New Delhi: दिल्ली में एक बार फिर प्राइवेट स्कूलों में फीस बढ़ोतरी और नियमों को लेकर विवाद शुरू हो गया है. दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली सरकार से उस सर्कुलर पर जवाब मांगा है जिसमें शिक्षा निदेशालय (DoE) ने प्राइवेट स्कूलों को ‘स्कूल लेवल फीस रेगुलेशन कमिटी’ (SLFRC) बनाने का निर्देश दिया था. प्राइवेट स्कूलों की एसोसिएशन ने सरकार के इस सर्कुलर को हाई कोर्ट में चुनौती दी है.
दुर्भावनापूर्ण बताकर चुनौती
ये अर्जियां उन याचिकाओं का हिस्सा हैं जिनमें दिल्ली स्कूल एजुकेशन (फीस तय करने और रेगुलेशन में पारदर्शिता) एक्ट, 2025 को गलत नीयत वाला, पक्षपाती, मनमाना और दुर्भावनापूर्ण बताकर चुनौती दी गई है. चीफ जस्टिस डी.के. उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की बेंच ने स्कूलों की अर्जियों पर नोटिस जारी किया और सरकार से अपनी आपत्तियां दाखिल करने को कहा.
किसी भी सख्त कार्रवाई से बचाया जाए
‘एक्शन कमिटी अनएडेड रिकॉग्नाइज्ड प्राइवेट स्कूल्स’ के वकील ने कोर्ट से अनुरोध किया कि SLFRC न बनाने पर अधिकारियों की ओर से की जाने वाली किसी भी सख्त कार्रवाई से उन्हें बचाया जाए. बेंच ने कहा कि मुख्य मामले की सुनवाई 20 जुलाई को होनी है और अगर इस बीच कोई प्रतिकूल कार्रवाई की जाती है तो याचिकाकर्ता कोर्ट आ सकते हैं. कोर्ट ने कहा, अगर वे कोई जल्दबाजी वाली कार्रवाई करते हैं तो हमें बताएं. 20 जुलाई तक इंतजार करें.
सरकार के 1 फरवरी के आदेश पर रोक
याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि कोर्ट ने मौजूदा एकेडमिक सेशन के लिए SLFRC बनाने के प्राइवेट स्कूलों को दिए गए सरकार के 1 फरवरी के आदेश पर रोक लगा दी थी फिर भी अधिकारियों ने 30 जून को वैसा ही सर्कुलर जारी कर दिया. एक्शन कमिटी की अर्जी में कहा गया है कि सर्कुलर में SLFRC बनाने और तीन साल के ब्लॉक (जिसमें 2026-27 का सेशन भी शामिल है) के लिए फीस का प्रस्ताव जमा करने के उन्हीं निर्देशों को फिर से दोहराया और लागू किया गया है.
स्कूलों से फीस बढ़ाने का प्रस्ताव
अर्जी में तर्क दिया गया …DoE का SLFRC बनाने और स्कूलों से फीस बढ़ाने का प्रस्ताव जमा करने का निर्देश देना जिसमें 2026-27 का एकेडमिक ईयर भी शामिल है गैर-कानूनी है. दिल्ली सरकार की ओर से पेश हुए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू ने कोर्ट में कहा कि 28 फरवरी को कोर्ट ने स्कूलों के लिए SLFRC बनाने के कानूनी आदेश को लागू करने पर रोक नहीं लगाई थी.
आदेश को लागू करने को टाल दिया
28 फरवरी को कोर्ट ने प्राइवेट स्कूलों के लिए आने वाले एकेडमिक सेशन के वास्ते SLFRC बनाने के दिल्ली सरकार के आदेश को लागू करने को टाल दिया था. दिल्ली सरकार के SLFRC (स्कूल-लेवल फीस रेगुलेटरी कमेटी) के गठन से जुड़े 1 फरवरी के नोटिफिकेशन पर रोक लगाते हुए कोर्ट ने कहा था कि स्कूल एकेडमिक ईयर 2026-2027 के लिए उतनी ही फीस ले सकते हैं जितनी उन्होंने पिछले एकेडमिक ईयर में ली थी.
एक नॉमिनी शामिल होना चाहिए
नए नियम के तहत हर प्राइवेट स्कूल को एक SLFRC बनानी होगी. इस कमेटी में स्कूल मैनेजमेंट के प्रतिनिधि, प्रिंसिपल, तीन टीचर, पांच माता-पिता और DoE (शिक्षा निदेशालय) का एक नॉमिनी शामिल होना चाहिए. SLFRC को स्कूल मैनेजमेंट की तरफ से जमा किए गए फीस प्रस्तावों की जांच करनी होगी और 30 दिनों के अंदर फैसला लेना होगा.
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