तमिलनाडु में किसकी सरकार? थलापति विजय की शपथ पर लगा ब्रेक, बहुमत साबित करने में असफल

Shivam
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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Thalapathy Vijay Majority Issue: तमिलनाडु की राजनीति में उस समय बड़ा मोड़ आ गया जब अभिनेता-राजनेता विजय और उनकी पार्टी तमिलगा वेट्री कझगम (टीवीके) का मुख्यमंत्री बनने का सपना अंतिम क्षणों में अधूरा रह गया. राज्यपाल आर.वी. अर्लेकर ने बहुमत के समर्थन पत्र पूरे न होने के कारण विजय को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाने से इनकार कर दिया. इस फैसले के बाद राज्य में सरकार गठन को लेकर अनिश्चितता और राजनीतिक हलचल तेज हो गई है.

अब तक क्या हुआ?

तमिलगा वेट्री कझगम ने विधानसभा चुनाव में 108 सीटें जीतकर मजबूत स्थिति बनाई थी. इसके बाद विजय ने दावा किया कि उन्हें कुल 118 विधायकों का समर्थन प्राप्त है, जो सरकार बनाने के लिए जरूरी आंकड़ा है. हालांकि, राज्यपाल कार्यालय के सूत्रों के अनुसार विजय के पास केवल 116 विधायकों का ही लिखित समर्थन मौजूद था. राज्यपाल ने स्पष्ट कर दिया कि 118 विधायकों के समर्थन पत्र के बिना सरकार बनाने का निमंत्रण नहीं दिया जा सकता.

सहयोगी दलों ने पीछे खींचे कदम

सरकार गठन की प्रक्रिया के बीच टीवीके को बड़ा झटका तब लगा, जब संभावित सहयोगी दलों ने समर्थन देने से इनकार कर दिया. इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) और टीटीवी दिनाकरन की पार्टी एएमएमके ने अलग-अलग पत्र जारी कर टीवीके के नेतृत्व वाले गठबंधन से दूरी बना ली. एएमएमके ने राज्यपाल को पत्र लिखकर यह भी आग्रह किया कि एआईएडीएमके को सरकार बनाने का अवसर दिया जाए.

मुलाकात के बाद बदला समीकरण

शुक्रवार को विजय ने राज्यपाल से मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा पेश किया था. लेकिन कुछ ही घंटों के भीतर राजनीतिक समीकरण बदल गए और सहयोगी दलों के पीछे हटने से उनका दावा कमजोर पड़ गया. इसके चलते बहुमत का आंकड़ा पूरा नहीं हो सका.

बाहर से समर्थन, लेकिन संख्या अधूरी

वामपंथी दलों सीपीआई और सीपीएम ने टीवीके सरकार को बाहर से समर्थन देने की घोषणा की है, लेकिन वे मंत्रिमंडल में शामिल नहीं होंगे. इसके अलावा कांग्रेस के पांच विधायकों का समर्थन भी विजय को मिला, फिर भी कुल संख्या 118 तक नहीं पहुंच सकी, जो सरकार बनाने के लिए जरूरी थी.

टीवीके की प्रतिक्रिया

टीवीके विधायक मैरी विल्सन ने कहा, “विजय न सिर्फ पांच साल बल्कि आने वाले समय में भी मुख्यमंत्री रहेंगे. हमें पूरा भरोसा है. आज देर रात तक कोई अच्छी खबर मिल सकती है.” सूत्रों के अनुसार, पार्टी अब इस मामले को लेकर अदालत का रुख भी कर सकती है.

राज्यपाल का सख्त रुख

राज्यपाल ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि केवल 113 या 116 विधायकों के समर्थन के आधार पर सरकार नहीं चलाई जा सकती. उन्होंने यह भी दोहराया कि जब तक पूर्ण बहुमत के लिखित समर्थन पत्र नहीं दिए जाते, तब तक कोई संवैधानिक प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई जाएगी.

अभी की स्थिति

तमिलनाडु में फिलहाल सरकार गठन को लेकर स्थिति पूरी तरह अनिश्चित बनी हुई है. सभी की नजरें अब राज्यपाल के अगले कदम पर टिकी हैं, वहीं राजनीतिक दलों के बीच जोड़-तोड़ और संभावित अदालती लड़ाई की भी चर्चा तेज हो गई है.

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