समय पर निमोनिया का इलाज बेहद जरूरी, गंभीर स्थिति में निकालना पड़ सकता है आपका फेफड़ा..!

Health Tips: निमोनिया फेफड़ों से जुड़ा एक गंभीर बीमारी है, जो बैक्टीरिया, वायरस या फंगस के कारण होता है. समय रहते इसका इलाज न किया जाए तो यह जानलेवा भी साबित हो सकता है. भारत में यह एक आम लेकिन गंभीर स्वास्थ्य समस्या है, जिसके प्रति जागरूकता अभी भी पर्याप्त नहीं है. इस बीमारी में फेफड़ों की वायु थैलियों में तरल या पस भर जाता है, जिससे सांस लेना तक मुश्किल हो जाता है.

सबसे जरूरी अंगों में से एक है फेफड़ा

फेफड़े शरीर के सबसे जरूरी अंगों में से एक हैं और इनके बिना जीवन की कल्पना करना भी कठिन लगता है. खासतौर पर जब निमोनिया जैसी गंभीर स्थिति में कभी-कभी एक फेफड़ा निकालने की नौबत आ जाती है. निमोनिया किसी को भी हो सकता है, लेकिन कुछ लोग इसके ज्यादा शिकार होते हैं. छोटे बच्चे, बुजुर्ग, धूम्रपान करने वाले, कमजोर इम्यून सिस्टम वाले लोग और पहले से किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों में इसका खतरा अधिक रहता है. इसलिए इन लोगों को खास सावधानी बरतने की जरूरत होती है.

बिगड़ सकती है स्थिति

निमोनिया के लक्षण शुरुआत में सामान्य फ्लू जैसे लग सकते हैं, लेकिन धीरे-धीरे ये गंभीर हो जाते हैं. तेज बुखार, ठंड लगना, सीने में दर्द, खांसी (कभी-कभी कफ के साथ), सांस फूलना और अत्यधिक कमजोरी इसके प्रमुख संकेत हैं. अगर समय रहते इन लक्षणों पर ध्यान न दिया जाए तो स्थिति बिगड़ सकती है. डॉक्टर मरीज की स्थिति को देखकर इलाज तय करते हैं. इसके लिए छाती का एक्स-रे, ब्लड टेस्ट या अन्य जांच कराई जाती हैं.

वायरल में अलग तरह की दवाएं

अगर संक्रमण बैक्टीरिया से है तो एंटीबायोटिक्स दी जाती हैं जबकि वायरल मामलों में अलग तरह की दवाएं दी जाती हैं. गंभीर स्थिति में मरीज को अस्पताल में भर्ती करना पड़ सकता है और ऑक्सीजन सपोर्ट भी देना पड़ता है. कुछ मामलों में संक्रमण इतना बढ़ जाता है कि फेफड़े का एक हिस्सा या पूरा फेफड़ा खराब हो जाता है. ऐसी स्थिति में न्यूमोनेक्टॉमी नाम की सर्जरी करनी पड़ती है, जिसमें एक फेफड़ा निकाल दिया जाता है.

फेफड़े को पूरी तरह नुकसान

यह कदम आमतौर पर तब उठाया जाता है, जब संक्रमण, टीबी, फंगल इंफेक्शन या कैंसर जैसी बीमारी फेफड़े को पूरी तरह नुकसान पहुंचा चुकी हो. यह सवाल बहुत लोगों के मन में आता है कि क्या एक फेफड़े के सहारे जिया जा सकता है. विशेषज्ञों के अनुसार मानव शरीर में खुद को परिस्थितियों के अनुसार ढालने की अद्भुत क्षमता होती है. जब एक फेफड़ा निकाल दिया जाता है तो दूसरा फेफड़ा धीरे-धीरे ज्यादा काम करने लगता है और शरीर की जरूरतों को पूरा करने लगता है.

समय-समय पर वैक्सीनेशन जरूरी

हालांकि ऐसे लोगों को पहले जैसी शारीरिक क्षमता हासिल करने में समय लग सकता है. भारी काम करने या ज्यादा दौड़ने-भागने में सांस जल्दी फूल सकती है, लेकिन सही इलाज, नियमित जांच और संतुलित जीवनशैली अपनाकर वे सामान्य जीवन जी सकते हैं. निमोनिया से बचाव के लिए जरूरी है कि समय-समय पर वैक्सीनेशन कराया जाए. साफ-सफाई का ध्यान रखा जाए, धूम्रपान से दूर रहें और इम्यूनिटी मजबूत रखें. हल्के लक्षण दिखने पर भी डॉक्टर से सलाह लेने में देरी न करें.

इसे भी पढ़ें. Pawan Khera: कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को मिली बड़ी राहत, सुप्रीम कोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

Latest News

Tata Motors Roadmap: अगले 5 साल में 40,000 करोड़ रुपये लगाएगी टाटा मोटर्स, 12 लाख से ज्यादा कारें बेचने का लक्ष्य

टाटा मोटर्स ने पैसेंजर व्हीकल कारोबार के लिए अगले पांच वर्षों का बड़ा रोडमैप पेश किया है. कंपनी करीब 40,000 करोड़ रुपये निवेश करेगी, 6 नए मॉडल लॉन्च करेगी और 20 से अधिक मौजूदा मॉडलों को अपडेट करेगी. वित्त वर्ष 2030 तक सालाना 12 लाख से अधिक वाहन बेचने का लक्ष्य है.

More Articles Like This

Exit mobile version