Defence Ministry India: भारत सरकार ने ग्लोबल डिफेंस मार्केट में अपनी धाक जमाने के लिए रक्षा निर्यात नियमों में बड़ा बदलाव किया है. रक्षा मंत्रालय ने निर्यात से जुड़ी मानक संचालन प्रक्रिया और ओपन जनरल एक्सपोर्ट लाइसेंस व्यवस्था को पूरी तरह से आसान कर दिया है. इस ऐतिहासिक कदम से भारतीय कंपनियों और खास तौर पर एमएसएमई सेक्टर के लिए दुनिया भर में हथियार और सैन्य उपकरण बेचना बेहद आसान हो जाएगा.
ऐसे में अब भारतीय कंपनियों को हर खेप के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेगे. अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों और विदेशी टेंडर्स में भाग लेने के लिए लगने वाले समय में भारी कटौती होगी. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के नेतृत्व में हुआ यह सुधार भारत को दुनिया का प्रमुख रक्षा विनिर्माण केंद्र बनाने की दिशा में गेमचेंजर साबित होगा.
भारतीय डिफेंस कंपनियों के लिए खत्म हो गईं सभी अड़चनें
रक्षा मंत्रालय के रक्षा उत्पादन विभाग ने निर्यात प्रक्रिया को तेज करने के लिए कई बड़े नीतिगत फैसले लिए हैं. नई व्यवस्था के तहत अधिकांश देशों को गैर घातक रक्षा उपकरण भेजने के लिए अब अलग से परामर्श लेने की जरूरत खत्म कर दी गई है. इससे भारतीय निर्यातक बिना किसी देरी के विदेशी खरीदारों को अपने उत्पाद सप्लाई कर सकेंगे.
इसके अलावा विदेशी टेंडर्स और अंतरराष्ट्रीय रक्षा प्रदर्शनियों में भाग लेने के लिए भी नियमों को भी सरल कर दिया गया है. अब भारतीय कंपनियां दुनिया के किसी भी कोने में लगने वाले डिफेंस एक्सपो में अपने हथियार और तकनीक तेजी से प्रदर्शित कर सकेंगी. इससे वैश्विक स्तर पर भारतीय रक्षा उत्पादों की विजिबिलिटी काफी बढ़ जाएगी.
ओपन जनरल एक्सपोर्ट लाइसेंस में सरकार ने किए बड़े बदलाव
सरकार ने ओपन जनरल एक्सपोर्ट लाइसेंस यानी ओजीईएल व्यवस्था को अब एक ही छत के नीचे लाकर बेहद मजबूत कर दिया है. पहले प्रमुख रक्षा प्लेटफॉर्म, कलपुर्जों और तकनीक हस्तांतरण के लिए तीन अलग प्रक्रियाएं चलती थीं. अब इन तीनों को मिलाकर एक एकीकृत व्यवस्था बना दी गई है.
इस नए सिस्टम के तहत ओजीईएल की वैधता को दो साल से बढ़ाकर तीन साल कर दिया गया है. लाइसेंस की अवधि बढ़ने से कंपनियों को बार बार नवीनीकरण कराने की परेशानी से छुटकारा मिलेगा. इससे कंपनियों के समय और पैसे दोनों की भारी बचत होगी. साथ ही विदेशी ग्राहकों के साथ बिजनेस डील को समय पर पूरा करना आसान हो जाएगा.