ज्ञानवापी मामला: मध्यस्थता कोर्ट में पूरी हुई सुनवाई, समझौता से दोनों पक्षों ने किया इनकार

Ved Prakash Sharma
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

वाराणसी: मंगलवार को ज्ञानवापी मामले में मध्यस्थता कोर्ट में सुनवाई को पूरी हो गई. दोनों पक्षों ने मध्यस्थता से इनकार कर दिया है.चार पत्रावलियों पर ये बातचीत हुई है. चारों पत्रावलियों के पक्षकार आए थे और सभी ने इस मामले में किसी भी प्रकार की मध्यस्थता से इनकार किया और कोर्ट के निर्णय को सर्वमान्य मानने की बात कही.

सभी पक्षों ने अपनी-अपनी बातों पर दृढ़ता दिखाई कि कोई समझौता नहीं करेंगे, अपनी लड़ाई लड़ेंगे. इससे यह कहा जा सकता है कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशानुसार समझौते की वार्ता विफल हो गई. चर्चा थी कि मुस्लिम पक्ष समझौता वार्ता का बहिष्कार करेगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. मुस्लिम पक्ष से अंजुमन मसाजिद के प्रतिनिधि और अधिवक्ता गण भी आए थे.

मंदिर पक्ष से रेखा पाठक, शैलेंद्र पाठक आदि अधिवक्ताओं के साथ आए थे. सभी का विचार लिया गया. हिंदू पक्ष ने कहा कि मेरा मंदिर है, मुझे मंदिर चाहिए और कोई समझौता नहीं हो सकता, वहां मंदिर है, आदिकाल से चला आ रहा है. हमें मंदिर में पूजा-पाठ करना है. शैलेंद्र पाठक ने कहा कि ज्ञानवापी परिसर के तलगृह के अंदर पूजा चल भी रही है.

वाराणसी में श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर और ज्ञानवापी मस्जिद से जुड़ा ऐतिहासिक और कानूनी विवाद है. मंदिर पक्ष का मानना है कि ज्ञानवापी के नीचे आदि-विश्वेश्वर का मंदिर मौजूद है. 1669 में औरंगजेब द्वारा इसे तोड़े जाने के ऐतिहासिक साक्ष्य दिए जाते हैं. मस्जिद पक्ष का दावा है कि यह जमीन सदियों से वक्फ की संपत्ति है और यहां नियमित नमाज होती रही है.

वह ‘पूजा स्थल अधिनियम 1991’ का हवाला देता है, जो किसी भी धार्मिक स्थल के 1947 वाले स्वरूप को बदलने से रोकता है. मंदिर पक्ष की मांग पर जिला जज की अदालत ने एएसआई सर्वे कराया, जिसमें मंदिर से जुड़े अवशेष और मूर्तियां मिलने का दावा किया गया है. फिलहाल यह मामला वाराणसी जिला अदालत, इलाहाबाद हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है.

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