बांग्लादेश: राजनीतिक विवादों में फंसी BNP की नई सरकार! जमात ने रोकी शपथ, किया बड़ा दावा?

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Dhaka: बांग्लादेश में नई सरकार बनने से पहले ही विवाद शुरू हो गया है. मौजूदा टकराव से साफ है कि बांग्लादेश की नई संसद की शुरुआत ही संवैधानिक विवादों के साये में हो रही है. दरअसल, बांग्लादेश के 13वें संसदीय चुनाव में जीत दर्ज करने के बाद भी जमात-ए-इस्लामी और BNP के बीच शपथ ग्रहण को लेकर टकराव देखने को मिला.

दूसरी शपथ लेने से इनकार

मंगलवार को बांग्लादेश की दक्षिणपंथी पार्टी जमात-ए-इस्लामी के नए निर्वाचित सांसदों ने संविधान सुधार परिषद के सदस्य के रूप में दूसरी शपथ लेने से इनकार कर दिया. जमात के उप प्रमुख अब्दुल्ला मुहम्मद ताहिर ने कहा कि जब तक BNP सांसद संविधान सुधार परिषद के सदस्य के रूप में शपथ नहीं लेते, हम शपथ नहीं लेंगे.

सांसदों को बाध्य करने का उद्देश्य

संसद बिना संविधान सुधार के अर्थहीन है. दूसरी शपथ जुलाई चार्टर के तहत संविधान में व्यापक सुधार लागू करने के लिए सांसदों को बाध्य करने का उद्देश्य रखती है. इस चार्टर के 84 बिंदुओं को जनमत संग्रह के माध्यम से मतदान के लिए रखा गया था, जिसमें 60% से अधिक मतदाताओं ने हां का समर्थन किया.

सदस्य के रूप में नहीं चुना

मंगलवार को मुख्य निर्वाचन आयुक्त AMM Nasir Uddin ने संसद भवन Jatiya Sangsad में BNP सांसदों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई. इसके बाद जमात-ए-इस्लामी के सांसदों की शपथ होनी थी, लेकिन BNP के फैसले के चलते स्थिति जटिल हो गई. वहीं BNP की नीति-निर्धारण स्थायी समिति के सदस्य और नवनिर्वाचित सांसद Salahuddin Ahmed ने शपथ ग्रहण से पहले पार्टी सांसदों से कहा कि उन्हें संविधान सुधार परिषद के सदस्य के रूप में नहीं चुना गया है और अभी तक इस परिषद से जुड़ा कोई भी प्रावधान संविधान का हिस्सा नहीं है.

कोई भी नहीं लेगा दूसरी शपथ

पार्टी अध्यक्ष Tarique Rahman की मौजूदगी में उन्होंने दो टूक कहा कि हममें से कोई भी दूसरी शपथ नहीं लेगा. अपदस्थ पूर्व प्रधानमंत्री Sheikh Hasina की पार्टी अवामी लीग के चुनाव से बाहर रहने के बाद हुए 13वें संसदीय चुनाव में BNP ने 297 में से 209 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया, जबकि जमात-ए-इस्लामी को 68 सीटें मिलीं.

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