चीन में दुनिया की सबसे क्रूर परीक्षा शुरू, जानें क्या है Gaokao Exam! आखिर इसे क्यों कहा जाता है देश का राष्ट्रीय उत्सव?

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China Gaokao Exam 2026: चीन की राष्ट्रीय कॉलेज प्रवेश परीक्षा यानी ‘गाओकाओ’ की, जो 7 जून 2026 से शुरू हो चुकी है. चीन के शिक्षा मंत्रालय की तरफ से जारी आंकड़ों के अनुसार, इस साल गाओकाओ परीक्षा के लिए 1.29 करोड़ छात्रों ने रजिस्ट्रेशन कराया है. इस साल यह परीक्षा मुख्य रूप से 7 और 8 जून को आयोजित की जा रही है. हालांकि अलग-अलग विषयों और क्षेत्रीय व्यवस्थाओं के कारण कुछ प्रांतों में इसे 10 जून तक भी खींचा जा रहा है.

सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण परीक्षा

चीनी युवाओं के लिए यह परीक्षा उनके जीवन की सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण परीक्षा है. दुनिया में इस परीक्षा को ‘दुनिया की सबसे कठिन और क्रूर परीक्षा’ का दर्जा मिला हुआ है. गाओकाओ परीक्षा हर साल जून में आयोजित की जाती है और यह चीन के हाई स्कूल ग्रेजुएट्स के लिए हायर एजुकेशन यानी देश की टॉप यूनिवर्सिटीज में एडमिशन पाने का एकमात्र और मुख्य रास्ता है. गाओकाओ परीक्षा के दिन चीन में इस कदर सन्नाटा पसर जाता है कि परीक्षा केंद्रों के आस-पास की सड़कों पर ट्रैफिक तक रोक दिया जाता है, जिससे बच्चों को कोई डिस्टर्बेंस न हो.

टॉप यूनिवर्सिटी में सीट चाहिए

‘गाओकाओ’ का सीधा सा मतलब है ‘उच्च शिक्षा प्रवेश परीक्षा’. चीन में अगर किसी स्टूडेंट को टॉप यूनिवर्सिटी में सीट चाहिए तो उसे यह परीक्षा देनी ही होगी. गाओकाओ परीक्षा में मिलने वाले स्कोर के आधार पर ही तय होता है कि स्टूडेंट को देश के किसी नामी संस्थान (जैसे सिंघुआ या पेकिंग यूनिवर्सिटी) में जगह मिलेगी या फिर उसे किसी साधारण कॉलेज से संतोष करना होगा. चीन में माना जाता है कि गाओकाओ में मिला स्कोर केवल कॉलेज ही तय नहीं करता, बल्कि यह किसी युवा के करियर, उसकी शादी की संभावनाओं और समाज में उसकी प्रतिष्ठा को भी तय करता है.

लगभग 9-10 घंटे की होती है परीक्षा 

गाओकाओ परीक्षा कुल मिलाकर लगभग 9-10 घंटे की होती है, जिन्हें दो से तीन दिनों में बांटा जाता है. परीक्षा हर दिन दो शिफ्ट में चलती है. गाओकाओ परीक्षा के मुख्य रूप से 2 हिस्से होते हैं. पहले हिस्से में 3 अनिवार्य विषय रहते हैं. इसके बाद स्टूडेंट अपनी पसंद या स्ट्रीम के अनुसार 2 कैटेगरीज में से एक चुनते हैं. विज्ञान चुनने वाले छात्रों को फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी की परीक्षा देनी होती है. वहीं, आर्ट्स या ह्यूमैनिटीज चुनने वालों को इतिहास, भूगोल और पॉलिटिकल साइंस का पेपर देना होता है. हर पेपर की अवधि 2 से 2.5 घंटे की होती है.

चीन सरकार के लिए साख का सवाल

गाओकाओ परीक्षा में नकल रोकना चीन सरकार के लिए साख का सवाल होता है. परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा के इंतजाम किसी मिलिट्री ऑपरेशन जैसे होते हैं. केंद्रों पर हाई-टेक ड्रोन, फेशियल रिकग्निशन (चेहरा पहचानने वाली तकनीक) और सिग्नल जैमर्स का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे कोई भी इलेक्ट्रॉनिक गैजेट काम न कर सके. अगर कोई स्टूडेंट गाओकाओ परीक्षा में नकल करते हुए या सॉल्वर गैंग की मदद लेते हुए पकड़ा जाता है तो चीन के कानून के मुताबिक उसे सीधे 7 साल तक की जेल की सजा हो सकती है.

इस बार स्थानीय प्रशासन को बेहद सख्त निर्देश

गाओकाओ परीक्षा 2026 में रिकॉर्डतोड़ भीड़ को देखते हुए चीन के शिक्षा मंत्रालय ने इस बार स्थानीय प्रशासन को बेहद सख्त निर्देश दिए हैं. गाइडलाइंस के मुताबिक, उम्मीदवारों की सुविधा के लिए पब्लिक सिक्योरिटी, सुचारू ट्रांसपोर्टेशन और फूड सेफ्टी (खाद्य सुरक्षा) के सख्त इंतजाम किए गए हैं. जून की भीषण गर्मी को देखते हुए परीक्षा केंद्रों पर एसी और ओआरएस जैसे ‘हीट प्रिवेंशन मेजर्स’ (गर्मी से बचाव के इंतजाम) की व्यवस्था की गई है. इसके अलावा, परीक्षा केंद्रों के आस-पास हॉर्न बजाने पर पूरी तरह पाबंदी (नॉइस कंट्रोल) लगा दी गई है.

बड़े पैमाने पर ‘साइकोलॉजिकल काउंसलिंग’ की व्यवस्था

चीनी स्टूडेंट्स पर गाओकाओ परीक्षा का दबाव इस कदर होता है कि इसे ‘मानसिक टॉर्चर’ भी कहा जाता है. परीक्षा के डर से स्टूडेंट्स को डिप्रेशन से बचाने के लिए चीन सरकार ने बड़े पैमाने पर ‘साइकोलॉजिकल काउंसलिंग’ (मानसिक परामर्श) की व्यवस्था की है. गाओकाओ एग्जाम सेंटर 2026 से लेकर स्कूलों तक में थेरेपिस्ट तैनात किए गए हैं, जो अभ्यर्थियों और उनके माता-पिता का तनाव कम करने का काम कर रहे हैं. यही वजह है कि इस परीक्षा को सिर्फ एग्जाम नहीं, बल्कि पूरे चीन का राष्ट्रीय उत्सव और परीक्षा का महाकुंभ माना जाता है.

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