By-Election Results 2026: देश के चार राज्यों और केंद्रशासित प्रदेश पुडुचेरी में हुए उपचुनावों के नतीजों पर आज सबकी नजरें टिकी हैं. पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और असम की छह सीटों पर मतगणना के साथ यह साफ होगा कि मतदाताओं ने किस राजनीतिक दल पर भरोसा जताया है. इन सीटों में पांच विधानसभा क्षेत्र और असम की नगांव लोकसभा सीट शामिल हैं. वोटों की गिनती सुबह 8 बजे शुरू होनी है.
इन उपचुनावों का महत्व सिर्फ सीटों के नतीजों तक सीमित नहीं है. अलग-अलग राज्यों में सत्ता और विपक्ष की स्थिति के बीच ये परिणाम राजनीतिक दलों के लिए अपने जनसमर्थन का आकलन करने का अवसर भी हैं. पश्चिम बंगाल में बीजेपी की सरकार के सामने सियासी माहौल को लेकर सवाल हैं, जबकि तमिलनाडु में टीवीके के लिए ये चुनाव सत्ता संभालने के बाद एक अहम परीक्षा माने जा रहे हैं.
बंगाल में नंदीग्राम और रेजीनगर पर टिकी नजरें
पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनावों के नतीजे खास राजनीतिक अहमियत रखते हैं. राज्य में बीजेपी के सत्ता में आने के बाद इन सीटों का परिणाम सरकार और विपक्ष, दोनों के लिए महत्वपूर्ण संकेत दे सकता है. हालांकि, इन उपचुनावों को राज्य सरकार के कामकाज पर सीधा जनमत संग्रह मानना सही नहीं होगा.
शुभेंदु अधिकारी ने दी थी ममता बनर्जी को शिकस्त By-Election Results 2026
नंदीग्राम का राजनीतिक इतिहास इसे और भी चर्चित बनाता है. 2021 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी नेता शुभेंदु अधिकारी ने इस सीट पर तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को शिकस्त दी थी. 2026 के विधानसभा चुनाव में भी अधिकारी नंदीग्राम से जीते, लेकिन भवानीपुर सीट अपने पास रखने के कारण उन्हें नंदीग्राम छोड़नी पड़ी. इसी वजह से यहां दोबारा मतदान कराया गया.
हुमायूं कबीर को किया गया गिरफ्तार
रेजीनगर में चुनावी माहौल उस समय चर्चा (By-Election Results 2026) में आया, जब पुलिस के साथ झड़प के बाद आम जनता उन्नयन पार्टी के प्रमुख हुमायूं कबीर को गिरफ्तार किया गया. कांग्रेस ने दोनों सीटों पर दोबारा मतदान कराने की मांग उठाई. रेजीनगर से हुमायूं कबीर के बेटे गुलाम नबी आजाद चुनाव मैदान में हैं. चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, दोनों सीटों पर कुल मिलाकर करीब 5.24 लाख मतदाता थे. नंदीग्राम में 80.89 प्रतिशत और रेजीनगर में 80.08 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया. मतदान के दौरान गड़बड़ी, मतदाताओं को प्रभावित करने और झड़पों को लेकर भी आरोप सामने आए.
तमिलनाडु में TVK के लिए अहम सियासी इम्तिहान
तमिलनाडु की मदुरंतकम और धारापुरम विधानसभा सीटों पर भी मतगणना के लिए तैयारियां की गई हैं. दोनों केंद्रों पर ईवीएम के वोटों और पोस्टल बैलेट की गिनती के लिए अलग-अलग व्यवस्था रखी गई है. निष्पक्ष मतगणना सुनिश्चित करने के लिए तीन स्तरों की सुरक्षा तैनात की गई है. मई में टीवीके के सत्ता में आने के बाद इन उपचुनावों को पार्टी के जनाधार के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है. वहीं, एआईएडीएमके को उम्मीद है कि वह उन सीटों पर दोबारा कब्जा जमा सकेगी, जिन्हें अप्रैल के विधानसभा चुनाव में टीवीके ने उससे छीन लिया था.
धारापुरम में तिरुपुर जिले के एलआरजी गवर्नमेंट आर्ट्स एंड साइंस कॉलेज को मतगणना केंद्र बनाया गया है. यहां ईवीएम के वोटों के लिए 14 टेबल और पोस्टल बैलेट के लिए दो टेबल निर्धारित की गई हैं. मदुरंतकम की मतगणना चेंगलपट्टू जिले के आथुर स्थित इंटीग्रेटेड सोशल डेवलपमेंट ट्रेनिंग सेंटर में होगी, जहां इसी तरह की व्यवस्था की गई है.
नगांव लोकसभा सीट पर त्रिकोणीय मुकाबला
असम की नगांव लोकसभा सीट पर बीजेपी, कांग्रेस और एआईयूडीएफ के बीच मुकाबला है. बीजेपी ने पूर्व नौकरशाह देवाशीष शर्मा को टिकट दिया है. कांग्रेस की तरफ से पूर्व विधायक शिवमणि बोरा मैदान में हैं, जबकि एआईयूडीएफ ने अपने प्रमुख बदरुद्दीन अजमल को उम्मीदवार बनाया है. इस सीट पर लगभग 76 प्रतिशत मतदान हुआ था. नगांव सीट कांग्रेस सांसद प्रद्युत बोरदोलोई के विधानसभा चुनाव लड़ने और जीतने के बाद खाली हुई थी. अब नतीजे बताएंगे कि इस मुकाबले में किस पार्टी को मतदाताओं का समर्थन मिला.
नतीजों से क्या मिलेंगे राजनीतिक संकेत?
छह सीटों के परिणाम अलग-अलग राज्यों में राजनीतिक दलों की स्थिति समझने का एक अवसर देंगे. बंगाल में बीजेपी और विपक्ष की ताकत पर नजर रहेगी, जबकि तमिलनाडु में टीवीके और एआईएडीएमके के बीच मुकाबले के नतीजे खास चर्चा में रहेंगे. असम की नगांव सीट पर बीजेपी, कांग्रेस और एआईयूडीएफ के प्रदर्शन पर भी राजनीतिक विश्लेषकों की नजर रहेगी. हालांकि, उपचुनावों के नतीजों से पूरे राज्य की राजनीतिक तस्वीर का अंतिम निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी. इन परिणामों का वास्तविक महत्व संबंधित सीटों के स्थानीय मुद्दों, उम्मीदवारों के प्रदर्शन और राज्य की व्यापक राजनीतिक परिस्थितियों के साथ जोड़कर समझना होगा.