Olive Oil Benefits: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग अपनी सेहत को लेकर पहले से ज्यादा जागरूक हो रहे हैं. हेल्दी डाइट से लेकर पर्याप्त पानी पीने तक, रोजमर्रा की छोटी-छोटी आदतों पर ध्यान दिया जाने लगा है. खाने में कितना तेल इस्तेमाल करना चाहिए, ऑलिव ऑयल वाकई कितना फायदेमंद है और RO पानी का TDS कितना होना चाहिए, ऐसे सवाल अब आम परिवारों की दिनचर्या का हिस्सा बन गए हैं. एक्सपर्ट्स के मुताबिक, बेहतर सेहत के लिए किसी एक फूड या एक नियम पर निर्भर रहने के बजाय पूरी डाइट और लाइफस्टाइल को संतुलित रखना ज्यादा जरूरी है.
ऑलिव ऑयल कितना इस्तेमाल करना चाहिए?
ऑलिव ऑयल को अक्सर हेल्दी फैट के विकल्प के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है. इसमें मुख्य रूप से मोनोअनसैचुरेटेड फैट पाया जाता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि इसे जितना चाहें उतना इस्तेमाल किया जा सकता है. ऑलिव ऑयल भी कैलोरी से भरपूर होता है, इसलिए रोजाना खाने में कुल तेल और फैट की मात्रा पर नजर रखना जरूरी है. खाना बनाते समय जरूरत के मुताबिक ही तेल का इस्तेमाल करना बेहतर माना जाता है. डाइट में अलग-अलग स्रोतों से मिलने वाले फैट को संतुलित रखना भी जरूरी है. इसके साथ ही बहुत ज्यादा तेल में तले हुए भोजन और जरूरत से ज्यादा फैट वाली चीजों का सेवन सीमित करना भी हेल्दी डाइट का अहम हिस्सा है.
RO पानी का TDS कितना होना चाहिए?
RO purifier का इस्तेमाल करने वाले लोगों के बीच पानी के TDS यानी Total Dissolved Solids को लेकर अक्सर सवाल रहता है. TDS पानी में मौजूद घुले हुए खनिजों और दूसरे पदार्थों की कुल मात्रा का एक संकेत देता है, लेकिन सिर्फ TDS देखकर पानी की पूरी गुणवत्ता तय नहीं की जा सकती. पानी की गुणवत्ता समझने के लिए उसके स्रोत के साथ माइक्रोबियल सुरक्षा और उसमें मौजूद संभावित contaminants को भी ध्यान में रखना जरूरी है. इसलिए सिर्फ किसी एक तय TDS नंबर को पानी की गुणवत्ता या सेहत के लिए अंतिम पैमाना मानना सही नहीं होगा. अगर घर के पानी की गुणवत्ता को लेकर कोई चिंता है, तो पानी की उचित जांच कराना ज्यादा उपयोगी हो सकता है.
रोज की डाइट में इन छोटी बातों का रखें ध्यान
एक हेल्दी लाइफस्टाइल के लिए रोज के भोजन में अलग-अलग तरह के पौष्टिक खाद्य पदार्थों को शामिल करना जरूरी है. डाइट में सब्जियां, फल, साबुत अनाज, दालें और पर्याप्त प्रोटीन शामिल करना फायदेमंद हो सकता है. वहीं, ज्यादा नमक, added sugar और अत्यधिक processed foods की मात्रा को सीमित रखना बेहतर माना जाता है. सिर्फ खाने पर ध्यान देना ही काफी नहीं है. पर्याप्त पानी पीना, नियमित शारीरिक गतिविधि करना और पूरी नींद लेना भी स्वस्थ जीवनशैली के महत्वपूर्ण हिस्से हैं.
किसी बीमारी में खुद से डाइट तय न करें
हर व्यक्ति की पोषण संबंधी जरूरत एक जैसी नहीं होती. किसी खास बीमारी, एलर्जी या अन्य मेडिकल जरूरत की स्थिति में डाइट में बड़ा बदलाव खुद से करने के बजाय डॉक्टर या registered dietitian की सलाह लेना उचित रहता है. यानी सेहत के लिए सिर्फ ऑलिव ऑयल को अपनाना या RO पानी का एक खास TDS बनाए रखना ही पर्याप्त नहीं है. रोज की पूरी डाइट, शारीरिक गतिविधि, पानी और नींद जैसी आदतों को संतुलित रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है.
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