ईरान ही नहीं, तालिबान में भी सत्‍ता गिरने का डर! कौन बन रहा अखुंदजादा की बड़ी मुसीबत?

Aarti Kushwaha
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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Afghanistan: इस समय में एक ओर ईरान में जहां विरोध प्रदर्शनों के चलते सरकार गिरने की आशंका बनी हुई है, वहीं, दूसरी ओर अब अफगानिस्तान में तालिबानी सरकार को भी सत्‍तापलट का डर सता रहा है. दरअसल, हाल ही में सरकार में आंतरिक बहस छिड़ गई है. दो गुट बन गए हैं. इस बढ़ती दरार के चलते तालिबानी शासन को अब गिरने का डर सता रहा है.

बता दें कि अफगानिस्तान का तालिबानी शासन इस समय गंभीर अंदरूनी मतभेदों का सामना कर रही है. सरकार अब दो विरोधी गुटों में बंटी हुई नजर आ रही है. एक तरफ कंधार में बैठे कट्टरपंथी नेता हैं, तो दूसरी तरफ काबुल में मौजूद प्रैगमैटिक नेता हैं. सरकार में दो ग्रुप बन गए हैं.

सरकार के लिए खतरा बनी सकती है अंदरूनी मतभेद

इसी बीच, तालिबान प्रमुख हिबतुल्लाह अखुंदजादा की एक ऑडियो लीक हुई है जिसमें इन अंदरूनी मतभेदों का खुलासा हुआ. अखुंदजादा ने लीक ऑडियो में चेतावनी दी है कि यह अंदरूनी फूट सरकार के लिए खतरा बन सकती है. उन्होंने चेतावनी दी, इन अंदरूनी मतभेदों के कारण अमीरात ढह जाएगा और उसका अंत हो जाएगा.

विचारों को लेकर टकराव

अखुंदजादा के नेतृत्‍व वाली कंधार गुट एक सख्त इस्लामी राज्य चाहता है. यह गुट महिलाओं की शिक्षा और नौकरियों का विरोध करता है और इंटरनेट समेत आधुनिक तकनीक पर कड़े प्रतिबंध लगाना चाहता है. वहीं, इसी गुट के पास सुरक्षा बलों और हथियारों के वितरण का कंट्रोल है, जिससे सत्ता काबुल से हटकर कंधार में केंद्रित होती जा रही है.

वहीं, इसके विपरीत काबुल गुट- जिसमें गृह मंत्री सिराजुद्दीन हक्कानी, रक्षा मंत्री मुल्ला याकूब और उप प्रधानमंत्री अब्दुल गनी बरादर शामिल हैं- आर्थिक सहयोग और सीमित आधुनिकीकरण के पक्ष में है. यह गुट व्यापार, अंतरराष्ट्रीय संबंधों और महिलाओं की सीमित शिक्षा का समर्थन करता है. उनके अनुसार, शासन चलाने और कारोबार के लिए इंटरनेट बेहद जरूरी है.

इंटरनेट बंद करने पर बढ़ा विवाद

जानकारों का कहना है कि तनाव सितंबर 2025 में ज्यादा बढ़ गया, जब अखुंदजादा ने पूरे देश में इंटरनेट बंद करने का आदेश दिया, जिसका काबुल के अधिकारियों ने विरोध किया और 3 दिन बाद इंटरनेट सेवाएं बहाल कर दी गईं. हालांकि एक्‍सपर्ट्स का मानना है कि यह तालिबान शासन के दौर में अंदरूनी बगावत का एक उदाहरण था. फिलहाल दोनों गुटों के बीच वैचारिक टकराव जारी है, जो उनके बयानों और फैसलों में सामने आ रहा है.

बदली अखुंदजादा की लीडरशिप

बता दें कि अखुंदजादा का नेतृत्व 2016 में सत्ता संभालने के बाद बदल गया है. पहले वो ऐसे नेता माने जाते थे जो सबकी राय लेता था, लेकिन अब उन्होंने सत्ता अपने हाथ में केंद्रित कर ली है और अपने आस-पास केवल कट्टरपंथियों को रखा है. वहीं, सितंबर 2025 में उन्होंने इंटरनेट बंद कर दिया था, लेकिन बाद में काबुल गुट ने इसे फिर से चालू करवा दिया और यही कदम कंधार और काबुल गुट के बीच सत्ता संघर्ष को दिखाता है.

तालिबान में ऐसा विरोध आम नहीं है, क्योंकि यह संगठन हमेशा सख्त नियमों और आदेशों के पालन के लिए जाना जाता है. काबुल गुट ने इंटरनेट चालू कर दिखाया कि वो शासन और व्यापार के लिए इसकी जरूरत समझते हैं.

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