Business News: भारत की डिजिटल भुगतान क्रांति अब दुनिया के कई देशों के लिए प्रेरणा बनती जा रही है. यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI), जिसने भारत में भुगतान के तरीके को पूरी तरह बदल दिया है, अब दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों का भी ध्यान आकर्षित कर रहा है. दक्षिण अफ्रीकी रिजर्व बैंक के गवर्नर लेसेत्जा कन्यागो ने भारतीय UPI प्रणाली को एक आदर्श मॉडल बताते हुए इसकी सराहना की है. एक नई रिपोर्ट के अनुसार, दक्षिण अफ्रीका नकदी पर अपनी निर्भरता कम करने और कैशलेस अर्थव्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ने की कोशिश कर रहा है. इस प्रक्रिया में भारत के UPI को एक सफल और प्रभावी उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है.
UPI को बताया कम लागत वाला प्रभावी मॉडल
दक्षिण अफ्रीकी रिजर्व बैंक के गवर्नर लेसेत्जा कन्यागो ने कहा कि दुनिया के कई देश कैशलेस अर्थव्यवस्था की दिशा में दक्षिण अफ्रीका से काफी आगे निकल चुके हैं. उन्होंने भारत की यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) प्रणाली का उदाहरण देते हुए कहा कि यह एक तेज, सरल और कम लागत वाला भुगतान माध्यम है. उन्होंने बताया कि UPI महंगे पॉइंट-ऑफ-सेल (POS) टर्मिनल पर निर्भर रहने के बजाय मोबाइल नंबर या QR कोड जैसे आसान माध्यमों के जरिए भुगतान की सुविधा देता है.
भारत के मॉडल से सीख रहा है दक्षिण अफ्रीका
दक्षिण अफ्रीकी सरकार ने माना है कि भारत और कुछ अन्य देशों ने अलग-अलग सिस्टम विकसित करने के बजाय ऐसी तकनीक अपनाई है, जिसका उपयोग कई सरकारी विभाग अलग-अलग सेवाएं देने के लिए कर सकते हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि यही मॉडल सरकारी सेवाओं को अधिक प्रभावी और सुलभ बनाने में मदद करता है.
भारत के पेमेंट इकोसिस्टम की रीढ़ बना UPI
UPI आज भारत के डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम की सबसे मजबूत कड़ी बन चुका है. रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया में होने वाले लगभग आधे रियल-टाइम डिजिटल ट्रांजैक्शन UPI के जरिए प्रबंधित किए जाते हैं. पिछले कुछ वर्षों में UPI ने डिजिटल भुगतान को आम लोगों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े कारोबारियों तक इसे व्यापक रूप से अपनाया गया है.
दक्षिण अफ्रीका भी बना रहा है नया सिस्टम
रिपोर्ट के अनुसार दक्षिण अफ्रीका सरकार एक मुफ्त और रियल-टाइम नेशनल पेमेंट सिस्टम विकसित कर रही है. इसका उद्देश्य डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देना और नकदी आधारित लेनदेन को कम करना है. सरकार चाहती है कि यह प्लेटफॉर्म देश के नागरिकों के लिए बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के उपलब्ध हो.
रिपोर्ट में कहा गया है कि यह प्रस्ताव दक्षिण अफ्रीका को उन विकासशील देशों की श्रेणी में खड़ा करने का प्रयास है, जो तेजी से कैशलेस ट्रांजैक्शन की ओर बढ़ रहे हैं. दक्षिण अफ्रीका में प्रीपेड कार्ड और डिजिटल वॉलेट बाजार के तेज विस्तार की संभावना जताई गई है. रिपोर्ट के अनुसार, यह बाजार 2024 में 11.8 बिलियन डॉलर के स्तर से बढ़कर 2029 तक 21.2 बिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है.
लेकिन चुनौतियां भी कम नहीं
हालांकि दक्षिण अफ्रीका के सामने कैशलेस अर्थव्यवस्था की राह आसान नहीं है. रिपोर्ट में कई बड़ी चुनौतियों का भी उल्लेख किया गया है. देश में लगभग 43 प्रतिशत वयस्क आबादी अब भी बैंकिंग सुविधाओं से वंचित है. इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट पहुंच 70 प्रतिशत से कम है और मोबाइल डेटा की लागत भी लोगों की आय के मुकाबले काफी अधिक है.
बिजली संकट भी बना बड़ी बाधा
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि वर्ष 2024 के दौरान दक्षिण अफ्रीका में 12,000 मेगावाट से अधिक की अनियोजित बिजली कटौती दर्ज की गई. लगातार बिजली संकट के कारण डिजिटल प्रणालियों की विश्वसनीयता को लेकर भी सवाल खड़े होते रहे हैं, जिससे कैशलेस भुगतान व्यवस्था के विस्तार में चुनौतियां पैदा हो सकती हैं.
महिलाओं के लिए भी महत्वपूर्ण है डिजिटल भुगतान
गवर्नर लेसेत्जा कन्यागो ने रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि नकदी पर अत्यधिक निर्भरता महिलाओं के लिए परिवार की वित्तीय जरूरतों का प्रबंधन कठिन बना देती है. उन्होंने कहा कि विशेष रूप से बच्चों के लिए मिलने वाली सहायता राशि और अन्य वित्तीय मदद के प्रबंधन में डिजिटल भुगतान प्रणाली अधिक सुविधाजनक साबित हो सकती है. उनके अनुसार समाज के लिए नकदी पर अत्यधिक निर्भर रहना आदर्श स्थिति नहीं है.
दक्षिण अफ्रीकी मीडिया ने की UPI की सराहना
दक्षिण अफ्रीकी मीडिया हाउस ने कहा, “भारत का UPI एक डिजिटल प्लेटफॉर्म की सफलता की कहानी है. UPI, विश्व स्तर पर पहचाना जाने वाला वित्तीय तकनीक का कमाल है, जिसने ज्यादातर कैश से चलने वाली अर्थव्यवस्था को दुनिया के सबसे बड़े रियल-टाइम डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम में बदल दिया है.”
कई देशों तक पहुंच चुका है UPI
रिपोर्ट में बताया गया है कि एनपीसीआई इंटरनेशनल पेमेंट्स लिमिटेड (NIPL) की साझेदारी के जरिए भारत का UPI अब सिंगापुर, संयुक्त अरब अमीरात, मॉरिशस और फ्रांस तक पहुंच चुका है. रिपोर्ट में आगे कहा गया, “नेपाल और भूटान ने पहले ही ट्रांसफर के लिए UPI को अपना लिया है और एशिया, अफ्रीका और यूरोप के सेंट्रल बैंकों और फिनटेक कंपनियों के साथ बातचीत चल रही है.
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