Copper Water Benefits: सुबह उठकर तांबे के बर्तन या बोतल में रखा पानी पीने की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है. कई लोग इसे सेहत के लिए फायदेमंद मानते हैं और रोजाना कॉपर वॉटर का सेवन करते हैं. लेकिन क्या तांबे की बोतल में रखा पानी वाकई शरीर को अतिरिक्त फायदे देता है?
क्या इसे हर दिन पीना जरूरी है? और सबसे जरूरी सवाल, शरीर में कॉपर की मात्रा ज्यादा हो जाए तो क्या नुकसान हो सकता है? इन सवालों को समझना जरूरी है, क्योंकि कॉपर शरीर के लिए आवश्यक मिनरल जरूर है, लेकिन इसकी अधिक मात्रा परेशानी का कारण बन सकती है.
शरीर के लिए क्यों जरूरी है कॉपर?
कॉपर शरीर के लिए जरूरी मिनरल्स में शामिल है. यह शरीर में ऊर्जा उत्पादन, आयरन के इस्तेमाल, नर्वस सिस्टम और कनेक्टिव टिश्यू से जुड़े कई जैविक कामों में भूमिका निभाता है. शरीर को कॉपर की जरूरत होती है और स्वस्थ लोगों को आमतौर पर संतुलित डाइट से इसकी पर्याप्त मात्रा मिल जाती है. NIH के अनुसार, 19 वर्ष और उससे अधिक उम्र के वयस्कों के लिए कॉपर की अनुशंसित मात्रा 900 माइक्रोग्राम प्रतिदिन है.
इसी वजह से लंबे समय से तांबे के बर्तन में पानी रखने और फिर उसे पीने की परंपरा भी चली आ रही है. हालांकि, कॉपर शरीर के लिए जरूरी होने का मतलब यह नहीं है कि तांबे के बर्तन में रखा पानी पीने से हर व्यक्ति को अतिरिक्त स्वास्थ्य लाभ मिलना तय है.
क्या कॉपर बोतल का पानी पीने से फायदा होता है?
कॉपर शरीर में आयरन के इस्तेमाल, ऊर्जा उत्पादन और नर्वस सिस्टम से जुड़े महत्वपूर्ण कार्यों में योगदान देता है. इसलिए शरीर में कॉपर की पर्याप्त मात्रा जरूरी है. लेकिन सिर्फ कॉपर की बोतल में पानी रखने और उसे पीने से शरीर को अतिरिक्त स्वास्थ्य लाभ निश्चित रूप से मिलते हैं, ऐसा दावा उपलब्ध वैज्ञानिक जानकारी के आधार पर नहीं किया जा सकता. अधिकांश स्वस्थ लोगों को सामान्य भोजन से ही पर्याप्त कॉपर मिल जाता है. इसलिए कॉपर वॉटर को किसी बीमारी के इलाज के तौर पर देखना या इसे हर व्यक्ति के लिए जरूरी हेल्थ ड्रिंक मानना सही नहीं है.
ज्यादा कॉपर पहुंचना हो सकता है नुकसानदायक
कॉपर की जरूरत से ज्यादा मात्रा शरीर के लिए नुकसानदायक हो सकती है. NIH के अनुसार, लंबे समय तक अधिक मात्रा में कॉपर का सेवन पेट दर्द, ऐंठन, मितली, उल्टी और दस्त जैसी समस्याएं पैदा कर सकता है. अत्यधिक और लंबे समय तक कॉपर के संपर्क से लिवर को नुकसान पहुंचने का जोखिम भी हो सकता है.
स्वस्थ लोगों में कॉपर टॉक्सिसिटी दुर्लभ मानी जाती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि अधिक मात्रा को नजरअंदाज किया जाए. शरीर को कॉपर की जरूरत सीमित मात्रा में होती है और इसकी अधिकता फायदेमंद होने के बजाय नुकसान पहुंचा सकती है.
किन लोगों को कॉपर वॉटर से ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए?
जिन लोगों को Wilson’s disease जैसी कॉपर मेटाबॉलिज्म से जुड़ी बीमारी है, उन्हें कॉपर के सेवन को लेकर विशेष सावधानी बरतनी चाहिए. Wilson’s disease में शरीर से कॉपर को बाहर निकालने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है, जिससे शरीर के ऊतकों में कॉपर जमा होने का खतरा बढ़ जाता है. ऐसे लोगों में अधिक कॉपर गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है. इसलिए अगर किसी व्यक्ति को कॉपर मेटाबॉलिज्म से जुड़ी बीमारी है, तो नियमित रूप से कॉपर वॉटर पीने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है.
कॉपर बोतल की सफाई भी है बेहद जरूरी
अगर आप कॉपर बोतल का इस्तेमाल करते हैं तो उसकी साफ-सफाई पर भी ध्यान देना जरूरी है. बोतल को नियमित रूप से साफ रखना चाहिए और उसमें रखा पानी भी साफ और सुरक्षित होना चाहिए. पानी और कॉपर के बीच संपर्क होने पर कॉपर पानी में घुल सकता है. पानी में कॉपर की मात्रा कई परिस्थितियों पर निर्भर कर सकती है.
अमेरिकी पर्यावरण संरक्षण एजेंसी यानी EPA के अनुसार, पीने के पानी में कॉपर का Action Level 1.3 mg/L है. इस स्तर से अधिक कॉपर वाले पानी के संपर्क में कम समय में गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल यानी पेट और आंतों से जुड़ी परेशानी हो सकती है, जबकि लंबे समय तक अधिक स्तर के संपर्क से लिवर या किडनी पर असर का जोखिम हो सकता है.
क्या रोज कॉपर वॉटर पीना चाहिए?
कॉपर बोतल में रखा पानी पीना अपने आप में जरूरी नहीं है. शरीर को आवश्यक कॉपर संतुलित आहार से मिल सकता है. इसलिए सिर्फ कॉपर वॉटर को स्वास्थ्य के लिए अनिवार्य मानना सही नहीं होगा. अगर कोई व्यक्ति रोजाना कॉपर वॉटर पीता है, तो उसे इसकी मात्रा और बोतल की साफ-सफाई का ध्यान रखना चाहिए. खासतौर पर जिन लोगों को कॉपर से जुड़ी कोई बीमारी है या शरीर में कॉपर जमा होने का जोखिम है, उन्हें नियमित रूप से कॉपर वॉटर पीने से पहले डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए.
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