West Bengal CM: राजनीति जगत से इस वक्त की बड़ी खबर सामने आई है. पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भवानीपुर सीट से ममता बनर्जी को हराने वाले शुभेंदु अधिकारी अब बंगाल के नए मुख्यमंत्री होंगे. आज कोलकाता के कन्वेंशन सेंटर में हुई विधायक दल की बैठक में शुभेंदु अधिकारी को सर्वसम्मति से भाजपा का नेता चुना गया. केंद्रीय पर्यवेक्षक के तौर पर गृह मंत्री अमित शाह ने उनके नाम की घोषणा की है. शुभेंदु अधिकारी के नाम का प्रस्ताव भाजपा प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने रखा, जिसका दिलीप घोष समेत कई विधायकों ने समर्थन किया.
राजभवन जाएंगे शुभेंदु अधिकारी
विधायक दल की बैठक के बाद शुभेंदु अधिकारी राजभवन जाकर राज्यपाल के पास सरकार बनाने का दावा करेंगे. बता दें कि कल सुबह 11 बजे शुभेंदु अधिकारी मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे.
2021 में थामा भाजपा का दामन West Bengal CM
बता दें कि अधिकारी को ममता बनर्जी के सबसे मुखर आलोचक के तौर पर भी जाना जाता है. लेकिन, एक समय था जब सुवेंदु अधिकारी, ममता बनर्जी के सबसे भरोसेमंद सहयोगियों में गिने जाते थे. नंदीग्राम और सिंगूर जैसे आंदोलनों में उनकी अहम भूमिका ने ही ममता बनर्जी को राज्य की राजनीति में मजबूत पहचान दिलाई. समय के साथ दोनों नेताओं के रास्ते अलग हो गए. 2021 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले अधिकारी ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया. इसके बाद दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक टकराव राज्य की सबसे चर्चित लड़ाइयों में शामिल हो गया.
दो बार दे चुके हैं ममता बनर्जी को मात
सुवेंदु अधिकारी वैसे नेता हैं, जिन्होंने ममता बनर्जी को उनके ही गढ़ में न सिर्फ कड़ी चुनौती दी, लगातार दो विधानसभा चुनाव में करारी मात भी दी. 2021 के विधानसभा चुनाव में नंदीग्राम सीट पर चुनाव लड़ते हुए अधिकारी ने सीधे मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को टक्कर दी और जीत दर्ज कर अपनी राजनीतिक पकड़ साबित की. इसके बाद इस बार के चुनाव में अधिकारी ने नंदीग्राम के साथ ही भवानीपुर से उम्मीदवारी पक्की कर ली. भवानीपुर को ममता बनर्जी की सुरक्षित सीट माना जा रहा था. लेकिन, चुनावी नतीजे में सुवेंदु अधिकारी की भवानीपुर से प्रचंड जीत ने ममता बनर्जी के राजनीतिक करियर पर सवालिया निशान लगा दिया.
चुनावी समीकरण साधने में माहिर हैं
पूर्वी मेदिनीपुर जिले में अधिकारी की मजबूत पकड़ और संगठन क्षमता सबसे बड़ी ताकत मानी जाती है. वे उन गिने-चुने नेताओं में हैं, जो जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं को संगठित करने और चुनावी समीकरण साधने में माहिर हैं. सुवेंदु अधिकारी का राजनीतिक सफर छात्र जीवन से ही शुरू हो गया. कांथी पीके कॉलेज से स्नातक सुवेंदु अधिकारी ने 1989 में छात्र परिषद के प्रतिनिधि के रूप में अपनी राजनीतिक शुरुआत की.
उन्होंने बड़ा जन आंदोलन खड़ा किया
वर्ष 2006 में वे कांथी दक्षिण सीट से पहली बार विधायक चुने गए. इसके बाद 2009 और 2014 में उन्होंने तमलुक लोकसभा सीट से सांसद के रूप में अपनी सेवाएं दीं. वर्ष 2016 में नंदीग्राम से विधायक बनने के साथ ही वे ममता बनर्जी सरकार में मंत्री बने और परिवहन, सिंचाई और जल संसाधन जैसे महत्वपूर्ण विभागों को संभाला. 2007 का नंदीग्राम आंदोलन सुवेंदु अधिकारी के राजनीतिक करियर का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ. भूमि अधिग्रहण के खिलाफ ‘भूमि उच्छेद प्रतिरोध कमेटी’ के बैनर तले उन्होंने बड़ा जन आंदोलन खड़ा किया. इस आंदोलन ने न सिर्फ वाम मोर्चा सरकार को झुकने पर मजबूर किया, बल्कि टीएमसी के सत्ता तक पहुंचने का रास्ता भी तैयार किया.
एक प्रभावशाली राजनीतिक परिवार से आते हैं
सुवेंदु अधिकारी एक प्रभावशाली राजनीतिक परिवार से आते हैं. उनके पिता शिशिर अधिकारी कांग्रेस और बाद में टीएमसी के वरिष्ठ नेता रहे हैं. उनके भाई भी सक्रिय राजनीति में हैं, जिससे पूर्वी मिदनापुर में इस परिवार का व्यापक प्रभाव बना हुआ है.

