विदेशी निवेश नीति में बदलाव…, मिडिल ईस्ट के बीच भारत ने चीन के साथ मिलकर किया खेल

Must Read

India Eases FDI Rules : मिडिल ईस्ट में इस समय भारी तनाव बना हुआ है. Iran पर United States और Israel की ओर से लगातार हमले किए जा रहे हैं, बता दें कि ईरान की सेना भी ड्रोन हमलों के जरिए जवाब दे रही है. इस दौरान वेस्ट एशिया में जारी इस अशांति के बीच India कूटनीतिक स्तर पर सक्रिय हो गया है और विभिन्न देशों के साथ अपने संबंधों को संतुलित करने की कोशिश कर रहा है. जानकारी के मुताबिक, इसी दिशा में भारत सरकार ने चीनी कंपनियों को लेकर एक अहम कदम उठाया है.

प्राप्‍त जानकारी के अनुसार प्रत्यक्ष विदेशी निवेश नीति में बदलाव की अधिसूचना जारी की. ऐसे में नए नियम के तहत 10 प्रतिशत तक चीनी हिस्सेदारी वाली विदेशी कंपनियों को भारत में ऑटोमैटिक रूट के जरिए निवेश की अनुमति दी गई है. बताया जा रहा है कि यह छूट China या Hong Kong में पंजीकृत कंपनियों या भारत से भूमि सीमा साझा करने वाले अन्य देशों की कंपनियों पर लागू नहीं होगी.

लाभकारी स्वामित्वपर लागू होगा नया नियम

जानकारी के मुताबिक, पहले, यदि किसी विदेशी कंपनी में सीमावर्ती देशों के किसी भी निवेशक की मामूली हिस्सेदारी भी होती थी, तो इसे लेकर उसे भारत में निवेश के लिए सरकार की मंजूरी लेना अनिवार्य था. लेकिन नए नियमों के मुताबिक, अब यह नियम केवल ‘लाभकारी स्वामित्व’ (Beneficial Ownership) पर लागू होगा. ऐसे में वास्तविक स्वामी की पहचान के आधार पर ही मंजूरी की आवश्यकता तय की जाएगी.

नया प्रावधान

इसके अलावा किसी कंपनी में 10 प्रतिशत या उससे अधिक हिस्सेदारी रखने वाला व्यक्ति या संस्था ‘लाभकारी स्वामी’ मानी जाएगी. बता दें कि कुछ ही समय पहले एफडीआई नियमों में यह बदलाव केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा मंजूर किया गया था. क्‍योंकि माना जा रहा है कि कोविड-19 महामारी के दौरान भारत सरकार ने 17 अप्रैल 2020 को Press Note 3 (2020) जारी किया था, जिसके तहत भारत से भूमि सीमा साझा करने वाले देशों के निवेशकों के लिए सरकारी मंजूरी अनिवार्य कर दी गई थी. जानकारी के मुताबिक, इन देशों में China, Pakistan, Bangladesh, Nepal, Bhutan, Myanmar और Afghanistan शामिल हैं.

डीपीआईआईटी की तय प्रक्रिया के तहत रिपोर्ट

प्राप्‍त जानकारी के अनुसार नई अधिसूचना का कहना है कि यदि किसी निवेशक इकाई में इन देशों के नागरिकों या संस्थाओं की प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष हिस्सेदारी है और उसे सरकारी मंजूरी की जरूरत नहीं है, तो ऐसे निवेशों को डीपीआईआईटी की तय प्रक्रिया के तहत रिपोर्ट करना होगा. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल 2000 से दिसंबर 2025 तक भारत में कुल एफडीआई इक्विटी प्रवाह में China की हिस्सेदारी मात्र 0.32 प्रतिशत रही है.

इसे भी पढ़ें :- अपनों से धोखा खा गए ट्रंप! होर्मुज पर किसी ने नहीं दिया साथ, गुस्से में बोले…

Latest News

18 March 2026 Ka Panchang: बुधवार का पंचांग, जानिए शुभ मुहूर्त और राहुकाल का समय

18 March 2026 Ka Panchang: हिंदू धर्म में किसी भी कार्य को करने से पहले शुभ और अशुभ मुहूर्त...

More Articles Like This