भारतीय शेयर बाजार के लिए आने वाला सप्ताह बेहद अहम साबित होने वाला है. कई घरेलू और वैश्विक कारक ऐसे हैं, जो बाजार की दिशा तय कर सकते हैं. निवेशकों की नजर खास तौर पर भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते तनाव पर टिकी हुई है. इन सभी फैक्टर्स का असर सीधे तौर पर बाजार के सेंटीमेंट पर पड़ेगा और इससे बाजार में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है.
RBI की मौद्रिक नीति बैठक से तय होगी दिशा
भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक 6 से 8 अप्रैल के बीच प्रस्तावित है. यह बैठक ऐसे समय पर हो रही है, जब महंगाई को लेकर चिंताएं लगातार बनी हुई हैं और वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर पहुंच चुकी हैं. इस बैठक में ब्याज दरों को लेकर लिए जाने वाले फैसले का सीधा असर बैंकिंग, रियल्टी, ऑटो और कंज्यूमर सेक्टर पर देखने को मिल सकता है. अगर ब्याज दरों में बदलाव होता है तो बाजार में बड़ी हलचल संभव है. इसलिए निवेशक इस बैठक के नतीजों का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं.
अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ा, सप्लाई चेन पर असर
वैश्विक स्तर पर अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव भी बाजार के लिए एक बड़ा जोखिम बना हुआ है. यह तनाव अब केवल राजनीतिक स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर वैश्विक सप्लाई चेन पर भी दिखाई देने लगा है. अगर यह तनाव और बढ़ता है तो इसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ेगा, जिससे महंगाई बढ़ सकती है और बाजार पर दबाव बन सकता है. ऐसे में निवेशक अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए हैं.
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल से बढ़ी चिंता
मौजूदा समय में कच्चे तेल की कीमत करीब 109 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी हुई है. पिछले एक महीने में इसमें 34% से ज्यादा की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो कि बाजार के लिए चिंता का विषय है. भारत जैसे देश, जो तेल का बड़ा आयातक है, उसके लिए यह स्थिति और गंभीर हो जाती है.
तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से महंगाई बढ़ती है, कंपनियों की लागत बढ़ती है और मुनाफे पर असर पड़ता है. आने वाले दिनों में तेल की चाल बाजार के लिए निर्णायक साबित हो सकती है.
लगातार छठे हफ्ते गिरावट, बाजार में बना दबाव
बीते सप्ताह शेयर बाजार में कमजोरी का सिलसिला जारी रहा और बाजार लगातार छठे हफ्ते गिरावट के साथ बंद हुआ. सेंसेक्स 1,953.90 अंक यानी 2.60% की गिरावट के साथ 73,319.55 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 593.35 अंक यानी 2.55% टूटकर 22,713 के स्तर पर आ गया. यह लगातार गिरावट इस बात का संकेत है कि बाजार में फिलहाल कमजोरी का दौर बना हुआ है और निवेशक सतर्क नजर आ रहे हैं.
ज्यादातर सेक्टर्स में बिकवाली, निवेशकों की चिंता बढ़ी
पिछले हफ्ते लगभग सभी प्रमुख सेक्टर्स में गिरावट देखने को मिली. निफ्टी PSU बैंक में 5.21%, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में 4.06%, हेल्थकेयर में 4.04%, ऑटो में 3.87%, फार्मा में 3.84 प्रतिशत, प्राइवेट बैंक में 3.27 प्रतिशत, इन्फ्रा में 2.90% और रियल्टी सेक्टर में 2.89% की गिरावट दर्ज की गई. हालांकि, निफ्टी आईटी और निफ्टी मेटल सेक्टर ही ऐसे रहे, जो हरे निशान में बंद हुए. इससे साफ है कि बाजार में व्यापक स्तर पर कमजोरी देखने को मिली.
मिडकैप और स्मॉलकैप शेयर भी दबाव में
गिरावट का असर केवल बड़े शेयरों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी कमजोरी देखने को मिली. निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 246.05 अंक यानी 1.55% की गिरावट के साथ 15,650.50 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 1,654 अंक यानी 2.99% टूटकर 53,677.05 पर पहुंच गया. इससे यह साफ होता है कि बाजार में व्यापक स्तर पर बिकवाली का दबाव बना हुआ है.
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