‘शरिया पढ़ने वालों को देश में घुसने नहीं दूंगा’, मुस्लिम होकर कट्टरपंथ को नकारा, आखिर कौन हैं 38 साल के धाकड़ लीडर?

Aarti Kushwaha
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
Ibrahim Traore: कुछ देशों के लीडर इतने प्रभावशाली होते हैं कि उनकी चर्चा होती ही रहती है. ऐसे ही लीडर कैप्टन इब्राहीम ट्राओरे हैं, जो एक छोटे से लैंडलॉक्ड देश बुर्कीना फासो को राष्ट्रपति हैं, जिनके बयानों को लेकर सोशल मीडिया पर अक्सर चर्चा छिड़ी रहती है.
बता दें कि बुर्कीना फासो में मुस्लिमों की आबादी सबसे ज्यादा है लेकिन इस देश की कमान संभालने के बाद से ट्राओरे हमेशा इस बात को मुखर होकर कहते रहे हैं कि वे अपने देश का इस्लामीकरण नहीं बल्कि विकास करना चाहते हैं. यही वजह है कि सोशल मीडिया पर उनको पसंद करने वालों की तादाद अच्छी खासी है.

देश में कभी नहीं लागू होगा शरिया कानून 

बुर्किना फासो के अंतरिम राष्ट्रपति कैप्टन इब्राहिम ट्राओरे ने हाल ही में एक स्पष्ट और दृढ़ संदेश दिया है कि ‘मैं मुस्लिम हूं, लेकिन बुर्किना फासो में हर नागरिक को अपनी धर्म की स्वतंत्रता है. इस देश में कभी भी शरिया कानून नहीं लागू होगा.’ साथ ही उन्होंने सऊदी अरब में शरिया कानून की पढ़ाई कर रहे बुर्किनाबे छात्रों को चेतावनी दी कि वे वापस न लौटें. उन्होंने चेताते हुए कहा है कि ‘तकनीकी ज्ञान और कौशल हासिल करने के बजाय आप शरिया पढ़ रहे हैं, तो वहीं रहें, यहां वापसी की अनुमति नहीं होगी.’

2.2 करोड़ है र्किना फासो की आबादी

ट्राओरे का यह बयान देश की धार्मिक सद्भाव, राष्ट्र निर्माण और अतिवाद के खिलाफ लड़ाई को रेखांकित करता है, जो सोशल मीडिया पर खूब पसंद किया जा रहा है. बता दें कि र्किना फासो में आबादी लगभग 2.2 करोड़ है. साल 2019 की जनगणना के मुताबिक 63.8 प्रतिशत मुस्लिम यहां मौजूद हैं, जिसमें ज्यादातर सुन्नी, मालिकी स्कूल और सूफी प्रभावित हैं. 26.3 फीसदी ईसाई और 9 फीसदी पारंपरिक अफ्रीकी धर्मों को मानने वाले हैं.
 देश संवैधानिक रूप से धर्मनिरपेक्ष है और संविधान धार्मिक स्वतंत्रता की गारंटी देता है. ट्राओरे का बयान इस पृष्ठभूमि में महत्वपूर्ण है. देश में 2016 से जिहादी समूहों (JNIM, S Sahel) का आतंक बढ़ा है. इन समूहों ने गांवों पर हमले, गिरजाघरों और मस्जिदों पर हमले किए, सैकड़ों नागरिकों की हत्या की और लाखों को विस्थापित किया. 2024-25 में हिंसा और बढ़ी, जिसमें हजारों मौतें हुईं.

ट्राओरे ने क्या-क्या प्रयास किए?

  1. अब ट्राओरे ने धार्मिक भाषणों पर नियंत्रण, अतिवादी व्याख्याओं के खिलाफ एकता और युवाओं को तकनीकी शिक्षा की ओर मोड़ने पर जोर दिया.
  2. उन्होंने कहा कि सच्चा इस्लाम शांति का धर्म है, न कि भाईचारे की हत्या का. हाल के वर्षों में सरकार ने धार्मिक स्वतंत्रता कानून को मजबूत किया, जिसमें प्रचार पर निगरानी शामिल है, ताकि नफरत और हिंसा न फैले.
  3. ट्राओरे का रुख व्यावहारिक राष्ट्रवाद को दिखाता है. वे चाहते हैं कि युवा शरिया की बजाय विज्ञान, प्रौद्योगिकी और विकास के क्षेत्र में निवेश करें. देश गरीबी, आतंकवाद और आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहा है, लेकिन ट्राओरे संप्रभुता और आत्मविश्वास पर जोर देते हुए AES के माध्यम से क्षेत्रीय सहयोग बढ़ा रहे हैं. वे लगातार कहते रहे हैं कि अतिवाद नहीं बल्कि विकास से ही देश का भला होगा.
Latest News

सिर्फ सजावट ही नहीं, सेहत का भी ख्याल रखता है स्नेक प्लांट, घर के वातावरण को भी बनाए बेहतर

Snake plant: आजकल लोग अपने घरों और आफिसो को हरा-भरा और आकर्षक बनाने के लिए विभिन्न प्रकार के इनडोर...

More Articles Like This

Exit mobile version