बता दें कि या तुफान जब चला तो अपनी पूरी ताकत के साथ था, लेकिन अब इसकी शक्ति कम होती जा रही है. बावजूद इसके तेज हवाओं के साथ भारी बारिश होने की चेतावनी दी जा रही है और एहतियातन मेक्सिको ने 18000 फर्स्ट रेस्पॉन्डर्स की टीम तैनात कर दी है.
वहीं, पैसेफिक सी में सक्रिय उष्णकटिबंधीय तूफान वेंस की ताकत धीरे-धीरे कम हो रही है, इसके बावजूद मेक्सिको के कई राज्यों में भारी बारिश और अचानक बाढ़ आने का खतरा बना हुआ है. अमेरिका के नेशनल हरिकेन सेंटर के मुताबिक, तूफान के कारण पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन की आशंका भी है. बता दें कि वेंस शुक्रवार तक श्रेणी-2 का हरिकेन था. अब यह कमजोर होकर उष्णकटिबंधीय तूफान में बदल गया है लेकिन इसकी हवाओं की रफ्तार अभी भी 70 मील प्रति घंटे यानी करीब 110 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच रही है.
6 राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट
ऐसे में मौसम वैज्ञानिकों ने मेक्सिको के कोलिमा, नयारित और सिनालोआ राज्यों के साथ मिचोआकान, हालिस्को और दुरांगो के कुछ हिस्सों में भारी बारिश की चेतावनी दी है. इन इलाकों में करीब 5 से 10 सेंटीमीटर तक बारिश हो सकती है. कुछ स्थानों पर बारिश का आंकड़ा 17 सेंटीमीटर तक पहुंचने की आशंका है. लगातार पानी बरसने से निचले इलाकों में पानी भर सकता है. वहीं पहाड़ी क्षेत्रों में मिट्टी खिसकने और अचानक बाढ़ आने का खतरा बढ़ सकता है. प्रशासन और स्थानीय लोगों के लिए मौसम की स्थिति पर नजर रखना जरूरी होगा.
प्रशांत महासागर में एक और तूफान
इसी बीच मध्य प्रशांत महासागर में उष्णकटिबंधीय तूफान ओलाना भी बन गया है. फिलहाल इससे किसी आबादी वाले क्षेत्र को खतरा नहीं बताया गया है लेकिन ओलाना की अधिकतम स्थायी हवाओं की रफ्तार 45 मील प्रति घंटे यानी करीब 65 किलोमीटर प्रति घंटे है. यह जॉनस्टन द्वीप से लगभग 935 किलोमीटर पश्चिम-दक्षिण-पश्चिम में था. वहीं तूफान वेंस मेक्सिको के अकापुल्को शहर से लगभग 510 किलोमीटर पश्चिम-दक्षिण-पश्चिम में था. आने वाले दिनों में इसके उत्तर की ओर मुड़ने का अनुमान जताया गया.
क्यों प्रशांत महासागर में उठ रहे तूफान?
इस साल प्रशांत महासागर में तूफानों की गतिविधियां काफी तेज रही हैं. विशेषज्ञों के मुताबिक अल नीनो की स्थिति और ग्लोबल वार्मिंग से जुड़ी परिस्थितियां मौसम के सामान्य पैटर्न को प्रभावित कर रही हैं. इसका असर अमेरिका के दक्षिण-पश्चिमी हिस्सों में आई भीषण बाढ़ और बवंडरों के साथ मध्य अमेरिका के कुछ इलाकों में लंबे समय से जारी सूखे के रूप में भी देखा जा रहा है.