‘साइबर हमलों के भुगतने होंगे गंभीर परिणाम’, राष्ट्रीय ढांचे पर रियल-टाइम हमलों को लेकर अमेरिकी सांसदों ने दी चेतावनी

Aarti Kushwaha
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

Cyber Conflict in America: अमेरिका में इस समय में साइबर खतरा सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है. इसी बीच अमेरिकी सासदों का कहना है कि अमेरिका अपने दुश्मनों के साथ एक सक्रिय और लगातार बढ़ते साइबर संघर्ष में उलझा हुआ है. इस दौरान उन्‍होंने चेतावनी भी दी है कि महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर और नेशनल सिस्टम पर हमले रियल टाइम में हो रहे हैं और उन्हें पता लगाना या रोकना मुश्किल होता जा रहा है.

सीनेट की सशस्त्र सेना समिति के प्रमुख रोजर विकर ने कहा कि साइबर खतरे अब सिर्फ सैद्धांतिक नहीं रहे. उन्होंने कहा कि “यह कोई थ्योरेटिकल खतरा नहीं है. यह एक जारी लड़ाई है जो अभी भी चल रही है.”

सुरक्षा को चकमा देने के लिए डिजाइन की गई ये प्रणाली

अमेरिकी सांसद विकर ने कहा कि अमेरिकी साइबर कमांड साइबर डोमेन में रक्षा की पहली और आखिरी लाइन बन चुका है, जो ज्यादातर लोगों की नजर से दूर रहकर उन्नत होते दुश्मनों का सामना कर रहा है. उन्होंने चेताया कि दुश्मन ताकतें ऐसी तकनीकों में भारी निवेश कर रही हैं, जो बचने और सुरक्षा प्रणालियों को चकमा देने के लिए डिजाइन की गई हैं.

बड़े हमलों के प्रति अमेरिकी इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर कमजोर

सशस्त्र सेना समिति के प्रमुख ने कहा कि हम इस चुनौती को अपने देश में देख रहे हैं, जहां हमारा जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर बड़े हमलों के प्रति कमजोर बना हुआ है. उन्होंने आगे कहा कि इसी तरह के खतरे दुनिया भर में दिख रहे हैं, खासकर जब अमेरिका इंडो-पैसिफिक में संभावित टकराव के लिए अपनी साइबर क्षमताओं को मजबूत कर रहा है.

मौजूदा रणनीतिक माहौल में सभी क्षमताओं का एकीकरण बेहद जरूरी

अमेरिकी साइबर कमांड का नेतृत्व करने और राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी (एनएसए) के निदेशक के तौर पर काम करने के लिए नामित लेफ्टिनेंट जनरल जोशुआ रूड ने सीनेटरों से कहा कि साइबर ऑपरेशन अब आधुनिक युद्ध और राष्ट्रीय सुरक्षा से अलग नहीं किए जा सकते. उन्होंने बताया कि एनएसए और साइबर कमांड की खुफिया और परिचालन क्षमताओं के साथ दशकों के अनुभव ने उन्हें यह सिखाया है कि मौजूदा रणनीतिक माहौल में गति, लचीलापन और सभी क्षमताओं का एकीकरण बेहद जरूरी है. 

मिलिट्री ऑपरेशंस में शामिल हो चुके है साइबर इफेक्‍ट्स

उन्होंने कहा कि “दशकों से मुझे एनएसए और साइबर कमांड की इंटेलिजेंस और ऑपरेशनल क्षमताओं का लीडर, उपभोक्ता, प्रवर्तक, जनरेटर और इंटीग्रेटर बनने का मौका मिला है.” जोशुआ रूड ने साइबर को एक ऐसा डोमेन बताया, जिसमें स्पीड, इंटीग्रेशन और लगातार तैयारी की जरूरत होती है. उन्‍होंने कहा कि “मौजूदा रणनीतिक माहौल में निश्चित रूप से गति, फुर्ती और हमारी सभी क्षमताओं के इंटीग्रेशन की जरूरत है.” उन्होंने यह भी कहा कि साइबर इफेक्ट्स अब मिलिट्री ऑपरेशंस में शामिल हो चुके हैं.

कमजोरी के खिड़की में प्रवेश कर रहा अमेरिका

सीनेट समिति के रैंकिंग सदस्य जैक रीड ने चेतावनी दी कि अमेरिका एक कमजोरी की खिड़की में प्रवेश कर रहा है, खासकर तब जब चीन और रूस जैसे प्रतिद्वंद्वी देश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सूचना युद्ध के साथ साइबर टूल्स को जोड़ रहे हैं. उन्होंने सवाल उठाया कि क्या साइबर कमांड इस चुनौती के लिए पूरी तरह तैयार है, क्योंकि बीते कुछ महीनों से उसके पास सीनेट से पुष्टि प्राप्त नेतृत्व नहीं है और वह ‘साइबर कमांड 2.0’ के नाम से जाने जाने वाले संरचनात्मक परिवर्तनों से गुजर रहा है.

अमेरिकी लोकतंत्र को कमजोर करने वाले विदेशी प्रयासों से करनी होगी सुरक्षा

जोशुआ रूड ने कहा कि लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं की रक्षा करना एक प्राथमिकता बनी हुई है. उन्होंने कहा कि “अमेरिकी लोकतंत्र की प्रक्रिया को कमजोर करने के किसी भी विदेशी प्रयास से सुरक्षा की जानी चाहिए.”

साइबर सुरक्षा के लिए सिर्फ डिफेंस काफी नहीं

इस बात पर भी बहस हुई कि क्या अमेरिका को अधिक स्पष्ट आक्रामक साइबर रुख अपनाना चाहिए. सीनेटर डैन सुलिवन ने तर्क दिया कि बचाव के लिए सिर्फ डिफेंस काफी नहीं है. उन्होंने पूछा, “क्या हमला करना ही सबसे अच्छा बचाव नहीं है?” उन्होंने कहा कि दुश्मनों को लगातार साइबर हमलों के लिए बहुत कम नतीजे भुगतने पड़ते हैं.

साइबर कमांड को डिफेंस और अटैक दोनों में होना चाहिए सक्षम

रूड ने कहा कि साइबर कमांड को डिफेंस और अटैक दोनों में सक्षम होना चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि आक्रामक साइबर टूल्स को डिप्लॉय करने का फैसला सिविलियन लीडरशिप के पास होगा.

दूसरे सीनेटरों ने रूड पर अमेरिकी नागरिकों के खिलाफ साइबर और इंटेलिजेंस टूल्स के गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए सेफगार्ड्स के बारे में सवाल किए. सीनेटर एलिसा स्लॉटकिन ने पूछा कि क्या वह बिना किसी विदेशी कनेक्शन के अमेरिकियों के खिलाफ एनएसए की क्षमताओं का इस्तेमाल करने की किसी भी कोशिश को खारिज करेंगे.

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