Tamil Nadu Election 2026: लोकतंत्र में अक्सर कहा जाता है कि एक वोट से क्या फर्क पड़ता है, लेकिन तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों ने इस सोच को पूरी तरह बदल दिया है. इस चुनाव में जहां सुपरस्टार विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) ने राज्य की राजनीति में जबरदस्त एंट्री करते हुए समीकरण बदल दिए, वहीं तिरुप्पत्तूर सीट का नतीजा लोकतंत्र की ताकत का सबसे बड़ा उदाहरण बनकर सामने आया. यहां महज एक वोट ने मंत्री की कुर्सी छीन ली और एक कार्यकर्ता को विधायक बना दिया.
तिरुप्पत्तूर सीट: 1 वोट से जीत-हार
तमिलनाडु के सहकारिता मंत्री और DMK के वरिष्ठ नेता के.आर. पेरियाकरुप्पन को सिर्फ एक वोट से हार का सामना करना पड़ा. TVK के उम्मीदवार सीनिवास सेतुपति ने उन्हें बेहद करीबी मुकाबले में हरा दिया. यह मुकाबला हाल के चुनावी इतिहास के सबसे रोमांचक और नजदीकी नतीजों में शामिल हो गया.
अंतिम परिणाम:
- सीनिवास सेतुपति (TVK): 83,375 वोट
- के.आर. पेरियाकरुप्पन (DMK): 83,374 वोट
- थिरुमारन केसी (BJP): 29,054 वोट
मस्कट से आया ‘निर्णायक’ वोट
इस जीत की सबसे दिलचस्प कहानी एक प्रवासी भारतीय से जुड़ी है. मणिकंदन शिवानंतम नाम के एक मतदाता ने मस्कट से भारत आकर वोट डाला. वह विजय के समर्थक हैं और खास तौर पर मतदान करने के लिए विदेश से यात्रा कर पहुंचे. उन्होंने सोशल मीडिया पर दावा किया कि हो सकता है उनका ही वोट वह निर्णायक वोट रहा हो, जिसने चुनाव का नतीजा बदल दिया. यह घटना इस बात को और मजबूत करती है कि हर एक वोट की अहमियत कितनी बड़ी होती है.
विजय की TVK का धमाकेदार प्रदर्शन
तिरुप्पत्तूर की यह एक वोट की जीत उस विशाल लहर का सिर्फ एक हिस्सा है, जो सुपरस्टार विजय की पार्टी ने पूरे तमिलनाडु में पैदा की है. टीवीके ने अपने पहले ही चुनाव में 108 सीटें जीतकर प्रतिद्वंद्वियों को मीलों पीछे छोड़ दिया है. सत्तारूढ़ डीएमके (DMK) महज 59 सीटों पर सिमट गई, जबकि एआईएडीएमके (AIADMK) 47 सीटों के साथ तीसरे स्थान पर खिसक गई. कांग्रेस को 5 और पीएमके को 4 सीटें मिलीं.
खुद सुपरस्टार विजय ने पेरम्बूर और ईस्ट त्रिची, दोनों सीटों से शानदार जीत हासिल की है. सबसे बड़ा राजनीतिक भूचाल कोलाथुर सीट पर आया, जहां टीवीके के वी.एस. बाबू (पूर्व DMK नेता) ने मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन को 8,795 वोटों के अंतर से हरा दिया.
एक वोट की ताकत का बड़ा संदेश
डीएमके के लिए यह चुनाव किसी बुरे सपने से कम नहीं रहा, जहां पेरियाकरुप्पन के साथ-साथ गीता जीवन और एम.ए. सुब्रमण्यम सहित 10 से ज्यादा मंत्रियों को अपनी सीट गंवानी पड़ी है. यह चुनाव न सिर्फ विजय के राजनीतिक उदय के लिए, बल्कि यह याद दिलाने के लिए भी हमेशा जाना जाएगा कि लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत उस ‘एक वोट’ में छिपी होती है.
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