Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, श्रीमद्भागवत महापुराण वेदरूपी कल्पवृक्ष का परिपक्व फल है। जिसमें गुठली, छिलका जैसा कुछ त्याज्य नहीं है, भक्ति रस से परिपूर्ण है। अतः भक्तों को यह रस जीवन भर पीते...
राजस्थान के पुष्कर में संत दिव्य मोरारी बापू ने प्रवचन देते हुए कहा कि केवल ज्ञान की बातें करने से शांति नहीं मिलती, बल्कि उसे जीवन में अपनाने से ही सच्चा आनंद मिलता है.
पुष्कर में संत दिव्य मोरारी बापू ने प्रवचन देते हुए कहा कि सच्ची नम्रता और निरंतर भक्ति से ही भगवान की कृपा प्राप्त होती है. अभिमान से भक्ति का मार्ग कमजोर हो जाता है.