त्र्यंबकेश्वर में वर्षो बाद हुए दुर्लभ दर्शन, 65 फीट गहरे अमृतकुंड में दिखा प्राचीन शिवलिंग

Aarti Kushwaha
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

Trimbakeshwar Shivling: प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंगों में से एक, श्री त्र्यंबकेश्वर मंदिर परिसर से एक बेहद अद्भुत और ऐतिहासिक नजारा देखने को मिला, दरअसल कई वर्षो बाद श्री त्र्यंबकेश्वर महादेव मंदिर परिसर में स्थित ऐतिहासिक अमृतकुंड के तल में एक शिवलिंग के दर्शन हुए. भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ASI द्वारा संरक्षण कार्य के तहत अमृतकुंड का पानी निकालकर उसकी सफाई की गई. इस दौरान कुंड के तल में मौजूद शिवलिंग स्पष्ट रूप से दिखाई दिया, जिसके बाद श्रद्धालुओं और मंदिर प्रशासन में भारी उत्साह है.

65 फीट गहरा ‘अमृतकुंड’

65 फीट गहरा यह अमृतकुंड पेशवा कालीन माना जाता है. इसका धार्मिक महत्व अत्यधिक है क्योंकि इसी अमृतकुंड के पवित्र जल का उपयोग श्री त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग की नियमित पूजा और अभिषेक के लिए किया जाता है.

हालांकि सुरक्षा कारणों के मद्देनजर आम श्रद्धालुओं को अमृतकुंड में प्रवेश करने की अनुमति नहीं है. इस क्षेत्र को बेहद सुरक्षित रखा जाता है. वहीं, बरसों बाद हुए इस दुर्लभ और अलौकिक दर्शन ने इस दुर्लभ दर्शन ने मंदिर प्रशासन और अधिकारियों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है.

त्र्यंबकेश्वर मंदिर का इतिहास

बता दें कि ‘त्र्यंबक’ शब्द का अर्थ तीन देवता- ब्रह्मा, विष्णु और महेश से होता है. महाराष्ट्र के नासिक शहर से करीब 28 किलोमीटर दूर त्र्यंबकेश्वर महादेव का प्रसिद्ध हिंदू मंदिर स्थित है. इसे भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक माना जाता है. वहीं, मंदिर के पास ब्रह्मगिरि पर्वत है, जिसे पवित्र गंगा नदी का उद्गम स्थान माना जाता है. इसके अलावा यहां एक कुशावर्त कुंड नाम का पवित्र तालाब भी है,जिसका निर्माण श्रीमंत सरदार रावसाहेब पार्नेकर ने करवाया था, जिन्हें इंदौर के फड़णवीस के रूप में जाना जाता था. वहीं वर्तमान त्र्यंबकेश्वर मंदिर का निर्माण श्रीमंत नानासाहेब पेशवा ने 1755 से 1786 के बीच कराया था. यह मंदिर ब्रह्मगिरि पर्वत की तलहटी में स्थित है.

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