Guru Purnima 2026: हम सभी के जीवन में गुरु का महत्वपुर्ण स्थान है. ऐसी मान्यता है कि बिना गुरु का ज्ञान अधूरा रहता है. इसलिए हम सभी गुरु की इज्जत सम्मान करते हैं. सभी धर्म के लोग अपने गुरु को सम्मान करने के लिए साल में एक विशेष दिन निर्धारित किए हैं. जिस दिन वे अपने गुरु से आशीर्वाद लेते हैं. सनातन धर्म के लोग अपने गुरु के सम्मान के लिए आषाढ़ माह की पूर्णिमा की तिथि निर्धारित किए हैं. आज गुरु पूर्णिमा मनाई जा रही है. इस ख़ास मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सुभाषित शेयर कर देशवासियों को बधाई दी है.
पीएम मोदी ने दी बधाई
पीएम मोदी ने एक्स पोस्ट में लिखा, “गुरु पूर्णिमा की सभी देशवासियों को बहुत-बहुत बधाई. गुरु ज्ञान के साथ ही अपने शिष्यों में सकारात्मक ऊर्जा का संचार कर उन्हें सुविचार और सुसंस्कारों से सुशिक्षित करते हैं. आइए, उनके आदर्शों को अपने जीवन का संबल बनाएं.”
एक श्लोक भी किया शेयर
प्रधानमंत्री ने एक श्लोक भी शेयर किया है, “प्रेरकः सूचकश्चैव वाचको दर्शकस्तथा। शिक्षकः बोधकश्चैव षडेते गुरवः स्मृताः॥” जिसका अर्थ है कि जो जीवन में प्रेरणा का संचार करे, सही दिशा का संकेत दे, ज्ञान और सत्य का उपदेश करे, उचित मार्ग दिखाए, शिक्षा प्रदान करे तथा जीवन में सत्य का बोध कराकर आत्मविकास का मार्ग प्रशस्त करे, ये गुरु के छह स्वरूप बताए गए हैं.
गुरु पूर्णिमा की सभी देशवासियों को बहुत-बहुत बधाई। गुरु ज्ञान के साथ ही अपने शिष्यों में सकारात्मक ऊर्जा का संचार कर उन्हें सुविचार और सुसंस्कारों से सुशिक्षित करते हैं। आइए, उनके आदर्शों को अपने जीवन का संबल बनाएं।
प्रेरकः सूचकश्चैव वाचको दर्शकस्तथा।
शिक्षकः बोधकश्चैव षडेते… pic.twitter.com/DejWzLPnda
— Narendra Modi (@narendramodi) July 29, 2026
सुभाषित किया शेयर
मंगलवार को पीएम मोदी ने सुभाषित शेयर करते हुए लिखा, “प्रकृति के संरक्षण और सम्मान में ही मानवता का कल्याण निहित है. हमारी परंपरा भी हमें इसी धर्मसम्मत आचरण की प्रेरणा देती है,” उन्होंने संस्कृत श्लोक, “लोकपालाश्च ते सर्वे वासवप्रमुखास्तथा। ऋतवः षट् च ते सर्वे मासाः संवत्सराः क्षपाः॥ दिनानि च मुहूर्ताश्च स्वस्ति कुर्वन्तु ते सदा. श्रुतिः स्मृतिश्च धर्मश्च पातु त्वां पुत्र सर्वतः॥” भी शेयर किया था.
जिसका अर्थ है कि प्रकृति और धर्म के साथ सामंजस्यपूर्ण जीवन ही सुख, सुरक्षा और मंगल का आधार है. अतः दिशाओं के रक्षक देवता, इंद्र आदि प्रमुख देवगण, छह ऋतुएं, सभी मास, वर्ष, रात्रियां, दिन और शुभ मुहूर्त सदैव कल्याणकारी हों. वेद, स्मृतियां और धर्म भी सभी प्रकार से सर्वत्र सबकी रक्षा करें.