CAG Railway Audit: रेलवे स्टेशन पर पहुंचते ही यात्री सबसे पहले जिस चीज की उम्मीद करता है, वह है साफ पानी और जरूरी बुनियादी सुविधाएं. लेकिन CAG की ऑडिट रिपोर्ट ने इन व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. देशभर के 512 नॉन-सबअर्बन रेलवे स्टेशनों की जांच में 458 स्टेशन यानी 89 फीसदी से ज्यादा स्टेशन न्यूनतम जरूरी सुविधाओं के मामले में कमजोर पाए गए. इससे भी गंभीर बात यह है कि आठ प्रमुख रेलवे स्टेशनों के वॉटर कूलरों से लिए गए पानी के सैंपल में E. coli बैक्टीरिया मिला. इसके अलावा कई स्टेशनों के प्लेटफॉर्म नलों के पानी में भी टोटल कोलीफॉर्म बैक्टीरिया की पुष्टि हुई. ऑडिट में सामने आए आंकड़े रेलवे की यात्री सुविधाओं की स्थिति को लेकर चिंता बढ़ाते हैं. जांच के दौरान कई स्टेशनों पर शौचालय, यूरिनल, पानी के नल, बैठने की जगह और प्लेटफॉर्म शेल्टर जैसी जरूरी सुविधाओं की कमी दर्ज की गई.
512 रेलवे स्टेशनों के ऑडिट में क्या मिला?
भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक यानी CAG ने देशभर के 512 नॉन-सबअर्बन रेलवे स्टेशनों का ऑडिट किया. इसमें 458 स्टेशनों पर न्यूनतम आवश्यक यात्री सुविधाओं की भारी कमी पाई गई. इन स्टेशनों पर पीने के पानी के अलावा शौचालय, यूरिनल, बैठने के लिए बेंच, प्लेटफॉर्म शेल्टर, पंखे और साइन बोर्ड जैसी बुनियादी सुविधाओं में भी कमियां दर्ज की गईं. यानी ऑडिट में शामिल करीब 89 फीसदी से अधिक स्टेशनों पर यात्रियों के लिए निर्धारित न्यूनतम सुविधाओं की स्थिति संतोषजनक नहीं मिली.
वॉटर कूलरों के पानी में मिला E. coli
CAG की रिपोर्ट में सबसे गंभीर सवाल पीने के पानी की गुणवत्ता को लेकर सामने आया है. देश के आठ प्रमुख रेलवे स्टेशनों के वॉटर कूलरों से लिए गए पानी के सैंपल में E. coli बैक्टीरिया पाया गया. इन स्टेशनों में मुंबई का छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (CSMT), कल्याण, लोनावला और भिवंडी रोड शामिल हैं.
इसके अलावा दक्षिण रेलवे के कोयंबटूर और पालक्काड जंक्शन, साउथ सेंट्रल रेलवे का हैदराबाद और ईस्टर्न रेलवे का मधुपुर स्टेशन भी इस सूची में शामिल हैं. ये वही वॉटर कूलर हैं, जिनका इस्तेमाल सफर के दौरान यात्री अपनी प्यास बुझाने के लिए करते हैं. ऐसे में पानी के सैंपल में बैक्टीरिया मिलना रेलवे की पानी की गुणवत्ता और उसके रखरखाव की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है.
प्लेटफॉर्म नलों के पानी में भी बैक्टीरिया
प्लेटफॉर्म पर लगे नलों के पानी की जांच में भी चिंताजनक स्थिति सामने आई. CAG के आंकड़ों के मुताबिक, 2022-23 में 8 जोन के 49 स्टेशनों और 2023-24 में 9 जोन के 56 स्टेशनों के प्लेटफॉर्म नलों से पानी के सैंपल लिए गए. इन सैंपल में टोटल कोलीफॉर्म बैक्टीरिया की पुष्टि हुई. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कई रेलवे जोन में पानी की बैक्टीरियोलॉजिकल जांच तय सरकारी नियमों और प्रोटोकॉल के अनुसार नहीं की जा रही थी. यानी पानी की गुणवत्ता की निगरानी की व्यवस्था में भी खामियां सामने आई हैं.
शौचालय और यूरिनल की भी कमी
CAG ऑडिट में यात्रियों के लिए शौचालय और यूरिनल जैसी जरूरी सुविधाओं की स्थिति भी सामने आई. जांच के दौरान 201 स्टेशनों पर शौचालयों की कमी पाई गई. वहीं 403 स्टेशनों पर यूरिनल पर्याप्त संख्या में उपलब्ध नहीं थे. इसके अलावा 2,035 स्टेशनों पर पानी के नलों की भारी कमी दर्ज की गई. ये आंकड़े बताते हैं कि समस्या केवल पीने के पानी की गुणवत्ता तक सीमित नहीं है, बल्कि यात्रियों की रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़ी कई बुनियादी सुविधाएं भी बड़ी संख्या में स्टेशनों पर पर्याप्त नहीं मिलीं.
बुनियादी सुविधाओं पर भी उठे सवाल
ऑडिट के दौरान पानी और स्वच्छता के अलावा यात्रियों के बैठने के लिए बेंच, प्लेटफॉर्म शेल्टर, पंखे और साइन बोर्ड जैसी सुविधाओं में भी कमी दर्ज की गई. इसका मतलब है कि कई स्टेशनों पर यात्रियों को सफर के दौरान जिन न्यूनतम सुविधाओं की जरूरत होती है, उनकी उपलब्धता और व्यवस्था में अंतर पाया गया.
CAG रिपोर्ट ने रेलवे प्रशासन के सामने रखी बड़ी चुनौती
CAG की ऑडिट रिपोर्ट में सामने आए आंकड़े रेलवे स्टेशनों पर यात्री सुविधाओं, पानी की गुणवत्ता और नियमित निगरानी की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं. खास तौर पर वॉटर कूलरों के पानी में E. coli और प्लेटफॉर्म नलों के पानी में टोटल कोलीफॉर्म बैक्टीरिया मिलने की जानकारी यात्रियों की सेहत से जुड़े पहलू को बेहद महत्वपूर्ण बना देती है. वहीं, बड़ी संख्या में स्टेशनों पर शौचालय, यूरिनल और पानी के नलों की कमी भी यात्री सुविधाओं को लेकर एक बड़ी चुनौती को सामने रखती है.
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