अमेरिका: सेना के मेजर को मारी जाएंगी गोलियां, पहली बार मौत की सजा का होगा लाइव प्रसारण!

Ved Prakash Sharma
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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Rare case in the US: अमेरिका से हैरान करने वाली खबर सामने आई है. यहां पहली बार मौत की सजा का लाइव प्रसारण होगा. 2009 के फोर्ट हूड सैन्य अड्डे पर गोलीबारी के दोषी मेजर निदाल मलिक हसन को 3 दिसंबर को गोली मारकर मौत की सजा देने की योजना है. पेंटागन के अधिकारियों के अनुसार, इस प्रक्रिया के सीधे प्रसारण की भी योजना बनाई जा रही है. हालांकि, प्रसारण की विस्तृत व्यवस्था की आधिकारिक जानकारी अभी सामने नहीं आई है.

इस मामले ने मौत की सजा, सरकारी पारदर्शिता और सार्वजनिक प्रसारण की नैतिकता पर बहस छेड़ दी है. 5 नवंबर 2009 को टेक्सास के फोर्ट हूड सैन्य अड्डे पर सेना में मेजर और मनोचिकित्सक रहे हसन ने गोलीबारी की थी. इस हमले में 13 लोगों की मौत हुई और 32 अन्य घायल हुए थे. सैन्य अदालत ने उसे दोषी ठहराते हुए मौत की सजा सुनाई थी.

अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने पहले कहा था कि सजा की प्रक्रिया सार्वजनिक होगी. इसके बाद पेंटागन के अधिकारियों ने सीधे प्रसारण की योजना की जानकारी दी. कुछ कानून विशेषज्ञों का मानना है कि इससे मौत की सजा की प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ सकती है, जबकि दूसरे विशेषज्ञ इससे जुड़े नैतिक सवालों की ओर ध्यान दिलाते हैं. कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, हसन नागरिक अदालत में हेबियस कॉर्पस याचिका दाखिल कर सकता है. इसके जरिए हिरासत या कानूनी प्रक्रिया की वैधता को चुनौती दी जा सकती है. ऐसी कानूनी कार्रवाई से सजा में देरी संभव है. उसके पूर्व वकील ने उसके स्वास्थ्य और कानूनी सलाह तक पहुंच को लेकर भी चिंता जताई है.

कुछ विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका के कई राज्यों में घातक इंजेक्शन के लिए दवाएं जुटाने और चिकित्सा पेशेवरों की उपलब्धता जैसी समस्याएं हैं. ऐसे में गोली मारकर मौत की सजा देने के विकल्प पर चर्चा होती रही है. हालांकि, इस तरीके को लेकर भी कानूनी और नैतिक बहस जारी है. रक्षा मंत्री के मुताबिक, द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से अमेरिकी सेना ने फायरिंग स्क्वॉड के जरिए किसी सैनिक को मौत की सजा नहीं दी है. सेना में अंतिम फांसी 13 अप्रैल 1961 को हुई थी, जब सैनिक जॉन बेनेट को फांसी दी गई थी.

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