SEBI New Rules Mutual Funds: भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने गुरुवार को म्यूचुअल फंड्स की श्रेणियों में अहम बदलावों की घोषणा की है. नए नियमों के तहत अब एक्टिव इक्विटी म्यूचुअल फंड्स को भी सोना और चांदी जैसे कीमती धातुओं में निवेश करने की अनुमति मिल गई है. सेबी का उद्देश्य इक्विटी फंड्स में निवेश के विकल्पों को अधिक विविध और संतुलित बनाना है.
आमतौर पर अलग-अलग इक्विटी फंड्स के लिए शेयरों में न्यूनतम निवेश की सीमा तय होती है. यदि फंड मैनेजर उस सीमा से अधिक राशि बचती है, तो वह शेष हिस्से को नॉन-इक्विटी एसेट्स में भी निवेश कर सकता है.
लार्जकैप फंड्स में निवेश नियमों की व्याख्या
उदाहरण के लिए लार्जकैप फंड्स में 80 प्रतिशत हिस्सा लार्जकैप शेयरों में निवेश करना होता है. बाकी बचे हिस्से को फंड मैनेजर चाहे तो नॉन-इक्विटी या फिर स्मॉलकैप एवं मिडकैप में निवेश कर सकता है. सेबी ने कहा कि इक्विटी श्रेणी की योजनाओं में म्यूचुअल फंड अपने शेष हिस्से को इक्विटी, मनी मार्केट इंस्ट्रूमेंट्स, अन्य लिक्विड इंस्ट्रूमेंट्स तथा सोने और चांदी से जुड़े साधनों में निवेश कर सकते हैं. साथ ही, संबंधित परिसंपत्ति वर्ग के लिए निर्धारित सीमा के भीतर रहते हुए इनविट्स में निवेश की भी अनुमति होगी.
नई लाइफ साइकिल फंड श्रेणी की शुरुआत
इसके अलावा सेबी ने रिटायरमेंट और चिल्ड्रन सॉल्यूशन-ओरिएंटेड स्कीम्स को बंद करने का फैसला लिया है और उनकी जगह नई “लाइफ साइकिल फंड” श्रेणी शुरू की है. इन फंड्स की निवेश अवधि पहले से तय होगी और ये इक्विटी, डेट, राइट्स, इनविट्स, एक्सचेंज-ट्रेडेड कमोडिटी डेरिवेटिव्स तथा गोल्ड और सिल्वर ईटीएफ जैसे विभिन्न एसेट्स में निवेश कर सकेंगे. लाइफ साइकिल फंड्स की अवधि आमतौर पर 5 से 30 वर्ष तक हो सकती है. इनका निवेश ढांचा पूर्व-निर्धारित होगा, जिसमें समय के साथ-साथ इक्विटी का हिस्सा धीरे-धीरे कम किया जाता है, ताकि जोखिम घटे और दीर्घकालिक लक्ष्यों के अनुरूप स्थिरता बनी रहे.
निकास शुल्क और नई स्कीमों की अनुमति
हालांकि निवेशक अवधि के दौरान यूनिट्स को रिडीम कर सकते हैं, लेकिन दीर्घकालिक अनुशासन को प्रोत्साहित करने के लिए उच्च निकास शुल्क (पहले वर्ष में 3 प्रतिशत तक) लागू होगा. इसके अलावा, सेबी ने एक्टिव इक्विटी और हाइब्रिड फंड्स में स्कीम की संख्या को 11 से बढ़ाकर 12 कर दिया है. अब फंड हाउस एक साथ वैल्यू और कॉन्ट्रा दोनों प्रकार के फंड्स ऑफर कर सकते हैं. हालांकि, इसमें शर्त यह है कि दोनों स्कीम की पोर्टफोलियो का ओवरलैप 50 प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए.
थीमैटिक और सेक्टोरल फंड्स के लिए नया नियम
इसके अलावा, थीमैटिक और सेक्टोरल म्यूचुअल फंड्स को लेकर भी सेबी ने नया नियम लागू किया है. अब म्यूचुअल फंड हाउस को यह सुनिश्चित करना होगा कि किसी फंड का 50 प्रतिशत से अधिक पोर्टफोलियो उसी श्रेणी के दूसरे फंड या अन्य इक्विटी फंड्स (लार्जकैप को छोड़कर) से मेल न खाए. इसका उद्देश्य अलग-अलग योजनाओं के बीच अत्यधिक समानता को रोकना और निवेशकों को वास्तविक विविधता प्रदान करना है.
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