पहले 15 अगस्त नहीं इस दिन मनाया जाता था स्वतंत्रता दिवस, जानिए जापान से कनेक्शन

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Independence Day: 15 अगस्त 1947 को प्रधानमंत्री नेहरू ने मध्य रात्रि में कहा था, “आज जब पूरा विश्व सो रहा होगा तब भारत परतंत्रता की बेड़ियों को तोड़ कर जागेगा.” 15 अगस्त 1947 को हमें अंग्रेजों से आजादी मिली थी. भारत को आजाद कराने के लिए न जाने कितने स्वतंत्रता सेनानीयों ने बलिदान दिया. इस साल भारत अपने 76वें स्वतंत्रता दिवस को मनाने की तैयारी कर रहा है. लेकिन क्या आपको पता है कि 15 अगस्त से पहले हम अपना स्वतंत्रता दिवस किसी और दिन मनाते थे. जी हां अगर आप भी नहीं जानते तो आइए हम आपको बताते हैं कि 15 अगस्त 1947 से पहले हम अपना स्वतंत्रता दिवस कब और क्यों मनाते थे.

आजादी से पहले कब और क्यों मनाते थे स्वतंत्रता दिवस
आपको बता दें कि 15 अगस्त 1947 से पहले 18 साल तक भारत किसी और दिन अपना स्वतंत्रता दिवस मनाता था. दरअसल 15 अगस्त 1947 से पहले भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने 26 जनवरी 1930 को ही पूर्ण स्वराज यानि की भारत को ब्रिटिश राज से पूरी तरह से मुक्ति कि घोषणा कर दी थी. और उस दिन से लेकर 15 अगस्त 1947 तक भारत 26 जनवरी को ही अपना स्वतंत्रता दिवस मनाता था. अंग्रेजो से पूरी तरह आजाद होने के बाद भारत ने 26 जनवरी के दिन को और भी यादगार बनाने के लिए 26 जनवरी 1950 को अपना संविधान लागू कर दिया और तब से लेकर आज तक हम 26 जनवरी को स्वतंत्रता दिवस की जगह गणतंत्र दिवस के रूप में मनाते हैं.

15 अगस्त को ही क्यों मिली आजादी
आजादी को लेकर आपके मन में कई प्रश्न होंगें, कि आखिर भारत 15 अगस्त को ही क्यों आजाद हुआ. आपको बता दें कि भारत को आजाद कराने के लिए जहां एक तरफ गांधी जी और नेहरू जैसे नेता सत्ता का हस्तांतरण के लिए कोशिश कर रहे थे और राजनीतिक रूप में आजादी चाहते थे. तो वहीं चंद्रशेखर आजाद, भगत सिंह और नेताजी सुभाष चंद्र बोस जैसे महापुरुषों ने अंग्रेजों के नाक में दम कर रखा था. ब्रिटिश हुकूमत को ये पता चल चुका था कि अब भारतीय किसी भी किमत पर आजादी लेकर रहेंगें. उस समय माउंटबेटन भारत का अंतिम ब्रिटिश गवर्नर जनरल था. उसे अंग्रेजी सरकार ने 30 जून 1948 तक भारत को सत्ता हस्तांतरित करने का आदेश दिया था. लेकिन माउंटबेटन को मजबूरन 15 अगस्त 1947 को मध्य रात्रि में ही भारत को आजाद करना पड़ा. जाते जाते उसने भारत को दो टुकड़ों में बांट दिया. बता दें कि माउंटबेटन ने भारत को आजाद करने के लिए द्वितीय विश्व युद्ध में जापान के आत्मसमर्पण की दूसरी वर्षगांठ को चुना था.

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