Pradosh Vrat Puja Vidhi: कल रखा जाएगा शुक्र प्रदोष व्रत, जानिए पूजा का शुभ मुहूर्त, विधि और महत्व

Shivam
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Pradosh Vrat Puja Vidhi: सनातन धर्म में प्रदोष व्रत को भगवान शिव की उपासना के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है. यह व्रत प्रत्येक माह कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है. मान्यता है कि प्रदोष काल में भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा करने और व्रत रखने से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं तथा जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का आगमन होता है. ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर इस बार शुक्र प्रदोष व्रत रखा जाएगा. शुक्रवार को पड़ने के कारण इसे शुक्र प्रदोष व्रत कहा जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन प्रदोष काल में की गई शिव आराधना विशेष फल प्रदान करने वाली मानी जाती है.

क्या है प्रदोष व्रत का महत्व?

प्रदोष शब्द का अर्थ संध्याकाल या गोधूलि बेला से है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार प्रदोष काल में भगवान शिव ने तांडव नृत्य किया था. यही कारण है कि इस समय की गई पूजा को अत्यंत शुभ माना जाता है. मान्यता है कि प्रदोष व्रत रखने और भगवान शिव की आराधना करने से पापों का नाश होता है तथा जीवन में आने वाली अनेक बाधाओं और आर्थिक परेशानियों से राहत मिल सकती है. यही वजह है कि शिव भक्त इस व्रत को विशेष श्रद्धा और भक्ति के साथ करते हैं.

शुक्र प्रदोष व्रत का शुभ मुहूर्त

पंचांग के अनुसार कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 12 जून 2026 को शाम लगभग 7 बजकर 36 मिनट पर प्रारंभ होगी और 13 जून को शाम 4 बजकर 07 मिनट तक रहेगी. प्रदोष व्रत की मुख्य पूजा प्रदोष काल में की जाएगी. पूजा का शुभ समय शाम 7 बजकर 36 मिनट से रात 9 बजकर 20 मिनट तक माना गया है. इस दौरान शिवलिंग का अभिषेक और पूजा-अर्चना करना शुभ माना गया है.

ऐसे लें व्रत का संकल्प

व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र धारण करें. इसके बाद भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा कर व्रत का संकल्प लें. व्रत के दौरान श्रद्धालु अपनी क्षमता के अनुसार निर्जला या फलाहार व्रत रख सकते हैं. दिनभर भगवान शिव का ध्यान, मंत्र जाप और भक्ति करना शुभ माना जाता है.

प्रदोष व्रत पूजा विधि

प्रदोष काल में पूजा के लिए सूर्यास्त के बाद दोबारा स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें. इसके बाद शिवलिंग का गंगाजल, दूध, दही, घी, शहद और पंचामृत से अभिषेक करें. अभिषेक के बाद भगवान शिव को बेलपत्र, धतूरा, भांग, चंदन, पुष्प, धूप और दीप अर्पित करें. पूजा के दौरान प्रदोष व्रत कथा का पाठ करें और अंत में भगवान शिव की आरती करें. श्रद्धा और भक्ति के साथ की गई पूजा को विशेष फलदायी माना गया है.

पुरुषोत्तम मास में विष्णु पूजा का भी है महत्व

इस वर्ष शुक्र प्रदोष व्रत पुरुषोत्तम मास में पड़ रहा है. इसलिए भगवान विष्णु और उनके आठवें अवतार श्रीकृष्ण की पूजा का भी विशेष महत्व बताया गया है. पूजा के समय विष्णु सहस्रनाम का पाठ और ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप किया जा सकता है. मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव और भगवान विष्णु दोनों की आराधना करने से व्रत का पुण्य कई गुना बढ़ जाता है.

(Disclaimer: इस लेख में दी गई सामान्य मान्यताओं और ज्योतिष गणनाओं पर आधारित है. The Printlines इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

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