Industrial Growth: फरवरी में 5.2% तक बढ़ी औद्योगिक वृद्धि, मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर बना सबसे बड़ा सहारा

Shivam
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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Industrial Growth: भारत की अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत देने वाली खबर सामने आई है. औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) के आधार पर देश की औद्योगिक वृद्धि फरवरी 2026 में बढ़कर 5.2% हो गई है, जो जनवरी में 4.8% थी. यह बढ़ोतरी दिखाती है कि देश में उत्पादन गतिविधियां धीरे-धीरे रफ्तार पकड़ रही हैं और आर्थिक गतिविधियों में मजबूती आ रही है. सांख्यिकी मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, इस बढ़ोतरी के पीछे सबसे बड़ा योगदान मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का रहा है, जिसने उत्पादन और मांग दोनों में मजबूत प्रदर्शन किया है.

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मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर बना ग्रोथ का मुख्य इंजन

औद्योगिक उत्पादन में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की हिस्सेदारी लगभग तीन-चौथाई होती है, इसलिए इसकी स्थिति पूरे इंडस्ट्रियल ग्रोथ को प्रभावित करती है. फरवरी 2026 में इस सेक्टर ने सालाना आधार पर 6% की वृद्धि दर्ज की, जो यह दर्शाता है कि फैक्ट्रियों में उत्पादन बढ़ रहा है और उद्योगों में गतिविधियां तेज हो रही हैं. यह वृद्धि केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर रोजगार पर भी पड़ता है. मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर देश के इंजीनियरिंग और तकनीकी संस्थानों से निकलने वाले युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा करता है.

23 में से 14 उद्योग समूहों में पॉजिटिव ग्रोथ

मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के भीतर भी सुधार व्यापक स्तर पर देखने को मिला है. फरवरी 2026 में कुल 23 उद्योग समूहों में से 14 ने फरवरी 2025 की तुलना में सकारात्मक वृद्धि दर्ज की. यह इस बात का संकेत है कि औद्योगिक विकास केवल कुछ चुनिंदा क्षेत्रों तक सीमित नहीं है, बल्कि अलग-अलग उद्योगों में समान रूप से सुधार हो रहा है.

इन सेक्टर्स ने दी सबसे ज्यादा ताकत

फरवरी में औद्योगिक वृद्धि को सबसे ज्यादा मजबूती तीन प्रमुख क्षेत्रों से मिली:

  • बुनियादी धातु (इस्पात उत्पाद सहित)
  • मोटर वाहन
  • मशीनरी एवं उपकरण (ट्रैक्टर सहित)

इन तीनों सेक्टर्स में दोहरे अंकों की वृद्धि दर्ज की गई, जो यह दर्शाती है कि देश में इंफ्रास्ट्रक्चर, ऑटोमोबाइल और औद्योगिक उपकरणों की मांग तेजी से बढ़ रही है.

खनन और बिजली क्षेत्र में भी सुधार

मैन्युफैक्चरिंग के अलावा अन्य प्रमुख क्षेत्रों में भी सकारात्मक वृद्धि दर्ज की गई है. फरवरी में खनन क्षेत्र में 3.1% की वृद्धि हुई, जबकि बिजली उत्पादन में 2.3% की बढ़ोतरी देखी गई. ये दोनों सेक्टर औद्योगिक गतिविधियों के लिए आधार का काम करते हैं, इसलिए इनमें सुधार का मतलब है कि आने वाले समय में उत्पादन गतिविधियां और बढ़ सकती हैं.

कैपिटल गुड्स में 12.5% उछाल

उपयोग-आधारित वर्गीकरण के आंकड़ों के अनुसार, फरवरी में पूंजीगत वस्तुओं (Capital Goods) के उत्पादन में 12.5% की तेज वृद्धि दर्ज की गई. इस श्रेणी में वे मशीनें और उपकरण शामिल होते हैं, जो फैक्ट्रियों में उत्पादन के लिए उपयोग किए जाते हैं. इसका सीधा मतलब है कि उद्योगों में निवेश बढ़ रहा है. जब कंपनियां नई मशीनें खरीदती हैं और उत्पादन क्षमता बढ़ाती हैं, तो इससे आगे चलकर रोजगार और आय दोनों में वृद्धि होती है.

उपभोक्ता वस्तुओं की मांग में तेजी

फरवरी के दौरान इलेक्ट्रॉनिक सामान, रेफ्रिजरेटर और टीवी जैसी उपभोक्ता वस्तुओं के उत्पादन में 7.3% की वृद्धि हुई. यह इस बात का संकेत है कि लोगों की आय में सुधार हो रहा है और वे ज्यादा खर्च कर रहे हैं. उपभोक्ता मांग में वृद्धि किसी भी अर्थव्यवस्था के लिए एक मजबूत संकेत मानी जाती है.

इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में 11.5% की जबरदस्त ग्रोथ

सरकार द्वारा बड़े पैमाने पर किए जा रहे निवेश का असर इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में साफ दिखाई दे रहा है. राजमार्ग, बंदरगाह और रेलवे परियोजनाओं में बढ़ते निवेश के कारण अवसंरचना और निर्माण सामग्री क्षेत्र में फरवरी के दौरान 11.5% की मजबूत दोहरे अंकों की वृद्धि दर्ज की गई. यह सेक्टर न केवल आर्थिक गतिविधियों को बढ़ाता है, बल्कि बड़े पैमाने पर रोजगार भी पैदा करता है और देश की समग्र विकास दर को गति देता है.

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