रियाद में फिर धमाके: हूती विद्रोहियों की मिसाइल रोकने का दावा, क्या ट्रंप कुदेंगे युद्ध में?

Ved Prakash Sharma
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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Saudi Arabia Riyadh Explosions: पश्चिम एशिया में जारी जंग के बीच बुधवार को सऊदी अरब की राजधानी रियाद में एक बार फिर धमाकों की आवाजें सुनाई दीं. इससे क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है. सऊदी अरब के नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन ने दावा किया कि उसने यमन के हूती विद्रोहियों की ओर से रियाद पर दागी गई बैलिस्टिक मिसाइल को रोक दिया. फिलहाल, इस घटना में किसी के हताहत होने या संपत्ति को नुकसान पहुंचने की तत्काल सूचना नहीं है. इस घटनाक्रम के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर भी दबाव बढ़ रहा है कि क्या अमेरिका सऊदी अरब के समर्थन में हूतियों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई करेगा.

रियाद के निवासियों ने बुधवार को नए धमाकों की आवाजें सुनने की जानकारी दी. सुरक्षा कारणों से उन्होंने अपनी पहचान उजागर नहीं की. सऊदी अरब के सैन्य गठबंधन ने कहा कि हूतियों ने राजधानी की ओर बैलिस्टिक मिसाइल दागी थी, जिसे हवा में ही रोक दिया गया. हालांकि, हूती विद्रोहियों की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई. सऊदी अरब की नागरिक सुरक्षा एजेंसी ने रियाद और राजधानी के दक्षिण-पूर्व में स्थित खरज प्रांत में हवाई हमले के अलर्ट जारी किए. खरज में सैन्य उद्योग निगम और प्रिंस सुल्तान एयर बेस स्थित हैं. इससे पहले भी हूती विद्रोही हवाई अड्डों, सैन्य ठिकानों और तेल से जुड़ी सुविधाओं को निशाना बना चुके हैं.

क्या रियाद के हवाई अड्डे और तेल ठिकाने भी खतरे में?

हूतियों के हमलों से सऊदी अरब के महत्वपूर्ण ठिकानों की सुरक्षा पर सवाल उठ रहे हैं. रियाद के किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को बीते एक सप्ताह में कई बार निशाना बनाया गया. इन हमलों में 17 लोगों की मौत और 300 से अधिक लोगों के घायल होने की जानकारी दी गई है. हूती विद्रोही हवाई अड्डों और तेल ठिकानों पर हमलों की पहले से चेतावनी भी दे रहे हैं. इसके कारण कई विमानन कंपनियां उड़ानें रोक रही हैं और अपने विमानों को वहां से हटा रही हैं. मंगलवार को सऊदी अरामको की एक सुविधा के प्रशासनिक भवन में आग लग गई. अरामको दुनिया की सबसे बड़ी तेल कंपनियों में शामिल है. इन घटनाओं से दुनिया के प्रमुख तेल निर्यातक सऊदी अरब की ऊर्जा आपूर्ति और वैश्विक बाजारों को लेकर चिंता बढ़ गई है.

सऊदी अरब के सामने सबसे बड़ी चुनौती मिसाइलों और ड्रोन हमलों को रोकने की है. क्षेत्रीय अधिकारियों के अनुसार, अमेरिका से बड़े पैमाने पर हथियार खरीदने वाला सऊदी अरब मिसाइलों को रोकने वाले इंटरसेप्टर की कमी का सामना कर रहा है. देश का क्षेत्रफल टेक्सास राज्य से करीब तीन गुना है. ऐसे में इतने बड़े इलाके में रोज होने वाले हमलों को पूरी तरह रोकना बेहद मुश्किल है. हूतियों के पास ऐसे हथियार हैं, जो 1,600 किलोमीटर से अधिक दूरी तक हमला कर सकते हैं. कुछ मिसाइलों के वारहेड उड़ान के दौरान दिशा भी बदल सकते हैं. हाल ही में रोकी गई दो मिसाइलों का मलबा रियाद के रिहायशी इलाकों में गिरा था. इससे चार लोग घायल हुए, जिनमें एक बच्चा भी शामिल है. मलबे से 15 घरों को नुकसान पहुंचा. इस स्थिति में अमेरिका से अतिरिक्त सैन्य मदद की मांग भी अहम हो गई है.

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