जर्मनी कर रहा युद्ध की तैयारी? अमेरिका से खरीदेगा 400 टॉमहॉक क्रूज मिसाइलें 

Aarti Kushwaha
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

Germany: हिटलर का देश जर्मनी एक बार फिर से अपनी सेना को मजबूत करने की तैयारियो में जुटा हुआ है. इजरायल से एरो एयर डिफेंस सिस्‍टम लेने के बाद अब अपनी मारक क्षमता को बढ़ा रहा है. दरअसल, जर्मनी अमेरिका से 400 टॉमहॉक क्रूज मिसाइलें खरीद रहा है और अमेरिकी राष्‍ट्रपति की तरफ से भी इसको सैद्धांतिक मंजूरी भी म‍िल गई है.

बता दें कि जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने तुर्की में नाटो के शिखर बैठक के दौरान इस डील का ऐलान किया. इसके अलावा 3 टायफून , एंटी श‍िप मिसाइल सिस्‍टम भी जर्मनी लेने जा रहा है. हालांकि अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने अभी तक इस सौदे का कोई औपचारिक रूप से सार्वजनिक ऐलान नहीं किया है. ऐसे में माना जा रहा है कि रूस के बढ़ते खतरे से निपटने के लिए जर्मनी अपनी सेना को जंग के लिए तैयार कर रहा है.

400 टॉमहॉक ब्‍लॉक वीबी मिसाइल और 3 लांचर खरीदना चाहता है जर्मनी

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, जर्मनी 400 टॉमहॉक ब्‍लॉक वीबी मिसाइल और 3 लांचर खरीदना चाहता है. जानकारों का कहना है कि जर्मनी के लिए अमेरिकी क्रूज मिसाइल हासिल करना बेहद अहम है. मौजूदा समय में जर्मनी के पास लंबी दूरी तक मार करने वाली केवल Taurus मिसाइल है, जिसकी मारक क्षमता 500 किलोमीटर है. वहीं, टॉमहॉक मिसाइल की रेंज 1600 किलोमीटर है. इस मिसाइल की जरिए जर्मनी अपनी जमीन से ही रूस पर मिसाइल हमला करने में सक्षम हो जाएगा. वहीं, बात करें रूस की तो उसके पास यूरोप को कई बार तबाह करने लायक मिसाइल ताकत है.

रूस तक हमला कर सकती हैं टॉमहॉक म‍िसाइलें

जानकारों के मुताबिक, क्रूज मिसाइलों को दुश्‍मन के एयर डिफेंस सिस्‍टम से बचना होता है और इसी वजह से उनकी रेंज 50 फीसदी तक कम हो सकती है. यदि टायफून सिस्‍टम को जर्मनी पोलैंड की जमीन पर ले जाता है तो रूस को आसानी से न‍िशाना बनाया जा सकता है. ऐसे में अगर जर्मनी इन मिसाइलों को यूक्रेन में तैनात करता तो इससे रूस के सुदूरवर्ती इलाके को भी न‍िशाना बनाया जा सकेगा.

जर्मनी अमेरिका से मिसाइल खरीद तो रहा है लेकिन उसके सामने सबसे बड़ी दिक्‍कत समय पर सप्‍लाई की है. दरअसल, अमेरिका ने ईरान युद्ध के दौरान बड़े पैमाने पर अपनी टॉमहॉक क्रूज मिसाइलों को दाग दिया था जिससे उसके पास भंडार काफी कम हो गया है. ऐसे में अमेरिका की इन्‍हें बनाने की क्षमता भी सीमित है. अमेरिका हर साल केवल 207 टॉमहॉक क्रूज मिसाइलें बना सकता है. इसे अब 785 मिसाइलें हर साल बनाने पर काम चल रहा है. वहीं अमेरिका को पहले ही ऑस्‍ट्रेलिया, जापान और नीदरलैंड से 800 मिसाइलों का ऑर्डर मिला हुआ है. यही वजह है कि जर्मनी चाहता है कि उन्‍हें इन म‍िसाइलों को अपने ही देश में बनाने का अधिकार मिले.

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