Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, तेल से चुपडे हुए लोहे को जंग नहीं लगता। इसी प्रकार सुरक्षित रखे हुए आभूषणों की चमक भी कम नहीं होती। आपके हृदय को वासना का जंग न लगे और पापमय विकार उत्पन्न न हो – इस हेतु हृदय को हमेशा सात्विक भावों में डुबोया हुआ रखो।
हृदय द्रवित होगा तो ही पापमय विकारों का नाश होगा। हृदय द्रवित होगा तो ही प्रभु मिलन की आतुरता जागृत होगी। सुख भोगने की वासना ही बहुत दुख देती है। मनुष्य पैसे के पीछे पागल बनता है इसीलिए वह भटकता रहता है। दुरुपयोग होने पर पैसा जहर है। सदुपयोग होने पर पैसा अमृत है।
भक्ति से ही जीवन सुधरती है। भक्ति रहित – ज्ञान, वैराग्य, कर्म, योग आदि कल्याण के जितने भी साधन है सब व्यर्थ हैं। ईश्वर वाणी का विषय नहीं है। वह तो जीवन में अनुभव करने और साक्षात्कार प्राप्त करने का विषय है। जीव ईश्वर के साथ जैसा सम्बन्ध स्थापित करता है, वैसा सम्बन्ध ईश्वर हमेशा बनाए रखता है। सभी हरि भक्तों को पुष्कर आश्रम एवं गोवर्धनधाम आश्रम से साधु संतों की शुभ मंगल कामना।