हूतियों ने लाल सागर में बढ़ाया सैन्य प्रभाव तो सऊदी ने चीन से मांगी मदद, ड्रैगन ने ईरान को दी सलाह

Aarti Kushwaha
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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China Iran Houthi Rebel: पश्चिम एशिया में जंग एक ओर जहां यमन के हूती विद्रोही और सऊदी अरब शामिल है वहीं अब दूसरी ओर चीन भी इस  कूटनीतिक मैदान में उतरता दिखाई दे रहा है. तीन ईरानी सूत्रों के मुताबिक, सऊदी अरब की अपील के बाद चीन ने निजी तौर पर ईरान से कहा है कि वह यमन के हूती विद्रोहियों पर अपना प्रभाव इस्तेमाल करे. ताकि उन्हें लाल सागर और बाब-अल-मंदेब में तनाव बढ़ाने से रोका जा सके.

सऊदी ने चीन से मांगी मदद

दरअसल, हूतियों ने पिछले एक हफ्ते में लाल सागर के तट और बाब-अल-मंदेब स्ट्रेट के आसपास तेजी से सैन्य बढ़त बना ली है, जिससे सऊदी अरब के तेल निर्यात और समुद्री जहाजों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ी हुई है. दोनों एक दूसरे पर हमले कर रहे हैं. यहां तक कि हूतियों ने तो सऊदी के फाइटर जेट F-15 को भी मार गिराने का दावा किया है, जिसके बाद सऊदी ने चीन से मदद की अपील की.
इस दौरान सोचने वाली बात यह है कि इस मामले से निपटने के लिए सऊदी अरब ने अमेरिका की ओर नहीं देखा, बल्कि चीन की तरफ रुख किया है. वहीं, चीन के लिए भी यह मामला बेहद अहम है, क्योंकि वह खाड़ी से आने वाले तेल पर काफी निर्भर है. रिपोर्ट के मुताबिक, चीन चाहता है कि ईरान हूतियों पर अपने प्रभाव का इस्तेमाल करे, ताकि उन रास्तों से जहाजों की आवाजाही बनी रहे, जिनसे चीन की ऊर्जा सप्लाई जुड़ी हुई है.

हूती और अमेरिका के बीच डील

बता दें कि सऊदी तब चीन से मदद मांगी है, जब अमेरिका ने हूतियों से एक सीक्रेट मीटिंग की, जिसके बाद यह साफ हो गया कि हूती और अमेरिका में डील हो गई है, जिसके तहत हूती लाल सागर में अमेरिकी जहाजों पर हमला नहीं करेंगे और बदले में अमेरिकी सेना यमन में उनके खिलाफ हमला नहीं करेगी.

चीन की अपील पर बोला ईरान?

सूत्रों के मुताबिक, चीन की अपील पर ईरान ने भी काफी दिलचस्प जवाब दिया है, उसने कहा है कि क्षेत्र में स्थिरता और शांति तभी संभव है जब अमेरिका और इजरायल के साथ चल रहा युद्ध खत्म हो. यानी बीजिंग ने ईरान से हूतियों को नियंत्रित करने की बात कही, तो तेहरान ने क्षेत्रीय तनाव की जड़ को अमेरिका-इजरायल के साथ अपने संघर्ष से जोड़ दिया. चीनी विदेश मंत्रालय ने कहा कि वह क्षेत्रीय तनाव को यमन और लाल सागर तक फैलने नहीं देना चाहता. बीजिंग ने सभी देशों की संप्रभुता और सुरक्षा के सम्मान तथा बातचीत से समाधान की अपील की है.

चीन के लिए होर्मुज और लाल सागर दोनों अहम

ईरान से रिश्ता, खाड़ी देशों से भी बड़ा कारोबार

वहीं, चीन दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और उसके लिए ऊर्जा की लगातार आपूर्ति बेहद जरूरी है. इसके अलावा चीन की मुश्किल केवल ईरान तक सीमित नहीं है. साल 2025 में ईरान के समुद्री रास्ते से होने वाले तेल निर्यात का 80 फीसदी से अधिक हिस्सा चीन ने खरीदा था. वहीं चीन का खाड़ी सहयोग परिषद यानी GCC देशों के साथ व्यापार करीब 300 अरब डॉलर सालाना बताया गया है. इसलिए बीजिंग के सामने सीधा सवाल है कि ईरान के साथ अपने रणनीतिक रिश्ते बचाए या खाड़ी देशों की सुरक्षा और व्यापारिक हितों को प्राथमिकता दे?
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