Blood Pressure Check: हाई ब्लड प्रेशर यानी हाइपरटेंशन एक ऐसी स्वास्थ्य समस्या है, जो कई बार बिना किसी स्पष्ट लक्षण के शरीर में बनी रहती है. यही वजह है कि बहुत से लोगों को लंबे समय तक अपने बढ़े हुए ब्लड प्रेशर की जानकारी नहीं होती. लगातार अनियंत्रित ब्लड प्रेशर दिल की बीमारी, स्ट्रोक और किडनी समेत कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ा सकता है. ऐसे में समय-समय पर ब्लड प्रेशर की जांच करना जरूरी है. हालांकि, बीपी चेक करते समय अगर सही तरीका नहीं अपनाया जाए तो रीडिंग प्रभावित हो सकती है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की गाइडलाइन के मुताबिक, बीपी मापते समय बैठने की स्थिति, आराम का समय, कफ का सही आकार और हाथ की पोजीशन जैसी कई बातों का ध्यान रखना चाहिए.
बीपी चेक करते समय सही तरीके से बैठें
ब्लड प्रेशर मापने से पहले कुर्सी पर आराम से बैठें और अपनी पीठ को अच्छी तरह सहारा दें. दोनों पैर जमीन पर सीधे रखें और पैरों को क्रॉस करके न बैठें. जिस हाथ में कफ लगाया जा रहा है, उसे टेबल या किसी दूसरे सपोर्ट पर आराम से रखें. कफ का बीच वाला हिस्सा दिल के स्तर पर होना चाहिए.
बीपी नापने से पहले 5 मिनट आराम करें
जल्दबाजी में या चलते-फिरते तुरंत ब्लड प्रेशर नापने से रीडिंग प्रभावित हो सकती है. WHO के अनुसार, बीपी मापने से पहले कम से कम 5 मिनट तक शांत होकर आराम करना चाहिए. जांच के दौरान बात करने से भी बचना चाहिए. अगर एक से ज्यादा रीडिंग ली जा रही है, तो उनके बीच भी शांत रहें.
30 मिनट पहले इन चीजों से बचें
सही रीडिंग के लिए बीपी चेक करने से कम से कम 30 मिनट पहले एक्सरसाइज, चाय-कॉफी और तंबाकू का सेवन करने से बचना चाहिए. इन गतिविधियों का असर ब्लड प्रेशर पर पड़ सकता है और रीडिंग प्रभावित हो सकती है.
कफ का सही आकार होना जरूरी
बीपी मशीन का कफ व्यक्ति की बांह के आकार के अनुसार होना चाहिए. गलत आकार का कफ इस्तेमाल करने से रीडिंग गलत आ सकती है. WHO की गाइडलाइन के अनुसार, कफ की ब्लैडर लंबाई ऊपरी बांह की परिधि के करीब 80 प्रतिशत या उससे अधिक होनी चाहिए और इसकी चौड़ाई कम से कम 40 प्रतिशत होनी चाहिए.
कपड़ों के ऊपर कफ लगाने से बचें
कफ को नंगी बांह पर लगाना बेहतर है. जरूरत पड़ने पर पतले कपड़े के ऊपर भी लगाया जा सकता है, लेकिन कपड़े को मोड़कर उसके ऊपर कफ लगाने से बचना चाहिए. इससे ब्लड प्रेशर की रीडिंग प्रभावित हो सकती है.
रीडिंग को राउंड ऑफ न करें
बीपी मशीन पर जो सटीक संख्या दिखाई दे, उसे उसी तरह दर्ज करें. अपनी सुविधा के लिए रीडिंग को ऊपर या नीचे करके राउंड ऑफ न करें. इससे समय के साथ ब्लड प्रेशर के रिकॉर्ड को सही तरीके से समझने में मदद मिलती है.
नियमित जांच क्यों जरूरी है?
हाइपरटेंशन अक्सर बिना लक्षण के रह सकता है. WHO के अनुसार, ब्लड प्रेशर की जांच ही यह पता लगाने का सबसे भरोसेमंद तरीका है कि किसी व्यक्ति का ब्लड प्रेशर बढ़ा हुआ है या नहीं. नियमित जांच के साथ डॉक्टर की सलाह और निर्धारित उपचार का पालन करना भी जरूरी है.
नोट: अगर ब्लड प्रेशर बहुत ज्यादा आता है, खासकर उसके साथ सीने में दर्द, सांस लेने में परेशानी, तेज सिरदर्द, भ्रम या नजर में बदलाव जैसे लक्षण हों, तो तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए.
यह भी पढ़े: तनाव और पीठ दर्द से राहत दिलाने में मददगार है यह योगासन, जानें करने का सही तरीका और फायदे