New Delhi: TMC सांसद पूर्व भारतीय ऑलराउंडर कीर्ति आजाद के बयान पर टीम इंडिया के मुख्य कोच गौतम गंभीर ने करारा जवाब दिया है. एक पॉडकास्ट में गौतम गंभीर ने कहा कि ऐसे बयानों पर ध्यान देने का कोई मतलब नहीं है, क्योंकि ये सिर्फ आपकी उपलब्धि को कम करते हैं. बता दें कि कीर्ति आजाद ने भारत की आईसीसी टी20 वर्ल्ड कप 2026 के फाइनल में जीत के बाद टीम के मंदिर जाने के फैसले की आलोचना की थी.
कीर्ति आजाद ने की थी आलोचना
8 मार्च को नरेंद्र मोदी स्टेडियम में न्यूजीलैंड को 96 रन से हराने के बाद भारतीय कप्तान सूर्यकुमार यादव और मुख्य कोच गौतम गंभीर ट्रॉफी के साथ आईसीसी चेयरमैन जय शाह के साथ अहमदाबाद के एक हनुमान मंदिर पहुंचे थे. 1983 में भारत को वर्ल्ड कप जिताने वाली टीम के सदस्य रहे कीर्ति आजाद ने ट्वीट कर इस कदम की आलोचना की.
कपिल देव की कप्तानी में जीता था वर्ल्ड कप
उन्होंने लिखा, “जब हमने कपिल देव की कप्तानी में 1983 में वर्ल्ड कप जीता था, तब हमारी टीम में हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई थे. हमने ट्रॉफी को अपने धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि अपने देश भारत लाया था. आखिर भारतीय क्रिकेट ट्रॉफी को क्यों घसीटा जा रहा है? सिर्फ मंदिर क्यों? मस्जिद क्यों नहीं? चर्च क्यों नहीं? गुरुद्वारा क्यों नहीं?
कभी ट्रॉफी को मस्जिद में नहीं ले गए सिराज
यह टीम भारत का प्रतिनिधित्व करती है, न कि सिर्फ सूर्यकुमार यादव या जय शाह के परिवार का. सिराज ने कभी ट्रॉफी को मस्जिद में नहीं ले गए. संजू ने कभी चर्च में नहीं ले गए, जबकि उन्होंने टूर्नामेंट में अहम भूमिका निभाई थी और मैन ऑफ द टूर्नामेंट रहे थे. यह ट्रॉफी 1.4 अरब भारतीयों की है, हर धर्म के लिए है, न कि किसी एक धर्म की जीत का जश्न!”
खिलाड़ियों की उपलब्धि को कम कर रहे हैं आजाद
गौतम गंभीर ने कहा कि आजाद, जो अब सांसद हैं, ऐसे बयान देकर खिलाड़ियों की उपलब्धि को कम कर रहे हैं. गंभीर ने कहा, ‘मैं इस पर क्या कहूं? मुझे लगता है कि इस सवाल का जवाब देना भी जरूरी नहीं है. यह पूरे देश के लिए बहुत बड़ा मौका है, और अगर आप मुझसे पूछें तो यह देश के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि है. मुझे लगता है कि हमें वर्ल्ड कप जीत का जश्न मनाना चाहिए.
कल कोई भी कुछ भी बयान देगा
गंभीर ने आगे कहा, ‘अगर आप उन लड़कों, उन 15 खिलाड़ियों और उनकी मेहनत की उपलब्धि को कम करना चाहते हैं, तो कल कोई भी कुछ भी बयान देगा और हम उसे गंभीरता से लेने लगेंगे, जो उन लड़कों के साथ न्याय नहीं है. सोचिए, इन लड़कों ने कितना कुछ झेला है, दक्षिण अफ्रीका से मैच हारने के बाद उन पर कितना दबाव था. और आज अगर आप ऐसे बयान देते हैं, तो आप अपने ही खिलाड़ियों और अपनी टीम का मनोबल गिरा रहे हैं, जो नहीं होना चाहिए,’
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