Bhojshala Mandir Verdict: हाईकोर्ट ने भोजशाला को घोषित किया मंदिर, हिंदुओं को मिला पूजा का अधिकार, नहीं हो सकेगी नमाज

Bhojshala Mandir Verdict: मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने भोजशाला मंदिर-कमाल मौला मस्जिद परिसर विवाद पर शुक्रवार को ऐतिहासिक फैसला सुनाया है. हाईकोर्ट ने भोजशाला को हिंदू मंदिर घोषित किया है. कोर्ट ने कहा कि भोजशाला संस्कृत शिक्षा का केंद्र रहा है. इस आदेश के बाद भोजशाला में अब सिर्फ पूजा होगी. इस फैसले को हिन्दू पक्ष की बड़ी जीत माना जा रहा है. हिंदू पक्ष में खुशी की लहर है, जबकि प्रशासन ने क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है.

सख्त कार्रवाई की चेतावनी

धार के जिलाधिकारी राजीव रंजन मीणा ने सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक सामग्री प्रसारित करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है. प्रशासन ने विवादित स्थल पर अवरोधक लगाकर उसकी घेराबंदी कर दी है. शुक्रवार की नमाज और अदालत का फैसला एक ही दिन होने के कारण अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है. कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि भोजशाला एक संरक्षित स्मारक है और इसे वाग्देवी का मंदिर माना जाएगा.

हिंदू समाज को पूजा-अर्चना करने का अधिकार

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि भोजशाला का प्रबंधन और नियंत्रण अब पूरी तरह Archaeological Survey of India (ASI) के पास रहेगा. साथ ही हिंदू समाज को यहां पूजा-अर्चना करने का अधिकार दिया गया है. फैसले में मुस्लिम समुदाय द्वारा परिसर में नमाज़ अदा करने की अनुमति समाप्त करने की बात भी कही गई है. इस पर अदालत ने मुस्लिम पक्ष को सुझाव दिया है कि वे सरकार के समक्ष किसी अन्य उपयुक्त भूमि के आवंटन के लिए प्रतिनिधित्व प्रस्तुत कर सकते हैं.

प्रतिनिधित्व पर भी विचार

इसके अलावा कोर्ट ने भारत सरकार को निर्देशित किया है कि ब्रिटेन के म्यूज़ियम में रखी वाग्देवी प्रतिमा को वापस भारत लाने संबंधी प्रतिनिधित्व पर भी विचार किया जाए. यह मुद्दा लंबे समय से हिंदू संगठनों द्वारा उठाया जाता रहा है. फैसला सुनाए जाने से पहले धार शहर और परिसर के आस-पास करीब 1,200 पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है. 11वीं सदी के इस स्मारक पर हिंदू और मुस्लिम समुदाय लंबे समय से दावा करते रहे हैं, जबकि जैन समुदाय के एक समूह ने भी भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) संरक्षित इस स्थल पर अपना दावा जताया है.

कमाल मौला मस्जिद बताता है मुस्लिम 

हिंदू समुदाय भोजशाला को वाग्देवी (देवी सरस्वती) का मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इस स्मारक को कमाल मौला मस्जिद बताता है. वहीं, जैन समुदाय के एक याचिकाकर्ता का दावा है कि यह परिसर मध्यकालीन जैन मंदिर और गुरुकुल था. एएसआई की 2003 की व्यवस्था के तहत हिंदू और मुस्लिम समुदाय क्रमशः मंगलवार और शुक्रवार को यहां पूजा-अर्चना और नमाज अदा करते हैं. हिंदू पक्ष ने इस व्यवस्था को उच्च न्यायालय में चुनौती देते हुए परिसर में पूजा के विशेष अधिकार का अनुरोध किया है. उच्च न्यायालय ने 11 मार्च 2024 को भोजशाला मंदिर-कमाल मौला मस्जिद परिसर का वैज्ञानिक सर्वेक्षण कराने का आदेश दिया था.

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