायदा भाव (5 मई) 6 प्रतिशत से ज्यादा बढ़कर 2,46,376 रुपए प्रति किलो के दिन के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया. यह तेजी वैश्विक अनिश्चितता के बीच सुरक्षित निवेश (safe haven) की मांग बढ़ने का संकेत देती है.
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