NCERT Judiciary Chapter Controversy: सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद NCERT ने मांगी माफी, किताब से हटाया विवादित अध्याय

Shivam
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (NCERT) को कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान की पाठ्यपुस्तक में शामिल एक विवादित अध्याय को लेकर भारी आलोचना का सामना करना पड़ा. यह अध्याय ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ विषय से जुड़ा था, जिसे लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी आपत्ति जताई. इसके बाद NCERT ने सार्वजनिक रूप से माफी मांगते हुए संबंधित सामग्री को हटाने का फैसला किया है.

सुप्रीम कोर्ट ने लगाई सख्त रोक

विवाद उस समय बढ़ गया जब नई पाठ्यपुस्तक ‘एक्सप्लोरिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड’ के एक अध्याय में न्यायपालिका की भूमिका पर चर्चा करते हुए कुछ आपत्तिजनक टिप्पणियां सामने आईं. मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, जहां शीर्ष अदालत ने इसे न्यायपालिका की गरिमा के खिलाफ माना. अदालत ने इस अध्याय पर पूर्ण प्रतिबंध लगाते हुए इसके प्रकाशन, पुनर्मुद्रण और डिजिटल प्रसार को भी अवैध घोषित कर दिया.

NCERT ने मांगी बिना शर्त माफी

विवाद बढ़ने के बाद NCERT ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर आधिकारिक बयान जारी किया. परिषद ने कहा कि कक्षा 8 की पुस्तक के अध्याय ‘हमारे समाज में न्यायपालिका की भूमिका’ को लेकर बिना शर्त माफी मांगी जाती है. साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि पूरी पुस्तक को बाजार से वापस ले लिया गया है और अब यह उपलब्ध नहीं होगी.

किताब वापस लेने के निर्देश

NCERT ने एक एडवाइजरी जारी करते हुए कहा है कि जिन संस्थानों, स्कूलों या व्यक्तियों के पास यह पुस्तक मौजूद है, वे इसे तुरंत वापस करें. परिषद का कहना है कि विवादित सामग्री को पूरी तरह हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है.

डिजिटल प्लेटफॉर्म से हटाने के आदेश

शिक्षा मंत्रालय ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय को भी निर्देश भेजे हैं. इसमें कहा गया है कि इस अध्याय से संबंधित सामग्री यदि किसी डिजिटल प्लेटफॉर्म या सोशल मीडिया पर उपलब्ध है, तो उसे तुरंत हटाया जाए.

अवमानना की चेतावनी भी दी गई

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने NCERT के निदेशक को कारण बताओ नोटिस जारी कर पूछा था कि इस मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई क्यों न की जाए. विशेषज्ञों का मानना है कि स्कूली पाठ्यक्रम में इस तरह की विवादित सामग्री का शामिल होना एक गंभीर प्रशासनिक चूक है, जिस पर कड़ी निगरानी की जरूरत है.

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