China: चीन अपने नागरिकों पर पहले से ही कैमरों, मोबाइल सिग्नलों और राष्ट्रीय पहचान रिकॉर्ड के विशाल नेटवर्क के जरिए नजर रखता है. लेकिन अब एक नई रिपोर्ट से पता चला है कि यह सर्विलांस केवल चीनी नागरिकों तक सीमित नहीं है, बल्कि चीन में रहने वाले विदेशी लोग भी इसकी जद में हैं.
दरअसल, विदेशी पत्रकार के तौर पर कई साल चीन में काम कर चुके मार्क होफर ज्यादातर समय इंटरनेट पर यह पता लगाने में बिताते हैं कि चीन अपने लोगों पर किस तरह नजर रखता है. लेकिन इस साल की शुरुआत में उन्हें एक ऐसा झटका लगा, जिसकी उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की थी.
दरअसल, उन्हें ‘डायनेमिक कंट्रोल प्लेटफॉर्म फॉर ओवरसीज पर्सनल’ नाम के एक वेबसाइट पर अपनी ही तस्वीर दिखी, जहां उनका पासपोर्ट नंबर और वह मोबाइल नंबर भी मौजूद था, जिसका इस्तेमाल उन्होंने चीन में रहने के दौरान किया था. मार्क होफर ने बताया कि यह सिस्टम उन्हें साइंस फिक्शन फिल्म ‘माइनॉरिटी रिपोर्ट’ की याद दिलाता है. यह प्लेटफॉर्म उत्तरी चीन के शहर झांगजियाकौ में रहने वाले विदेशियों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए बनाया गया था.
इन देशो के नागरिक और पत्रकार शामिल
साइबर सुरक्षा रिसर्चर्स की खोज से पता चला कि इस सिस्टम में झांगजियाकौ में रहने वाले 700 से ज्यादा विदेशियों और कुल मिलाकर लगभग 12 हजार रिकॉर्ड मौजूद थे. इनमें वांटेड लोगों, हांगकांग और ताइवान के निवासियों के अलावा 300 से ज्यादा विदेशी पत्रकारों के नाम भी शामिल थे. वहीं, इनमें कई पत्रकार ऐसे थे, जो कभी झांगजियाकौ गए ही नहीं थे.
मार्क होफर ने बताया कि यह कोई स्टूडेंट प्रोजेक्ट या शौकिया लोगों का बनाया गया डेमो नहीं, बल्कि सिस्टम में मौजूद सभी जानकारी असली थी. उन्होंने यह भी देखा कि हाल के लॉग-इन रिकॉर्ड में झांगजियाकौ और उसके बाहर के कई पुलिस स्टेशनों के नाम दर्ज थे. जनवरी में यह जानकारी मिलने के बाद होफर ने जितना संभव हो सका, उतना डेटा डाउनलोड कर लिया. हालांकि मई तक पूरी वेबसाइट गायब हो चुकी थी.
पुलिस विभागों को रोबोट और निगरानी उपकरण बेचती है कंपनी
खास बात ये है कि न्यूयॉर्क टाइम्स को इस प्लेटफॉर्म और बीजिंग की कंपनी ओरिजिन डायनेमिक के बीच संबंधों के सबूत मिले. दरअसल, यह कंपनी पुलिस विभागों को रोबोट और निगरानी उपकरण बेचती है. सार्वजनिक दस्तावेजों के अनुसार, कंपनी ने साल 2023 में एक ऐसे ही सिस्टम का पेटेंट भी कराया था, जिसे उसने गैर-चीनी नागरिकों के लिए इन्फॉर्मेशन इंटरफेस बताया था. हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि पुलिस इस डेटाबेस का इस्तेमाल कैसे करती थी, लेकिन इसके अस्तित्व से यह पता चलता है कि चीनी अधिकारी विदेशियों की रोजमर्रा की जिंदगी पर नजर रखने के लिए कितनी दूर तक जा सकते हैं.
बिना किसी सुरक्षा के इंटरनेट पर मौजूद डेटाबेस
सिस्टम में लोगों के पसंदीदा स्थान, अस्पताल जाने का समय, गैस के बिल, ट्रेन और फ्लाइट की जानकारी, यहां तक कि सीट नंबर तक दर्ज थे. वहीं, सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि वेबसाइट के लॉग-इन पेज पर यूजरनेम और पासवर्ड पहले से ही भरे हुए थे. यानी सैकड़ों लोगों की निजी जानकारी वाला डेटाबेस बिना किसी सुरक्षा के इंटरनेट पर मौजूद था. इसके अलावा, वेबसाइट के कुछ हिस्से अभी अधूरे भी थे और कई जगह खाली बॉक्स तथा डमी टेक्स्ट दिखाई दे रहे थे. इसमें थाइवू स्की रिजॉर्ट आने वाले सभी लोगों- चाहे वे चीनी हों या विदेशी- की तस्वीरें, नाम और पासपोर्ट विवरण भी शामिल थे.
किन देशों के नागरिकों पर खास नजर?
डेटाबेस ने ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, न्यूजीलैंड, ब्रिटेन और अमेरिका के लोगों को फाइव आइज एलायंस नाम के एक ग्रूप में रखा था. इसके अलावा मिस्र, ईरान, इजरायल, मोरक्को, पाकिस्तान और सूडान जैसे देशों के लोगों के लिए “प्रमुख देश” नाम की अलग कैटेगरी बनाई गई थी. वहीं, हांगकांग और ताइवान के लोगों के लिए अलग-अलग फोल्डर बनाए गए थे. विदेशी छात्रों, विदेशी पार्टनर्स और प्रमुख व्यक्तियों नाम की एक कैटेगरी भी थी. चीन में आमतौर पर प्रमुख व्यक्ति शब्द का इस्तेमाल एक्टिविस्ट्स, वांटेंड लोगों या ऐसे लोगों के लिए किया जाता है, जिन्हें सार्वजनिक व्यवस्था के लिए खतरा माना जाता है.
रिकॉर्ड में शामिल कई विदेशी छात्र पाकिस्तान और भारत के थे, जो झांगजियाकौ की हेबेई नॉर्थ यूनिवर्सिटी में पढ़ रहे थे. उनकी फाइलों में सिर्फ नाम और पासपोर्ट नंबर ही नहीं, बल्कि उनका धर्म, वैवाहिक स्थिति, पढ़ाई का विषय और यहां तक कि कैंपस में आते समय कैमरों ने उन्हें किस समय रिकॉर्ड किया, इसकी भी पूरी जानकारी दर्ज थी.

