एशियन गेम्स 2026 में दिखी बदइंतजामी, भारतीय एथलीट्स को 15 घंटे इंतजार के बाद मिला कमरा

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New Delhi: एशियन गेम्स 2026 में अब नए विवाद में फंसता नजर आ रहा है. नगोया में खेले जाने वाले एशियन गेम्स में भारतीय खिलाड़ियों को 14 घंटे से ज्यादा समय तक भूखे-प्यासे रहना पड़ा. न ठहरने के लिए कमरे की व्यवस्था थी और न आराम करने के लिए बिस्तर. 10 घंटे से ज्यादा की थकाऊ हवाई यात्रा (साढ़े तीन घंटे का स्टॉपओवर) के बाद जब भारतीय खिलाड़ी बुधवार सुबह जापान के नागोया पहुंचे तो वहां की व्यवस्था देखकर सभी को निराशा मिली.

थलीट्स को जैसे-तैसे रहने की जगह मिल पाई

शहर में खड़े क्रूज शिप पर कमरे मिलने का इंतजार हर घंटे बढ़ता गया. स्थानीय अधिकारियों से भी कोई खास मदद नहीं कर रहे थे. जिन एथलीट्स को जैसे-तैसे रहने की जगह मिल पाई, उन्हें भी आपस में सुविधाएं शेयर करनी पड़ीं. आयोजन समिति ने दूसरे देशों की टीमों को भी कमरे दे दिए थे. शायद वहां पहुंचने वाले खिलाड़ियों की संख्या का गलत अंदाजा लगाने की वजह से ऐसा हुआ.

कुछ ही लोगों को कमरे मिले

भारतीय रोइंग टीम ने अपनी आपबीती सुनाई. 30 सदस्यों वाली रोइंग टीम के साथ जापान गए एक खिलाड़ी ने बताया कि हम सुबह करीब 9 बजे (JST) उस जगह पहुंचे और अभी रात के 8:30 बज रहे हैं, लेकिन हममें से कुछ ही लोगों को कमरे मिले हैं. जिन लोगों को कमरे मिले, उनसे भी कहा गया कि वे और एथलीटों को अपने साथ रखें. ऐसा लगता है कि आयोजकों ने एथलीटों की संख्या का गलत अंदाजा लगाया है.

जगह किसी और ने ले ली

सिर्फ रोअर ही नहीं बल्कि भारतीय निशानेबाजों और देश की कुछ और टीमों को भी ऐसी ही स्थिति का सामना करना पड़ा. असल में निशानेबाजों को एक अलग होटल में चेक-इन करना पड़ा क्योंकि जिस जगह उन्हें ठहराया जाना था, वह जगह किसी और ने ले ली थी. भारतीय ओलंपिक संघ के कुछ सदस्यों को भी आनन-फानन में पास के होटल में ले जाना पड़ा और फिलहाल मेडिकल टीम को भी उनके साथ ही ठहराना पड़ा. गौरतलब है कि IOA अधिकारी भी टीम का हिस्सा हैं और उन्हें गेम्स विलेज में ही ठहरना था.

जहाज़ लगभग 3,000 मीटर लंबा

आयोजक समिति के अनुसार लगभग 4,000 एथलीटों और अधिकारियों को ‘कोस्टा सेरेना’ नाम के जहाज़ पर ठहराया जाना है. यह जहाज़ लगभग 3,000 मीटर लंबा है और इसमें 1,500 केबिन हैं. इसके अलावा, लागत कम करने के लिए प्रतिभागियों को लकड़ी के कंटेनर-जैसे केबिन और स्टैंडर्ड होटल के कमरों में भी ठहराया जाएगा.

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