Health Tips: दिल को हेल्दी रखने और बैड कोलेस्ट्रॉल को घटाने के लिए स्टैटिन दवाओं का सहारा लिया जाता है. डॉक्टर अक्सर हार्ट अटैक और स्ट्रोक के खतरे को कम करने के लिए बेहद मशहूर दवा रोसुवास्टेटिन लिखते हैं. सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जो लोग इस दवा की उच्च खुराक ले रहे हैं, उनमें किडनी फेल्योर जैसी गंभीर स्थिति का खतरा 15 प्रतिशत तक बढ़ जाता है, जहां मरीज को डायलिसिस या ट्रांसप्लांट तक की नौबत आ सकती है.
शोधकर्ताओं ने किया यह नया खुलासा
हाल ही में अमेरिका की जानी-मानी जॉन्स हॉपकिंस यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने यह नया खुलासा किया है. इस रिसर्च के केंद्र में यह सवाल रहा कि क्या यह असरदार दवा आपकी किडनी के लिए अनजाने में कोई मुसीबत तो खड़ी नहीं कर रही है? दरअसल, यह चिंता नई नहीं है. जब सालों पहले US Food and Drug Administration (FDA) ने इस दवा को पहली बार हरी झंडी दी थी, तभी कुछ शुरुआती क्लीनिकल ट्रायल्स में मरीजों के यूरिन में खून और प्रोटीन जैसे लक्षण देखे गए थे, जो किडनी की खराबी का शुरुआती संकेत माने जाते हैं.
9 लाख लोगों के स्वास्थ्य डेटा का विश्लेषण
हालांकि, उस वक्त इस पर गहराई से गौर नहीं किया गया. अब शोधकर्ताओं ने करीब 9 लाख लोगों के स्वास्थ्य डेटा का बारीकी से विश्लेषण कर इस कमी को पूरा किया है, जिसमें रोसुवास्टेटिन की तुलना एक अन्य प्रसिद्ध दवा एटोरवास्टेटिन से की गई है. तीन साल तक चले इस लंबी स्टडी के नतीजे बताते हैं कि रोसुवास्टेटिन का सेवन करने वाले मरीजों में किडनी से जुड़ी जटिलताओं का जोखिम तुलनात्मक रूप से अधिक है.
प्रोटीन्यूरिया का खतरा 17 प्रतिशत तक ज्यादा
आंकड़ों के लिहाज से देखें तो इस दवा को लेने वालों में यूरिन के जरिए खून आने यानी हेमेट्यूरिया का खतरा 8 प्रतिशत और यूरिन में प्रोटीन निकलने यानी प्रोटीन्यूरिया का खतरा 17 प्रतिशत तक ज्यादा पाया गया. सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि जो लोग इस दवा की उच्च खुराक ले रहे थे, उनमें किडनी फेल्योर जैसी गंभीर स्थिति का खतरा 15 प्रतिशत तक बढ़ गया, जहां मरीज को डायलिसिस या ट्रांसप्लांट तक की नौबत आ सकती है.
स्वास्थ्य मानकों के लिहाज से जोखिम
रिसर्च में एक और महत्वपूर्ण पहलू सामने आया है कि कई बार उन मरीजों को भी रोसुवास्टेटिन की भारी डोज दी जा रही थी जिनकी किडनी पहले से ही कमजोर थी, जो कि स्वास्थ्य मानकों के लिहाज से जोखिम भरा हो सकता है. वहीं दूसरी ओर, दिलचस्प बात यह है कि दिल की बीमारियों से बचाने के मामले में रोसुवास्टेटिन और एटोरवास्टेटिन दोनों ही एक समान रूप से प्रभावी साबित हुई हैं. ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि दवाओं का चुनाव करते समय मरीज की किडनी की सेहत को ध्यान में रखना बेहद जरूरी है.

