New Delhi: दिल्ली-लखनऊ रूट पर चलने वाली भारत की पहली निजी तौर पर संचालित तेजस एक्सप्रेस का नाम करीब 3 महीने के लिए बदलकर ‘स्प्राइट तेजस एक्सप्रेस’ किया जाएगा. अभी तक ट्रेनों के बाहरी हिस्से या दूसरे तय स्थानों पर कंपनियों के विज्ञापन लगाए जाते थे, लेकिन पहली बार किसी ट्रेन के नाम में ही ब्रांड का नाम जोड़ा जा रहा है. बता दें कि तेजस एक्सप्रेस को 3 दिसंबर 2021 को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हरी झंडी दिखाई थी.
पूरी तरह वातानुकूलित ट्रेन
आईआरसीटीसी द्वारा संचालित यह पूरी तरह वातानुकूलित ट्रेन है. इसमें यात्रियों के लिए आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं. ट्रेन में खाने पीने की सेवाओं के साथ इंफोटेनमेंट की सुविधा भी दी जाती है. आईआरसीटीसी इस ट्रेन में ग्रुप बुकिंग की सुविधा भी देता है. इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉरपोरेशन (IRCTC) ने ट्रेन की ब्रांडिंग के विज्ञापन अधिकार स्प्राइट को दिए हैं.
‘स्प्राइट तेजस एक्सप्रेस’ के नाम से घोषित
इसके तहत ट्रेन नंबर 82501 और 82502 को 19 अगस्त से 11 नवंबर 2026 तक ‘स्प्राइट तेजस एक्सप्रेस’ के नाम से घोषित किया जाएगा. यह नाम ट्रेन के शुरुआती और रास्ते में आने वाले स्टेशनों पर भी इस्तेमाल किया जाएगा. रेलवे के लिए यह एक नया विज्ञापन मॉडल है. अब तक कंपनियां ट्रेनों के बाहर विज्ञापन या ब्रांडिंग कर सकती थीं, लेकिन ट्रेन का आधिकारिक नाम नहीं बदला जाता था. इस व्यवस्था में स्प्राइट का नाम तेजस एक्सप्रेस के साथ जोड़ दिया जाएगा.
यह व्यवस्था करीब 3 महीने तक लागू
यानी लखनऊ से दिल्ली और दिल्ली से लखनऊ के बीच चलने वाली इस ट्रेन की घोषणा कुछ समय के लिए ‘स्प्राइट तेजस एक्सप्रेस’ के तौर पर की जाएगी. यह व्यवस्था करीब 3 महीने तक लागू रहेगी. आईआरसीटीसी ने स्प्राइट को ट्रेन की ब्रांडिंग के विज्ञापन अधिकार 6 महीने की अवधि के लिए दिए हैं. इसके लिए लेटर ऑफ एक्सेप्टेंस के जरिए प्रक्रिया पूरी की गई है. हालांकि ट्रेन को करीब 3 महीने के लिए ही ‘स्प्राइट तेजस एक्सप्रेस’ के नाम से चलाने की घोषणा की गई है.
रास्ते में पड़ने वाले स्टेशनों पर भी इस्तेमाल
इस दौरान दोनों दिशाओं में ट्रेन के शुरुआती और रास्ते में पड़ने वाले स्टेशनों पर भी इसी ब्रांड नाम का इस्तेमाल किया जाएगा. लखनऊ दिल्ली तेजस एक्सप्रेस को देश की पहली निजी तौर पर संचालित ट्रेन के तौर पर पेश किया गया था. हालांकि, रेलवे के मुताबिक इसे पूरी तरह स्वतंत्र निजी ट्रेन समझना सही नहीं होगा. ट्रेन का संचालन आईआरसीटीसी करता है, लेकिन रेलवे ट्रैक और स्टेशनों समेत रेलवे के बुनियादी ढांचे का इस्तेमाल करने के लिए आईआरसीटीसी भारतीय रेलवे को भुगतान करता है. ट्रेन की ब्रांडिंग की यह व्यवस्था रेलवे के नियमित ट्रेन संचालन से अलग है.
अपना ब्रांड प्रदर्शित करने की अनुमति
इस मॉडल के तहत निजी कंपनियों को ट्रेन के बाहरी हिस्से और विज्ञापन के लिए तय दूसरी जगहों पर अपना ब्रांड प्रदर्शित करने की अनुमति मिलती है. रेलवे का ट्रैक, स्टेशन और बाकी बुनियादी ढांचा पहले की तरह भारतीय रेलवे के पास रहता है. स्प्राइट तेजस एक्सप्रेस के मामले में पहली बार विज्ञापन व्यवस्था को एक कदम आगे ले जाते हुए ब्रांड को ट्रेन के नाम के साथ जोड़ा गया है. इससे रेलवे और आईआरसीटीसी के लिए विज्ञापन से कमाई का एक नया रास्ता खुल सकता है.
पूरा एसी चेयर कार कोच भी बुक
तेजस एक्सप्रेस में पूरा एसी चेयर कार कोच भी बुक किया जा सकता है. एक कोच में 78 सीटें होती हैं. इसका इस्तेमाल कॉरपोरेट मीटिंग, शादी और दूसरे सामाजिक कार्यक्रमों के लिए ग्रुप बुकिंग में किया जा सकता है. अब स्प्राइट के साथ हुई ब्रांडिंग डील ने इस ट्रेन को एक और वजह से खास बना दिया है. यह देश की पहली ऐसी ट्रेन होगी जो आधिकारिक तौर पर किसी व्यावसायिक ब्रांड के नाम के साथ चलेगी.
विज्ञापन मॉडल में बदलाव की शुरुआत
स्प्राइट तेजस एक्सप्रेस की ब्रांडिंग से रेलवे के विज्ञापन मॉडल में बदलाव की शुरुआत हो सकती है. अगर यह प्रयोग सफल रहता है तो आने वाले समय में दूसरी कंपनियां भी ट्रेनों के नाम के साथ अपने ब्रांड जोड़ने में रुचि दिखा सकती हैं. इससे रेलवे और आईआरसीटीसी को अतिरिक्त विज्ञापन आय का रास्ता मिल सकता है. वहीं कंपनियों को ट्रेन और रेलवे स्टेशनों के जरिए बड़े ग्राहक वर्ग तक अपना ब्रांड पहुंचाने का नया माध्यम मिलेगा.
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