Ketan Murder Case: महाराष्ट्र के पुणे में सामने आए केतन मर्डर केस ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है. इस सनसनीखेज हत्याकांड की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे ऐसे खुलासे हो रहे हैं जो किसी क्राइम थ्रिलर फिल्म की कहानी जैसे लगते हैं. पुणे पुलिस की क्राइम ब्रांच को आरोपियों के मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल डिवाइस की फॉरेंसिक जांच के दौरान कई अहम डिजिटल सबूत मिले हैं. जांच में सामने आई गूगल सर्च हिस्ट्री, इंटरनेट एक्टिविटी और डिजिटल रिकॉर्ड्स ने इस पूरे मामले को नई दिशा दे दी है. शुरुआती जांच के मुताबिक, हत्या कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं थी, बल्कि इसे पहले से पूरी योजना बनाकर अंजाम दिया गया था.
गूगल पर सर्च कर तैयार किया गया हत्या का पूरा प्लान
पुलिस जांच में सामने आया है कि मुख्य आरोपी सिया और चेतन ने वारदात से कई सप्ताह पहले ही इंटरनेट पर हत्या से जुड़ी जानकारी जुटानी शुरू कर दी थी. फॉरेंसिक जांच के दौरान दोनों के मोबाइल और अन्य डिजिटल डिवाइस से ऐसी गूगल सर्च हिस्ट्री बरामद हुई, जिसने जांच एजेंसियों को भी चौंका दिया. जांच के अनुसार आरोपियों ने गूगल पर ‘बिना सुराग छोड़े हत्या कैसे करें’ और ‘इंसान को आसानी से मौत के घाट उतारने के तरीके’ जैसे शब्द सर्च किए थे. इतना ही नहीं, उन्होंने यूट्यूब और इंटरनेट पर फॉरेंसिक साइंस और अपराध से जुड़े कई वीडियो भी देखे, ताकि उन्हें यह समझने में मदद मिल सके कि वार कैसे किया जाए और जांच एजेंसियों से कैसे बचा जाए.
लोहागढ़ किले पर की गई हत्या की रिहर्सल
जांच में एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने वारदात को अंजाम देने से पहले पुणे के पास स्थित ऐतिहासिक लोहागढ़ किले के सुनसान इलाके में पूरी योजना की रिहर्सल की थी. जांच में सामने आया कि वहां उन्होंने यह अभ्यास किया कि हत्या किस तरह की जाएगी, शव को कैसे ठिकाने लगाया जाएगा और घटना के बाद मौके से कैसे निकला जाएगा. पुलिस का मानना है कि पूरी वारदात को पहले से योजनाबद्ध तरीके से तैयार किया गया था.
सबूत मिटाने के लिए भी बनाई थी अलग रणनीति
पुलिस जांच के अनुसार, आरोपियों ने केवल हत्या की योजना ही नहीं बनाई थी, बल्कि घटना के बाद डिजिटल सबूत मिटाने की भी पूरी तैयारी कर रखी थी. वारदात के तुरंत बाद दोनों ने आपस में हुई व्हाट्सएप चैट, कॉल रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड्स को डिलीट करने की कोशिश की. इसके अलावा उन्होंने अपनी पहचान छिपाने के लिए हुलिया बदलने और बालों का स्टाइल बदलने जैसी तैयारियां भी पहले से कर रखी थीं, ताकि जांच एजेंसियों को गुमराह किया जा सके.
पुलिस से पूछताछ के लिए भी की थी तैयारी
जांच में यह भी सामने आया है कि अगर पुलिस हिरासत में लेती है तो पूछताछ के दौरान क्या जवाब देना है और किस तरह एक जैसी कहानी बतानी है, इसकी भी दोनों आरोपियों ने पहले से तैयारी कर रखी थी. कथित तौर पर उन्होंने पुलिस के सवालों का सामना करने और जांच को भटकाने के लिए अलग-अलग जवाबों की भी प्रैक्टिस की थी. हालांकि, पुणे पुलिस की डिजिटल फॉरेंसिक जांच में आरोपियों की यह पूरी रणनीति ज्यादा देर तक नहीं टिक सकी. मोबाइल फोन, गूगल सर्च हिस्ट्री और अन्य इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड्स से मिले डिजिटल सबूतों ने जांच को मजबूत आधार दिया और मामले की कई अहम परतें खुलकर सामने आ गईं.

