‘इसमें सावधानी और मर्यादा की जरूरत…’,  हनुमान अंश के डायरेक्टर को प्रेमानंद महाराज ने दी चेतावनी

Divya Rai
Content Writer The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

Hanuman Ansh: बाबा नीम करोली के जीवन पर आधारित फिल्म हनुमान अंश चर्चा में बनी हुई है. केवल 2 करोड़ के बजट में बनी ये फिल्म बॉक्स ऑफ़िस पर चमत्कार कर रही है. ये फिल्म अब तक 50 करोड़ कमा चुकी है. फिल्म को बनाने से पहले इसकी डायरेक्टर अनुप्रिया नागर ने प्रसिद्ध संत प्रेमानंद जी महाराज से आशीर्वाद लिया था. इसके अलावा उन्होंने महाराज जी से सुझाव भी मांगे थे.

प्रेमानंद महाराज से मिली Hanuman Ansh की डायरेक्टर

हनुमान अंश की डायरेक्टर अनुप्रिया नागर ने प्रेमानंद महाराज से पूछा कि ऐसे धार्मिक मार्ग पर रहकर फिल्म बनाने से ये सेवा भी बन सकती है?  उनका जवाब देते हुए महाराज जी ने कहा, ध्यान रहे कि महापुरुषों का अनुकरण करना कठिन होता है. कोई सांसारिकता न आए क्योंकि किसी भी महापुरुष के चरित्र को देखकर हमारे अंदर बैराग्य, भक्ति और ज्ञान- तीनों बातें आनी चाहिए. कहीं किसी महापुरुष के चरित्र में ऐसी, कुछ भी दृश्य या कोई भी ऐसा अभिनय ना प्रस्तुत किया जाए, जो अपराध लग जाए.

नीम करोली बाबा एक भगवत प्राप्त महापुरुष हैं

महाराज जी ने आगे कहा, ”जैसे नीम करोली बाबा एक भगवत प्राप्त महापुरुष हैं, तो इन महापुरुषों का अनुकरण, एक तो किया नहीं जा सकता क्योंकि स्थिति नहीं है. अब अगर हम बाहरी कुछ अनुकरण करते हैं, तो हमको अभिनय में ध्यान रखना है कि कहीं अपनी फिल्म की या अपने नाटक की समाज प्रियता के लिए हम कुछ विषय न परोस दें. हम कहीं कुछ ऐसा न कर दें जो महापुरुष के अभिनय से अलग हो जाए, और वो हमारे लिए अपराध बन जाए. इसलिए सावधान रहें. चाहे लोग देखें या न देखें, जो आपने पढ़ा और सुना है उनके विषय में, ठीक वैसे ही किया जाए, प्रमाणित या अप्रमाणित न किया जाए.”

बिना संतों का चरित्र सुने दिल में भक्ति नहीं आ सकती

उन्होंने आगे कहा- अभिनय में कुछ भी सांसारिकता या विषय न परोस दिया जाए लोकप्रियता के लिए, नहीं तो वो अपराध बन जाएगा क्योंकि महापुरुष का चरित्र निर्विषय होता है. उनका चरित्र लोकपावन करने वाला होता है. अगर किसी महापुरुष का चरित्र करना है तो हमें कुछ दिन साधना करनी होगी. फल-फूल आदि खाकर रहना चाहिए. उसके लिए पवित्र फलाहार, पवित्र सात्विक भोजन, संतों का संग, संतों के चरित्र पढ़ो…तब आप ऐसे महापुरुषों का अभिनय कर सकते हो. नहीं तो बाहरी नाटक दिखा सकते हो, पर वो सत्यता नहीं ला सकते. अभिनय में सत्यता लाने के लिए खुद में साधना करनी पड़ेगी. बिना संतों का चरित्र सुने, दिल में भक्ति नहीं आ सकती.

फ्लॉप होते-होते बची फिल्म

बता दें कि फिल्म के मेकर्स ने प्रेमानंद महाराज के सुझाव को गंभीरता से लिया. शुरुआत में लगा कि ये फिल्म फ्लॉप हो जाएगी. हालांकि, 50 करोड़ कमाकर ये फिल्म ब्लॉकबस्टर साबित हुई है.

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