Lucknow: भाजपा रविवार को होने वाले योगी आदित्यनाथ सरकार के कैबिनेट विस्तार में जातीय संतुलन बनाने पर जोर दे रही है. इसी क्रम में उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले की खागा विधानसभा सीट से भाजपा से आने वाली दलित विधायक कृष्णा पासवान को राज्य मंत्री का पद मिल सकता है. कृष्णा पासवान की नियुक्ति से भाजपा को फतेहपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र में दलित वोट बैंक को और मजबूत करने में मदद मिलेगी.
संयुक्त समिति की सभापति
बता दें कि कृष्णा पासवान वर्तमान में उत्तर प्रदेश विधानसभा की महिला एवं बाल विकास संबंधी संयुक्त समिति की सभापति भी हैं. इसके अलावा नारी शक्ति वंदन बिल संबधित संविधान संशोधन प्रस्ताव लोकसभा में गिरने के बाद योगी सरकार महिला विधायक को मौका देकर बनाकर विपक्ष को घेरने की रणनीति भी बना रही है. कृष्णा पासवान का जन्म 1 अगस्त 1963 को फतेहपुर जिले के पिलखिनी गांव में हुआ.
मुख्य रूप से कृषि कार्य से जुड़ी
वे 10वीं पास हैं और मुख्य रूप से कृषि कार्य से जुड़ी हैं. राजनीति में प्रवेश से पहले उन्होंने आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के रूप में काम किया और संघर्षपूर्ण जीवन से आगे बढ़कर जनप्रतिनिधि बनीं. वे खागा विधानसभा क्षेत्र से लगातार मजबूत पकड़ रखती हैं. उन्होंने 2002, 2012 और 2022 में इस सीट से चुनाव जीता. 2022 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार को करीब 5500 वोटों के अंतर से हराया.
भाजपा की वरिष्ठ कार्यकर्ता
कृष्णा पासवान भाजपा की वरिष्ठ कार्यकर्ता मानी जाती हैं और क्षेत्र में विकास कार्योंए खासकर महिलाओं एवं दलित समुदाय के मुद्दों पर सक्रिय रहती हैं. हाल ही में उन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख दिखाते हुए खागा क्षेत्र में एक घटिया गुणवत्ता वाली सड़क को खुद फावड़े से खोदकर पोल खोली थी, जिसकी काफी चर्चा हुई.
जातीय और क्षेत्रीय समीकरण
2027 विधानसभा चुनावों को देखते हुए योगी सरकार कैबिनेट विस्तार के जरिए विभिन्न जातीय और क्षेत्रीय समीकरण साध रही है. कृष्णा पासवान का नाम राज्य मंत्री पद के लिए सबसे चर्चित चेहरों में शामिल है. उनका अनुभव और क्षेत्र में लोकप्रियता उन्हें इस पद के लिए मजबूत दावेदार बनाती है. वे अपने क्षेत्र के विकास, भ्रष्टाचार मुक्त कार्य व्यवस्था और महिला सशक्तिकरण पर हमेशा जोर देती रही हैं.
इसे भी पढ़ें. असम में फिर हिमंत बिस्वा सरमा का राज: तीसरी बार लेंगे मुख्यमंत्री पद की शपथ

