Mumbai Satta Bazaar Election Prediction: 4 मई को होने वाली मतगणना से पहले देश का सबसे बड़ा अनौपचारिक सट्टा बाजार, यानी ‘मुंबई सट्टा बाजार’, पूरी तरह गरम हो चुका है. करोड़ों रुपये के दांव लग चुके हैं और अलग-अलग राज्यों को लेकर सटोरियों के अनुमान तेजी से सामने आ रहे हैं. पश्चिम बंगाल से लेकर तमिलनाडु, असम और केरल तक, इन रुझानों ने राजनीतिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है. कहीं सत्ता परिवर्तन के संकेत मिल रहे हैं तो कहीं मौजूदा सरकार की वापसी की चर्चा है. हालांकि, यह पूरा बाजार अनौपचारिक है और इसके आंकड़ों की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं होती, फिर भी हर चुनाव से पहले इसके अनुमान चर्चा का बड़ा केंद्र बन जाते हैं.
पश्चिम बंगाल: कड़े मुकाबले के बीच चौंकाने वाले अनुमान
पश्चिम बंगाल को लेकर ‘मुंबई सट्टा बाजार’ के आंकड़े सबसे ज्यादा चर्चा में हैं. यहां बहुमत का आंकड़ा 148 सीटों का है, लेकिन सटोरियों के मुताबिक बीजेपी को 175 से 185 सीटों तक मिलने का अनुमान लगाया जा रहा है. वहीं ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस के 127 से 132 सीटों पर सिमटने की बात कही जा रही है. इन अनुमानों ने बंगाल की सियासत को लेकर नई बहस छेड़ दी है, क्योंकि अगर ये आंकड़े सही साबित होते हैं तो राज्य में बड़ा राजनीतिक बदलाव देखने को मिल सकता है.
तमिलनाडु: सत्ताधारी दल की वापसी के संकेत
दक्षिण भारत के प्रमुख राज्य तमिलनाडु में सट्टा बाजार के रुझान सत्ताधारी डीएमके के पक्ष में जाते दिख रहे हैं. अनुमान है कि एमके स्टालिन के नेतृत्व में पार्टी 145 से 155 सीटों के बीच रह सकती है, जिससे उसकी सत्ता में वापसी लगभग तय मानी जा रही है. दूसरी ओर एआईएडीएमके के 45 से 65 सीटों तक सिमटने का अनुमान है. दिलचस्प बात यह है कि अभिनेता विजय की नई पार्टी टीवीके को भी 7 से 9 सीटें मिलने की संभावना जताई जा रही है, जो पहली बार के हिसाब से अहम मानी जा रही है.
असम और केरल: अलग-अलग तस्वीर
असम में ‘मुंबई सट्टा बाजार’ के अनुसार बीजेपी को बढ़त मिलती दिख रही है. यहां पार्टी के 85 से 92 सीटें हासिल करने का अनुमान है, जिससे साफ है कि मौजूदा सरकार की स्थिति मजबूत बनी हुई है. वहीं केरल में परंपरा के अनुसार सत्ता परिवर्तन की संभावना जताई जा रही है. सटोरियों के मुताबिक यूडीएफ को 78 से 85 सीटें मिल सकती हैं, जबकि एलडीएफ 56 से 66 सीटों के बीच रह सकता है. पुडुचेरी की बात करें तो यहां मुकाबला बेहद करीबी बताया जा रहा है, जहां एनडीए और इंडिया ब्लॉक के बीच कांटे की टक्कर मानी जा रही है.
कैसे तय होता है ‘भाव’
सट्टा बाजार में किसी भी पार्टी का ‘भाव’ उसकी जीत की संभावना के आधार पर तय किया जाता है. जिस पार्टी की जीत की संभावना ज्यादा मानी जाती है, उसका भाव कम होता है, यानी उस पर दांव लगाने वालों को कम रिटर्न मिलता है. इसके उलट, जिस पार्टी की स्थिति कमजोर मानी जाती है, उसका भाव ज्यादा होता है.
बताया जाता है कि ‘मुंबई सट्टा बाजार’ स्थानीय माहौल, उम्मीदवारों की लोकप्रियता, रैलियों की भीड़ और ग्राउंड रिपोर्ट के आधार पर अपने अनुमान तय करता है. हालांकि यह पूरी तरह अनौपचारिक और गैर-कानूनी ढांचा है, इसलिए इसके आंकड़ों को अंतिम सत्य नहीं माना जा सकता.
नतीजों से पहले बढ़ी हलचल, लेकिन अंतिम फैसला 4 मई को
फिलहाल इन अनुमानों ने चुनावी माहौल को और ज्यादा गरम कर दिया है और राजनीतिक दलों से लेकर आम लोगों तक हर कोई इन आंकड़ों पर नजर बनाए हुए है. लेकिन यह याद रखना जरूरी है कि सट्टा बाजार के ये आंकड़े केवल अनुमान हैं और इनकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं होती. असली तस्वीर 4 मई को मतगणना के बाद ही सामने आएगी, जब यह साफ हो जाएगा कि किस राज्य में किसकी सरकार बनेगी और किसका दावा सही साबित हुआ.
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