Stock Market Outlook: भारतीय शेयर बाजार में हालिया गिरावट के बाद अब रिकवरी की उम्मीद जताई जा रही है. एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और शेयरों के ऊंचे वैल्यूएशन (PE प्रीमियम) में कमी आने से बाजार को मजबूती मिल सकती है. इससे आने वाले महीनों में निवेशकों का भरोसा भी लौट सकता है.
रुपया और बॉन्ड यील्ड में सुधार का अनुमान
एमके ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले फिर से मजबूत होकर करीब 91 के स्तर तक पहुंच सकता है. वहीं 10 साल के सरकारी बॉन्ड की यील्ड भी मौजूदा 6.83% से घटकर लगभग 6.65% तक आ सकती है. रिपोर्ट में कहा गया है कि बाजार को सामान्य स्थिति में लौटने में लगभग 2 से 3 महीने का समय लग सकता है.
FPI बिकवाली से गिरा बाजार, अब बदल सकता है रुख
हाल के दिनों में निफ्टी में गिरावट देखने को मिली है. पिछले तीन कारोबारी सत्रों में इंडेक्स करीब 5 प्रतिशत तक फिसल गया, जिसकी मुख्य वजह विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की लगातार बिकवाली रही. हालांकि रिपोर्ट में उम्मीद जताई गई है कि यह ट्रेंड जल्द बदल सकता है और भारत एक बार फिर निवेश के लिए आकर्षक बाजार बन सकता है.
तेल की कीमतें बनी बड़ी चुनौती
रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि अगर ब्रेंट क्रूड की कीमतें ज्यादा समय तक ऊंची बनी रहती हैं, तो इसका असर अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है. अनुमान के मुताबिक, अगर ब्रेंट का औसत मूल्य 80 डॉलर प्रति बैरल रहता है, तो FY27 में भारत की जीडीपी ग्रोथ घटकर 6.6% रह सकती है. वहीं मुद्रास्फीति 4.3% और चालू खाता घाटा जीडीपी के 1.7% तक पहुंच सकता है.
100 डॉलर के पार तेल गया तो बढ़ेगा दबाव
अगर ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर जाता है, तो स्थिति और गंभीर हो सकती है. ऐसे में चालू खाता घाटा 2.5 प्रतिशत से अधिक हो सकता है और व्यापार घाटा 85 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है.
सरकार पर बढ़ सकता है वित्तीय बोझ
रिपोर्ट के अनुसार, मौजूदा तेल कीमतों के स्तर पर सरकार को पेट्रोल और डीजल पर करीब 19.5 रुपए प्रति लीटर तक उत्पाद शुल्क में कटौती करनी पड़ सकती है.
साथ ही एलपीजी सब्सिडी के रूप में लगभग 1 लाख करोड़ रुपए का अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ सकता है. इससे सरकार पर कुल मिलाकर जीडीपी के करीब 1.1% का अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ सकता है.
यह भी पढ़े: Swiggy Fee Hike: जोमैटो के बाद स्विगी ने भी बढ़ाई फीस, अब हर ऑर्डर पर देने होंगे ज्यादा पैसे

