हरीश राणा की अंतिम विदाई, फूट-फूटकर रोए मां-बाप, बोले-अलविदा बेटा…अब जा, शांति से जा!

Ghaziabad: इच्छा मृत्यु के बाद बुधवार को हरीश राणा को अंतिम विदाई दी गई. ग्रीन पार्क में सुबह नौ बजे उनका अंतिम संस्कार किया गया. वह भारत के पहले ऐसे व्यक्ति थे जिन्हें ‘पैसिव यूथेनेशिया’ (इच्छा मृत्यु) की अनुमति मिली थी. मंगलवार को उन्होंने दिल्ली AIIMS में अपनी अंतिम सांस ली, जिसके साथ ही उनकी 13 साल की पीड़ा का अंत हो गया. हरीश राणा के घर पर सन्नाटा छाया हुआ है, परिवार के हर सदस्य की आंखें नम है.

कलेजे के टुकड़े को हमेशा के लिए अलविदा

मंगलवार को आखिर वह पल था, जब हरीश राणा को माता-पिता ने कलेजे पर पत्थर रखकर कलेजे के टुकड़े को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया. एम्स के उस कमरे में हरीश के माता-पिता अपने लाल के इर्द-गिर्द बैठे थे. पिता अशोक राणा ने हाथ थामा और मां निर्मला देवी ने अपने बेटे के माथे को आखिरी बार चूमा और फूट-फूटकर रोते हुए कहा, अलविदा बेटा…अब जा, शांति से जा. लेकिन, किसी ने शोर नहीं मचाया. सिर्फ फुसफुसाहट में अलविदा के शब्द गूंज रहे थे.

हरीश के परिवार के अटूट समर्पण को किया याद

पड़ोसी और शुभचिंतक हरीश की ‘राज एम्पायर सोसाइटी’ में इकट्ठा हुए. उन्होंने हरीश के परिवार के उस अटूट समर्पण को याद किया, जिसके साथ उन्होंने भावनात्मक और आर्थिक दबाव के बावजूद हरीश की देखभाल की थी. एक स्थानीय निवासी, तेजस चतुर्वेदी ने कहा कि यह बहुत दुख की बात है. परिवार ने इन सभी वर्षों में उनके लिए वह सब कुछ किया जो वे कर सकते थे.

भारी निजी कीमत चुकानी पड़ी

हरीश के माता-पिता, अशोक राणा और निर्मला देवी, जिन्होंने अपने बेटे की देखभाल में एक दशक से ज़्यादा समय बिताया था, अक्सर इसके लिए उन्हें भारी निजी कीमत चुकानी पड़ी, जिसमें इलाज के लिए अपना घर बेचना भी शामिल था. हरीश 2013 में चौथी मंजिल की बालकनी से गिरने के बाद कोमा में चले गए थे. उस समय वे पंजाब यूनिवर्सिटी में B.Tech के छात्र थे.

‘लाइफ़ सपोर्ट’ को हटाने की अनुमति

इस महीने की शुरुआत में सुप्रीम कोर्ट के एक ऐतिहासिक आदेश के बाद उन्हें गाजियाबाद स्थित अपने घर से दिल्ली AIIMS की ‘पैलिएटिव केयर यूनिट’ (उपशामक देखभाल इकाई) में शिफ़्ट किया गया था. इस आदेश में उनके ‘लाइफ़ सपोर्ट’ (जीवन रक्षक प्रणाली) को हटाने की अनुमति दी गई थी. उनके पिता ने पहले इस फ़ैसले को बेहद दर्दनाक लेकिन ज़रूरी बताया था.

शांति से सोने का आग्रह

हरीश के निधन से कुछ दिन पहले एक वीडियो ऑनलाइन सामने आया था. इस वीडियो में ‘ब्रह्मा कुमारीज़’ के सदस्य परिवार के घर पर प्रार्थना करते हुए दिखाई दे रहे थे. वे हरीश से शांति से सोने का आग्रह कर रहे थे. साथ ही सभी से क्षमा मांग रहे थे और सभी को क्षमा कर रहे थे यह एक ऐसा अनुष्ठान है जिसका उद्देश्य आत्मा की यात्रा को सुगम बनाना होता है.

जीवन-रक्षक उपचार हटाना शामिल

11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने हरीश के लिए ‘पैसिव यूथेनेशिया’ (इच्छामृत्यु) की अनुमति देते हुए यह स्पष्ट किया था कि इसमें जीवन-रक्षक उपचार जैसे कि ‘फीडिंग ट्यूब’, को हटाना शामिल होगा, जबकि गरिमापूर्ण और स्वाभाविक मृत्यु के लिए ‘पैलिएटिव केयर’ (दर्द निवारक देखभाल) जारी रहेगी. मेडिकल विशेषज्ञों ने यह निष्कर्ष निकाला था कि उनकी स्थिति अब ठीक नहीं हो सकती.

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