Divya morari bapu

दूसरों को सुख और संतोष देना ही है प्रभु की पूजा: दिव्‍य मोरारी बापू

पुष्‍कर/राजस्‍थान: परम पूज्‍य संत श्री दिव्‍य मोरारी बापू ने कहा, आपको सुखी होना है? तो सबमें परमात्मा के दर्शन करके दूसरों को सुख और संतोष दो. दूसरों को संतोष देना ही प्रभु की पूजा है. कितने ही लोगों को...

प्रभु ने उनके द्वारा बनाये हुए संसार को सुखी करने के लिये किया मानव का सृजन: दिव्य मोरारी बापू 

Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, इस संसार की रचना करने के बाद खुद प्रभु को चिंता हुई कि इस संसार को सुखी कौन करेगा? प्रभु ने बड़े-बड़े देव तथा ऋषियों से पूँछा कि क्या...

सम्पूर्ण प्रकृति की सेवा करने के लिए प्रभु ने हमें दिया है यह शरीर: दिव्य मोरारी बापू 

Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, यह शरीर जीवात्मा का घर है। यह प्रभु का दिया हुआ है, तो भी इसके मालिक बनने का बहुत लोग दावा करते हैं। मां कहती है, शरीर को मैंने...

जिसकी आंखें देह में रहते हुए देव को देख सकती हैं, वही कर सकता है परोपकार: दिव्य मोरारी बापू 

Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, देव को लेकर ही देह की शोभा है। देह में से देव के चले जाने पर, जो लोग आइये-आइये कहकर बुलाते थे, वही लोग देह को घर से बाहर...

व्यवहार में पाप न हो, इसलिए घर के लोगों में भगवान को देखने की रखनी चाहिए भावना: दिव्य मोरारी बापू 

Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, जिसे सबमें भगवान के दर्शन करने की कला सीखनी हो, उसे सबसे पहले मूर्ति में भगवान को देखने की आदत डालनी चाहिए। पीछे घर के लोगों में भगवान को...

जीवन-मरण सुधारना है तो परमात्मा के साथ जोड़ो सम्बन्ध: दिव्य मोरारी बापू 

Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, भगवत्भक्ति- भगवत्प्रेम जब बढ़ता है, तब जगत भी भुला जाता है, ' अहम् ' भी भुला जाता है और सिर्फ भगवान ही याद रहते हैं। ऐसी स्थिति पर पहुँचने...

श्रीरणछोड़ दास जी महाराज श्रीपयहारीजी के प्रति रखते थे गुरु भाव: दिव्य मोरारी बापू 

Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, गुरुतत्व की महिमा- श्रीनाभागोस्वामीजी ने श्रीभक्तमालजी में गुरु जी की परिभाषा सबसे पीछे किया। क्यों कि गुरु का अर्थ होता है भारी, वजनदार। गुरुतत्व वो तत्व है, जिसके सामने...

भक्त, भक्ति, भगवन्त और गुरु इन चारों तत्वों की करनी चाहिए उपासना: दिव्य मोरारी बापू 

Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, भक्त भक्ति भगवन्त गुरु चतुर नाम वपु एक। तिनके पद वंदन किये नासै विघ्न अनेक।। श्रीभक्तमाल जी में श्रीनाभागोस्वामीजी कह रहे हैं कि- यह चार तत्व हैं। भक्त, भक्ति, भगवन्त...

जो भगवान के अस्तित्व को प्रकट करते हैं, उन्हीं को कहा जाता है संत: दिव्य मोरारी बापू 

Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, भगवत प्राप्ति की इच्छा क्यों उत्पन्न नहीं हो रही है? कथा भी सुन रहे हैं, सेवा भी कर रहे हैं, फिर भी क्या कारण है जो भगवान के दर्शन...

भगवत प्राप्ति की उत्कट अभिलाषा ही है भगवत दर्शन का मूल्य: दिव्य मोरारी बापू 

Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, मनुष्य जन्म का फल है, भगवत प्राप्ति, भगवत साक्षात्कार, भगवत दर्शन, यही मनुष्य जन्म का फल है। भगवत प्राप्ति कैसे हो? प्राप्ति का मूल्य क्या है? प्राप्ति का मूल्य...
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